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चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रपति जिनपिंग की पोल खोलने वाली ये महिला कौन है?

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रपति जिनपिंग की पोल खोलने वाली ये महिला कौन है?

सीपीसी के सेंट्रल स्कूल की रिटायर्ड प्रोफेसर काइ शिया.

सीपीसी के सेंट्रल स्कूल की रिटायर्ड प्रोफेसर काइ शिया.

काइ शिया को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of China) से निकाल दिया गया तो काइ ने कहा कि अब वो खुद को आज़ाद महसूस कर रही हैं. भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव (India China Border Tension) के हालात को जिनपिंग का फर्जीवाड़ा बताने वाली काइ ने जिनपिंग के लिए कहा कि 'असीमित ताकत हाथ में आ जाए तो कई गलतियां और जुर्म होते हैं'.

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    चीन के तानाशाह राष्ट्रपति (China President) शी जिनपिंग और उनके सामंतवादी रवैये को निशाना बनाने वाली एक महिला इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि उसे जिनपिंग और चीनी सत्ता (Chinese Government) ने विरोध में बोलने की सज़ा के तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) से निकाल दिया गया. चीन में राजनीतिक उदारवाद की सम​र्थक रहीं काइ शिया पिछले एक साल से अमेरिका में रहते हुए जिनपिंग पर गंभीर आरोप लगा चुकी हैं.

    चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को 'माफिया बॉस' (Jiping is Mafia Boss) कहने वाली काइ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को 'सियासी दानव' करार दे चुकी हैं. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में दिए गए इंटरव्यू में काइ ने जिनपिंग और सीपीसी की न केवल पोल खोल कर रख दी बल्कि खुलकर गुस्से का इज़हार किया, तो उन पर गाज गिरना ही थी. बहरहाल, चीन की इस बेबाक महिला काइ के बारे में जानना बेहद दिलचस्प है.

    काइ ने चीन को किया बेनकाब
    गलवान में भारतीय सैनिकों पर चीनी सेना के हमले की घटना पर काइ ने महत्वपूर्ण आरोप जिनपिंग सरकार पर लगाया. काइ के मुताबिक जि​नपिंग ये सब इसलिए कर रहे हैं ताकि 'वो चीनी जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटका सकें'. सीपीसी को 'पॉलिटिकल ज़ॉम्बी' कहने वाली काइ का आरोप ये भी है कि जिनपिंग अपनी नीतियों से 'न केवल चीन की छवि खराब कर रहे हैं, बल्कि दुनिया भर को चीन का दुश्मन बना रहे हैं.'

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    काइ शिया की मानें तो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में जिनपिंग के विरोधी बहुत हैं, लेकिन बोलने से डरते हैं.


    कौन हैं काइ शिया?
    चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल पार्टी स्कूल में अफसरों को 'लोकतांत्रिक राजनीति' पढ़ाने वाली रिटायर्ड प्रोफेसर काइ इसलिए चीनी सियासत में अहम हैं क्योंकि ये स्कूल चीनी सत्ता की व्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण और अभिजात्य रहा है. इस स्कूल के प्रमुख पहले चीन के संस्थापक माओ त्से तुंग रह चुके हैं और हू जिंताओ के साथ खुद जिनपिंग भी.

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    काई की विरासत ऐसी रही है कि देश में उनके योगदान को भूला नहीं जा सकता. चीनी कम्युनिस्ट क्रांति में लड़ने वाले अभिभावकों की बेटी काइ खुद चीनी सेना का हिस्सा रही हैं. उसके बाद चीन की फैक्ट्री में, फिर स्कूल टीचर के रूप में सेवाएं देने के बाद काइ इस अहम अकादमी में शामिल हुईं. खबरों की मानें तो कम्युनिस्ट पार्टी में कई खास लोग काइ को बेहद सम्मान के साथ देखते हैं.

    क्या जिनपिंग की ताकत पर लग रहा है जंग?
    चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कई लोग मानते हैं कि काइ शिया ने जिस तरह से जिनपिंग और पार्टी की गलत नीतियों की आलोचना की, उससे जिनपिंग को काफी झटके लगे हैं. यही नहीं, काइ की आलोचना को इस तरह भी देखा जा रहा है कि कम्युनिस्ट पार्टी कैडर में जिनपिंग की शक्ति घटी है.

    कैसे निशाने पर आईं काइ?
    काइ के हवाले से ताईवान न्यूज़ ने लिखा है कि काइ के बयानों को लेकर साल 2011 से ही उनके खिलाफ हमले बोले जा रहे थे और उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी की आलोचना करने पर चेताया जा रहा था. जब काइ चीन से बाहर रहने लगीं तो उन पर दबाव बनाया गया कि वो चीन लौटें. न मानने पर काइ को न केवल कम्युनिस्ट पार्टी से बेदखल किया गया बल्कि सेंट्रल पार्टी स्कूल ने उनके रिटायरमेंट के लाभ भी रद्द कर दिए. काइ के शब्दों में :

    मुझे विश्वास है कि सिर्फ मैं ही नहीं हूं, जो पार्टी छोड़ना चाहती थी. कई लोग इस पार्टी को छोड़ेंगे... मुझे पार्टी सालों पहले ही छोड़ देना थी, जब यहां बोलने की आज़ादी तो क्या गुंजाइश तक नहीं बची थी और मेरी आवाज़ को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा रहा था.


    क्या काइ को 'गद्दार' कहा जाए?
    काइ ने जिनपिंग और नीतियों के लिए सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के लिए क्या क्या कहा है, ये देखें :

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    चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी. (File Photo)


    * जिनपिंग के नेतृत्व में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी देश की तरक्की में बाधा बनी.
    * जून में लीक हुई एक रिकॉर्डिंग में काइ ने कहा था 'देश और पार्टी के हत्यारे' जिनपिंग को सत्ता से बेदखल कर सात सदस्यों वाले पोलित ब्यूरो को व्यवस्था अपने हाथ में लेना चाहिए.
    * कोरोना महामारी को हैंडल न कर पाने पर जिनपिंग की आलोचना करने वाले बिज़नेसमैन रेन झिकियांग को कथित तौर पर झूठे मामलों में फंसाए जाने पर काइ ने रेन का साथ दिया था.
    * हांगकांग में चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को काइ ने भयानक फैसला बताया.
    * काइ के मुताबिक ​पार्टी के भीतर जिनपिंग के विरोधी बहुत हैं, लेकिन अनुशासन के नाम पर बदले की कार्रवाई की जाएगी, इस डर से कोई उनके खिलाफ बोलता नहीं.

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    इसके अलावा, कोविड 19 के मामले में जानकारियां छुपाने, समय से सच न बताने, समय पर उचित कदम न उठाने जैसे आरोप लगाकर काइ ने जिनपिंग सरकार को महामारी रूपी आपदा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था. इन तमाम वजहों से कथित तौर पर सत्ता की हां में हां मिलाने वाला मीडिया काइ को 'देशद्रोही' और 'ज़रूरत से ज़्यादा असंतुष्ट' करार दे रहा है.

    लद्दाख में भारत के साथ तनाव एक चाल?
    चीनी जनता को फुसलाने के लिए भारत के साथ सीमा विवाद के नाम पर तनाव के हालात बनाना क्या जिनपिंग की कोई चाल है? 'दुनिया भर को दुश्मन' बना लेने वाले जिनपिंग के लिए काइ कह चुकी हैं कि चीन के लोगों का ध्यान देश की समस्याओं और वास्तविक मुद्दों से हटाने के लिए जिनपिंग कभी देश में अमेरिका के खिलाफ भावनाएं भड़काते हैं तो कभी भारत के साथ तनाव को हवा देते हैं.undefined

    Tags: China, Chinese Media, Chinese woman, India and china, India china, India China Border Tension, India-China News, Indo-China Border Dispute, Politics, Xi jinping

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