जानें क्या है ऑपरेशन लोटस 3.0, जो बन सकता है कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की वजह

कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार पर संकट गहरा गया है क्योंकि ताज़ा ख़बरों में कहा जा रहा है कि कांग्रेस और जेडीएस के 8 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है. अब चर्चा ये है कि ये भाजपा के ऑपरेशन लोटस का नतीजा तो नहीं? जानें क्या है ये ऑपरेशन.

News18Hindi
Updated: July 6, 2019, 4:41 PM IST
जानें क्या है ऑपरेशन लोटस 3.0, जो बन सकता है कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की वजह
गृह मंत्री अमित शाह के साथ चर्चा करते पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, फ़ाइल फोटो.
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Updated: July 6, 2019, 4:41 PM IST
सुनने में शायद ऐसा लगे कि यह सेना या किसी सुरक्षा एजेंसी का कोई मिशन है, लेकिन ऐसा है नहीं. वास्तव में, ये भारतीय जनता पार्टी की एक कवायद के लिए गढ़ा हुआ शब्द है, जिसके तहत पार्टी राज्यों में अपनी सरकार के समीकरण साधने की कोशिश कर रही है. इस कथित ऑपरेशन के तहत पार्टी या तो दूसरी पार्टियों के विधायकों को कथित रूप से खरीदती है या उन्हें प्रभावित करती है. लेकिन ये सब होता क्यों और कैसे है?

पढ़ें- कर्नाटक में 8 और विधायकों ने दिया इस्तीफा

कहा जाता है कि ऑपरेशन लोटस के तहत बीजेपी के नेता पहले दूसरी पार्टियों के विधायकों से संपर्क करते हैं और फिर उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए प्रभावित करते हैं. इन विधायकों से इस्तीफ़ा देने से बीजेपी को क्या फायदा होता है? इस्तीफे से विधानसभा की संख्या घट जाती है और इसका फायदा धीरे धीरे किसी ख़ास पार्टी को होता है. जानें पूरा गणित और ऑपरेशन लोटस 3.0 का पूरा सच.

कहाँ से शुरू हुआ था ऑपरेशन लोटस?

2004 में जब कर्नाटक में धरम सिंह मुख्यमंत्री बने थे, तब भाजपा ने सरकार गिराने की जो कवायदें की थीं, तब ये शब्द ऑपरेशन लोटस पहली बार चर्चा में आया था. विपक्ष ने भाजपा पर अपने आधार के साथ ही विधायकों की संख्या बढ़ाने की कवायद को ऑपरेशन लोटस शब्द दिया था. ये भाजपा का कोई ज़ाहिर अभियान नहीं है बल्कि विपक्ष और मीडिया भाजपा की कवायद को इस नाम से सम्बोधित करता रहा है.

कर्नाटक में ऑपरेशन लोटस 3.0
कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के पास मिलाकर कुल 118 सीटें हैं जबकि राज्य की विधानसभा में कुल 224 विधायक हैं. बीजेपी के पास 2 निर्दलीयों के सहयोग को मिलाकर कुल 106 विधायक हैं. ऐसे में अगर बीजेपी के विरोधी विधायक इस्तीफ़ा देते हैं तो होता ये है कि विधानसभा में विधायकों की संख्या कम होती है. बीजेपी इस संख्या को अगर 210 तक ला पाती है तो ऐसे में 106 विधायकों के साथ वह बहुमत में आ जाती है और सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है.
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सबसे बड़ी भूमिका इस ऑपरेशन लोटस 3.0 में राज्य भाजपा प्रमुख येदियुरप्पा की रही है. फ़ाइल फोटो.


तो अब किसे लगेगा कैसा झटका?
मीडिया में आ चुकी ख़बरों के हिसाब से बीजेपी पहले भी कुछ राज्यों में ऐसी कोशिशें कर चुकी है. कर्नाटक में इस साल की शुरुआत में बीजेपी ने कांग्रेस के तीन विधायकों से मुंबई के एक होटल में मुलाक़ात की थी. ख़बरों के मुताबिक़ पार्टी ने इसके बाद 17 और विधायकों पर दबाव बनाने की कोशिश की थी. हालांकि राज्य के वर्तमान सीएम कुमारास्वामी बीजेपी के इस कथित ऑपरेशन लोटस के प्रभाव को हर बार नकारते रहे हैं.

ये भी कहा गया था कि ऑपरेशन लोटस 3.0 अगर योजना के मुताबिक़ चला तो बीजेपी कर्नाटक में सरकार बनाने का दावा करने की स्थति में आ सकती है. ताज़ा हालात के मद्देनज़र बताया जा रहा है कि कांग्रेस और जेडीएस के 8 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है. कुछ दिन पहले हाल में दो विधायकों के इस्तीफे की खबर भी चर्चा में थी. ऐसे में, बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कह दिया है कि कुछ और विधायकों का इस्तीफा होता है तो सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.

ये भी याद रखने लायक है कि ऑपरेशन लोटस 3.0 के तहत अब तक जो ख़बरें हैं उनके मुताबिक़ इस्तीफ़ा देने वालों को बाद में बीजेपी का साथ मिलेगा और वो ज़रुरत होने पर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ सकेंगे. ऐसे में, सवाल ये है कि क्या ये पैंतरे जायज़ हैं? कांग्रेस सहित कुछ और पार्टियां दलबदल के इल्ज़ाम लगाकर इस ऑपरेशन पर सवाल खड़े कर चुकी हैं.

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First published: July 6, 2019, 2:57 PM IST
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