बुलटप्रूफ जैकेट और गॉगल्स ही नहीं, ये आर्मी पहनती है 'ब्लास्ट प्रूफ' अंडरवियर

बुलटप्रूफ जैकेट और गॉगल्स ही नहीं, ये आर्मी पहनती है 'ब्लास्ट प्रूफ' अंडरवियर
सैनिकों को गुप्तांगों की गंभीर क्षति से बचाने के लिए केवलर अंडरवियर का इस्तेमाल होता है.

लगातार Firing या Bomb Blasts की जद में रहने वाले खतरनाक युद्धक्षेत्रों में तैनात Soldiers को गहरे ज़ख्म संवेदनशील अंगों पर होते रहे, कि वो जानलेवा हमलों से बचने के बाद प्रजनन में सक्षम नहीं रह जाते थे. सैनिकों को इस तरह की Serious Injury से बचाने के लिए बेहतर उपकरणों के साथ ही सुरक्षा साधन मुहैया कराए गए.

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जब सैनिक किसी ऐसे युद्धक्षेत्र में होते हैं, जहां लगातार गोलीबारी और धमाके होते हों, तब उन्हें Security के लिए एक पूरा कवच (Body Armour) चाहिए होता है. Defense पर सबसे ज़्यादा खर्च करने वाले USA की ऐसी सेना को जो जोखिम भरे युद्धक्षेत्रों में तैनात रहती हैं, उन्हें बुलटप्रूफ हेलमेट, जैकेट या कवच के साथ ही धमाका बर्दाश्त कर सकने वाले Blast Proof Underwear भी मुहैया करवाए जाते हैं. क्या America ऐसा इकलौता देश है? ये भी जानें कि क्या और कैसे होते हैं ये ब्लास्ट प्रूफ अंडरवियर.

क्यों ज़रूरत हुई महसूस?
जब अफगानिस्तान और मध्य पूर्व के इलाकों में अमेरिका और उसके सहयोगियों की सेनाएं संघर्ष कर रही थीं, तब वहां अक्सर सैनिक गोलीबारी या IED धमाकों में बुरी तरह घायल होते थे. हेलमेट और बुलटप्रूफ जैकेट की मदद से शरीर के ऊपरी हिस्से का काफी बचाव हो पाता था, लेकिन निचले हिस्से में गंभीर चोटें आती थीं. ऐसे में, कई सैनिकों के गुप्तांग के हिस्से में गंभीर क्षति से बचने के लिए एक सुरक्षित अंडरपैंट की ज़रूरत महसूस की गई.

अमेरिकी आर्मी ने कैसे ​डेवलप किया ये अंडरवियर?
अस्ल में, इससे पहले ब्रिटेन में कुछ सैनिकों के लिए सुरक्षा बल बीसीबी निर्मित 'ब्लास्ट बॉक्सर' इस्तेमाल कर रहे थे. यहां से अमेरिकी आर्मी ने आइडिया लिया और अपने सैनिकों के अनुकूल अंडरपैंट विकसित किए. इनमें दो सतही सुरक्षा दी गई थी ताकि सैनिक गंभीर हमले में अपने शरीर के निचले हिस्से में क्षति से बच सकें. इसे अमेरिकी सेना में 'केवलर बॉक्सर' या 'कॉम्बैट अंडरपैंट' कहा जाता है.



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अमेरिकी सेना को दो लेयर प्रोटेक्शन वाले केवलर बॉक्सर दिए जाते हैं. चित्र NewAtlas से साभार.


कैसा है ये अमेरिकी केवलर बॉक्सर?
इसमें सुरक्षा की दो लेयर होती हैं. टियर 1 में प्रोटेक्टिव अंडरगारमेंट यानी PUG और टियर 2 में प्रोटेक्टिव आउटर गारमेंट यानी POG होता है. सेना की जो युद्ध संबंधी पूरी यूनिफॉर्म होती है, उसके भीतर इसे शॉर्ट्स की तरह ही पहना जाता है. इस केवलर बॉक्सर को यूनिफॉर्म के भीतर अंडरवियर की तरह भी पहना जा सकता है और यूनिफॉर्म के ऊपर या बाहर भी.

केवलर बॉक्सर के ज़रिये कमर से लेकर जांघों तक का हिस्सा सुरक्षित हो जाता है. केवलर अस्ल में, प्राकृतिक रूप से एक कठोर पदार्थ है जो अत्यधिक गर्मी में भी न तो पिघलता है और न ही चटकता है.

पहनने में रखनी होती है सावधानी
POG ज़्यादा कठोर होता है और धमाके से बेहतर सुरक्षा देता है. इसे बाहर की तरफ रखते हुए पहना जाता है जबकि PUG को अंदर की तरफ रखकर. PUG हल्के फेब्रिक का होता है ताकि रगड़ से त्वचा को नुकसान न पहुंचे. इन दोनों को एक साथ सावधानी से पहनने पर काफी सुरक्षा मिलती है और शरीर के मूवमेंट में कोई रुकावट भी नहीं होती.

फेब्रिक को लेकर आईं शिकायतें
पहले पहल जब इस्तेमाल किया गया, तो केवलर बॉक्सर से रगड़ और खराब थर्मल संबंधी शिकायतें की गईं. इसके बाद इसे ​फिर से डिज़ाइन किया गया था. जून 2011 में पहली बार अमेरिकी आर्मी ने इसे युद्धक्षेत्र में पहनकर इस्तेमाल किया था. उसके बाद हज़ारों सैनिकों को दिए गए केवलर बॉक्सरों को लेकर 2012 से फिर शिकायतें आने का सिलसिला शुरू हुआ.

BlastBoxers पोर्टल से साभार लिये गए इस चित्र में ब्लास्ट बॉक्सरों के बारे में समझाया गया है.


इन अंडरवियरों को इन्फेक्शन फ्री भी रखने की कोशिश की गई थी, फिर भी सैनिकों ने रिपोर्ट किया था कि सुरक्षा के लिहाज़ से तो ठीक है, लेकिन ये केवलर अंडरवियर कॉटन या सिल्क अंडरवियर की तरह कंफर्टेबल नहीं है. शिकायत थी कि इसे पहनकर त्वचा को राहत महसूस नहीं होती.

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स्पाइडर सिल्क के विकल्प का प्रयोग
इस तरह की​ ​शिकायतों के बाद से ही अमेरिकी सेना के लिए बेहतर कॉम्बैट अंडरवियर के लिए विचार किया गया. केवलर की तुलना में स्पाइडर सिल्क में ज़्यादा लचीलापन यानी इलास्टिसिटी होती है और स्पाइडर सिल्क सामान्य सिल्क की तुलना में काफी कठोर होता है, लेकिन केवलर की तुलना में आधी कठोरता ही होती है. अस्ल में, यह मकड़ी के जाले और कीड़े से मिले रेशम का एक कॉम्बिनेशन है.

ब्रिटिश आर्मी में भी होता है इस्तेमाल
अपने ढंग के केव​लर बॉक्सरों का इस्तेमाल ब्रिटेन के सुरक्षा बल भी करते रहे हैं. आयरलैंड के अलावा, अफगानिस्तान में जो ब्रिटिश बल मुख्य मोर्चों या पैट्रोलिंग में तैनात रहा करते थे, उन्हें हृदय, फेफड़ों, लिवर और किडनी जैसे अंगों की सुरक्षा के साथ ही सिर को सुरक्षा देने वाले भारी हेलमेट भी दिए जाते थे. आंखों के बचाव के लिए ब्लास्ट प्रूफ गॉगल भी सेनाएं इस्तेमाल करती थीं.
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