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जानें सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सदियों पुरानी प्रथा तोड़ने वाली पहली दो महिलाओं की कहानी

News18Hindi
Updated: November 14, 2019, 12:07 PM IST
जानें सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सदियों पुरानी प्रथा तोड़ने वाली पहली दो महिलाओं की कहानी
बिंदु और कनकदुर्गा के भगवान अय्यपा की पूजा करने के कुछ घंटों बाद एक पुजारी ने सबरीमाला मंदिर को बंद कर दिया.

बिंदु (Bindu) और कनकदुर्गा (Kanakadurga) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की अनुमति के बाद सबरीमाला (Sabarimala) के भगवान अय्यपा मंदिर में प्रवेश करने वाली पहली महिलाएं हैं. हालांकि, सबरीमाला मंदिर की सदियों पुरानी प्रथा को तोड़ने के बाद से बिंदु अम्मिनी एक से दूसरे सेफ हाउस (Safe House) में भटक रही हैं. उन्‍हें इस कदम की कीमत पति और बेटी से अलग रहकर चुकानी पड़ रही है.

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  • Last Updated: November 14, 2019, 12:07 PM IST
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कोच्चि. बिंदु अम्मिनी (Bindu Ammini) 2 जनवरी, 2019 की सुबह अपनी मित्र कनकदुर्गा (Kanakadurga) के साथ दक्षिण भारत के जंगलों से घिरे इलाके में खड़ी चढ़ाई के ठीक नीचे खड़ी थीं. दोनों दोस्‍त इतिहास रचने से महज 3 किमी दूर थे. करीब दो घंटे बाद अलसुबह 3.45 बजे दोनों सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में प्रवेश करने पहली महिलाओं का रिकॉर्ड बनाने वाली थीं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 28 सितंबर 2018 को हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत देने वाला फैसला दिया था. इसके बाद अक्‍टूबर, 2018 में दर्जनों महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश तो की, लेकिन विरोध और उन पर नारियल फेंके जाने के कारण उन्‍हें सफलता नहीं मिल पाई. दरअसल, भगवान अय्यपा के मंदिर में 10 से 50 साल के आयुवर्ग की बच्चियों व महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं थी.

दोनों के प्रवेश के बाद पुजारियों ने मंदिर का शुद्धिकरण किया 
बिंदू अम्मिनी की इस यात्रा के वीडियो में दो महिलाओं को लंबे काले गाउन में एक मेहराब से गुजरते हुए दिखाया गया है. पेशे से वकील 40 वर्षीय अम्मिनी ने कैमरे पर बताया कि उनकी यात्रा बहुत अच्‍छी रही. इसके कुछ घंटे बाद लोग जागे और दोनों का विरोध प्रदर्शन (Protest) शुरू हो गया. केरल में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस (Police) पर देसी बमों (Crude Bombs) से हमला कर दिया. इस झड़प में एक व्‍यक्ति की मौत हो गई, जबकि दर्जनों घायल हुए. इस मामले में 3,000 से ज्‍यादा लोगों को गिरफ्तार (Arrested) किया गया. बिंदु और कनकदुर्गा के भगवान अय्यपा की पूजा करने के कुछ घंटों बाद एक पुजारी ने सबरीमाला मंदिर को बंद कर दिया. इसके बाद जल छिड़कर मंदिर का शुद्धिकरण (Purification) किया गया. इससे साफ होता है कि मासिक धर्म की उम्र के दौरान महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की पाबंदी आस्‍था से जुड़ा मामला है.

पति-बेटी से दूर एक से दूसरे सेफ हाउस दौड़ती रहती हैं बिंदु

भगवान अय्यपा (Lord Ayyapa) के मंदिर में प्रवेश के कुछ दिन बाद से बिंदु का एक से दूसरे सेफ हाउस (Safe House) दौड़ने का सिलसिला शुरू हो गया. उन्‍हें मंदिर में प्रवेश की कीमत अपने पति और बेटी से दूर रहकर चुकानी पड़ रही है. उन्‍हें डर है कि घर लौटने पर उनके साथ कुछ बुरा हो सकता है. बावजूद इसके वह कहती हैं कि उनका मंदिर में प्रवेश करना कारगर रहा. गरीबी में पली बढ़ी बिंदु कहती हैं कि उनके मंदिर में प्रवेश को विरोध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्‍होंने समानता के संवैधानिक अधिकार (Right to Equality) का इस्‍तेमाल किया. हमने परेशानी खड़ी करने के लिए यात्रा नहीं की थी. हमारा लक्ष्‍य मंदिर जाना और अगली पीढ़ी को प्रोत्‍साहित करना था. हर साल लाखों लोग मंदिर की स्‍वर्णजडि़त 18 सीढि़यों को चढ़ने का इंतजार करते हैं. लोगों का कहना है कि भगवान अय्यपा बाल ब्रह्मचारी थे. इसलिए ये नियम बनाया गया था.

कनकदुर्गा के परिवार ने किया था मंदिर में प्रवेश का विरोध
सबरीमाला में प्रवेश करने वाली 44 साल की दूसरी महिला कनकदुर्गा केरल राज्य सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन में अस्सिटेंट मैनेजर (Assistant Manager) हैं. बताया जाता है कि कनक काफी धार्मिक आस्थाओं वाली महिला हैं. वह लगातार मंदिरों में जाती हैं. हालांकि, जब उनके परिवार को पता लगा कि वह सबरीमाला जाने की योजना बना रही हैं तो परिवार ने उनका विरोध किया. कनक के पति इंजीनियर हैं. वह दो बच्चों की मां हैं. वह परंपरागत तौर पर केरल के धार्मिक नायर परिवार से हैं. नायर समुदाय केरल के सवर्ण वर्ग में आता है. बिंदू और कनकदुर्गा की मुलाकात फेसबुक पर हुई. दोनों फेसबुक पेज नवोतन केरलम सबरीमालायीलेकु (रेनांसा केरल) से जुड़ी हुई थीं. ये फेसबुक का वो पेज था, जिसे सबरीमाला में प्रवेश की इच्‍छा रखने वाली महिलाओं ने बनाया था.(Kai Schultz c.2019 New York Times News Service)

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First published: November 14, 2019, 11:44 AM IST
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