कोरोना वायरस : गंभीर स्थिति के लिए कितना तैयार है देश?

कोरोना वायरस : गंभीर स्थिति के लिए कितना तैयार है देश?
देश में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा कोविड 19 से निपटने के लिए कितना तैयार है?

भारत में कोविड 19 के मामले सोमवार दोपहर तक 415 हुए लेकिन क्या स्थिति और बिगड़ गई तो देश इसे किस तरह संभाल पाएगा? जानें भारत में स्वास्थ्य के मोर्चे पर कितनी चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं. बात डरने की नहीं लेकिन चिंतित और सतर्क होने की ज़रूर है.

  • News18India
  • Last Updated: March 23, 2020, 4:39 PM IST
  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
भारत में कोविड 19 के मामलों की संख्या 400 के पार पहुंच चुकने के बाद देश की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को जानना ज़रूरी हो जाता है. हेल्थकेयर के विशेषज्ञ कई तरह की समस्याओं को लेकर चिंता ज़ाहिर कर रहे हैं तो दूसरी तरफ, ये अंदेशे भी सामने आ रहे हैं कि अगर कोरोना वायरस ने विकराल रूप दिखाया या इसके मरीज़ गंभीर अवस्थाओं में पहुंच गए तो देश का स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा आखिर उस स्थिति से निपटने में कितना सक्षम होगा.

सरकारी अस्पतालों की बदहाली और डॉक्टरों की कमी संबंधी रिपोर्ट्स आप समय समय पर पढ़ते रहे हैं लेकिन इस वक्त आपको कोरोना वायरस के कहर से जुड़े देश के पूरे स्वास्थ्य सिस्टम के उन पहलुओं के बारे में बताते हैं, जहां चुनौतियां नज़र आ रही हैं.

सवा अरब लोगों के लिए 40 हज़ार वेंटिलेटर!
अब तक भारत में कोरोना वायरस पीड़ितों में से 5 फीसदी को आईसीयू में रखे जाने की नौबत आई है. लेकिन, अगर स्थिति और गंभीर स्तर पर पहुंचती है तो ऐसे मामले बढ़ सकते हैं. सांस संबंधी परेशानियां पैदा करने वाली इस बीमारी में वेंटिलेटर बहुत ज़रूरी हो जाता है. हिंदुस्तान टाइम्स की ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो देश में सिर्फ 40 हज़ार वेंटिलेटर हैं, जो काम कर रहे हैं. ज़ाहिर है कि इनमें से ज़्यादातर महानगरों के अस्पतालों में ही हैं.



कोविड 19 की सबसे बुरी मार झेलने वाले चीन के डेटा पर गौर किया जाए तो इस बीमारी के 15 फीसदी मरीज़ों को अस्पतालों में भर्ती करने और आईसीयू में 5 फीसदी मरीज़ों को वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आई.



प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी भी चिंता
वेंटिलेटर ज़रूरत से कम होने के साथ ही, एक चिंता यह भी है कि वेंटिलेटरों को चलाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर भी देश में हर जगह या हर अस्पताल में मौजूद हों, ऐसा भी नहीं है. दूसरी तरफ, सामान्य रूप से डॉक्टरों की कमी देश में है ही. विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक है कि हर एक हज़ार लोगों पर कम से कम एक डॉक्टर होना चाहिए लेकिन भारत में 1457 लोगों पर एक डॉक्टर है. लेकिन बात अगर ग्रामीण भारत की हो तो 10,926 लोगों पर एक डॉक्टर है.

coronavirus
कोरोना से सुरक्षा के लिए देश में हर परिवार को रोज़ औसतन 100 लीटर पानी सिर्फ हाथ धोने के लिए चाहिए होगा.


हाथ धोने की बेसिक सुविधा नहीं!
विश्व जल दिवस हाल में गुज़रने के मौके पर संयुक्त राष्ट्र की कई इकाइयों के विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि 3 अरब लोग यानी 40 फीसदी दुनिया हाथ धोने की बेसिक सुविधा से भी वंचित है. टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कम और मध्यम आय वाले देशों यानी अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, एशिया और कैरेबिया के देशों में यह बड़ी चिंता है. इस चिंता के दायरे में भारत को भी शामिल किया गया है क्योंकि ऐसे देशों में साफ पानी और साबुन जैसी बेसिक सुविधाएं नहीं हैं.

पानी का संकट और कोरोना वायरस
डब्ल्यूएचओ जैसे संगठनों से बार बार ये अपील की जा रही है कि कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए आप दिन में बार बार 30 से 40 सेकंड तक ठीक से हाथ धोएं. ऐसे में विशेषज्ञों के हवाले से टीओआई की रिपोर्ट में अनुमान है कि पांच लोगों के परिवार को रोज़ 100 लीटर पानी सिर्फ हाथ धोने के लिए चाहिए होगा.

आंकड़े ये कह रहे हैं कि भारत में 59 फीसदी शहरी और 78 फीसदी ग्रामीण घरों में साफ पानी की उपलब्धता नहीं है यानी पीने तक के लिए साफ पानी मुहैया नहीं होता. ऐसे में हाथ धोने जैसी बेसिक चिंता स्वच्छता और स्वास्थ्य सेक्टर की बड़ी चुनौती स्पष्ट रूप से है.

कम हैं कोरोना की जांच की टेस्टिंग किट्स
भारत में माना जा सकता है कि एक तरह से अभी इस वैश्विक महामारी की शुरूआती स्टेज है, लेकिन अभी से ही देश के स्वास्थ्य क्षेत्र की कमियां सामने आ रही हैं. कैरवैन की एक रिपोर्ट की मानें तो देश में कोविड 19 की जांच के लिए टेस्टिंग किट्स की कमी है इसलिए उन लोगों में विषाणु की जांच नहीं की जा रही, जिनका विदेश यात्रा का कोई ताज़ा इतिहास नहीं है.

covid 19
देश में कोविड 19 की जांच के लिए टेस्टिंग किट्स की कमी है.


कम हो रहे हैं टेस्ट!
इस रिपोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को लिखे गए एक पत्र के हवाले से कहा गया है कि कई राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में केवल एक ही सेंटर पर जांच करने की सुविधा है. इस पत्र में छग के स्वास्थ्य मंत्री ने और टेस्टिंग किट्स की मांग केंद्र सरकार से की है. वहीं कैरवैन की इस रिपोर्ट में एक डेटा के हवाले से आंकड़ा दिया गया है कि प्रति दस लाख लोगों पर भारत में सिर्फ तीन लोगों के टेस्ट हो रहे हैं और प्रति दस लाख लोगों पर हो रहे टेस्ट के मामले में भारत की स्थिति फिलीपींस, वियतनाम और आर्मेनिया जैसे छोटे देशों के मुकाबले भी खराब है.

स्वास्थ्यकर्मी हैं बड़े खतरे में
लैंसेट के एक संपादकीय में हाल में कहा गया है कि दुनिया भर में कोरोना वायरस के मरीज़ों के इलाज में मुब्तिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बड़ा जोखिम है. वहीं एम्स के एक डॉक्टर के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्यकर्मियों को कोविड 19 मामलों से सुरक्षित रखा जाना और लक्षणों के दिखते ही उनका इलाज किया जाना प्राथमिकता होना चाहिए.

महाराष्ट्र में डॉक्टर का ही इलाज नहीं!
न्यूइंडियन एक्सप्रेस की 20 मार्च की एक रिपोर्ट की मानें तो जलगांव ज़िले के एक युवा डॉक्टर को कोरोना वायरस जैसे लक्षण दिखने पर प्राइवेट अस्पतालों ने उसका इलाज करने से मना किया और ज़िले के सरकारी अस्पताल ने भी कोरोना वायरस की जांच व इलाज की सुविधा न होने की बात कही. बाद में उस युवक को मुंबई के जेजे अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया. इस खबर में यह भी उल्लेख है कि महाराष्ट्र ने केंद्र से कोविड 19 टेस्टिंग सुविधाएं बढ़ाने की मांग की, लेकिन केंद्र सरकार से जवाब नहीं मिला था.

अस्पतालों में हायजीन भी एक समस्या
खासकर छोटे और मझोले ज़िलों व ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में अगर साफ सफाई की स्थिति का आंकलन किया जाए तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ सकते हैं. मध्य प्रदेश के पिपरिया शहर में निश्चचेतना विशेषज्ञ डॉ. मोहन नागर ने हाल में अपनी फेसबुक पोस्ट पर इस बारे में चिंता जताते हुए लिखा था कि चिकित्सा केंद्रों पर मास्क, सेनेटाइज़र तो क्या फ़िनाइल तक की उपलब्धता पर सवालिया निशान लगा है.



कुल मिलाकर, स्थिति यह है कि आम जनता की बात हो या स्वास्थ्य सेक्टर की, भारत में चुनौतियां कम नहीं हैं. बस दुआ यही की जाना चाहिए कि कोरोना वायरस के तीसरे चरण का कहर देश में न बरपा हो, वरना किस कदर कठिन स्थितियां पेश आएंगी, यह समझा जा सकता है. दूसरे, जब यह खतरा टल जाएगा, तब कम से कम देश को यह तो सबक मिलेगा ही स्वास्थ्य के मोर्चे पर उसे अभी और कितना मुस्तैद और तैयार होने की ज़रूरत है.

ये भी पढ़ें:

कोरोना वायरस से मरने वालों का नहीं हो पा रहा है अंतिम संस्कार

हमारी तैयारी विनाश की तो है, लेकिन बचाव की नहीं!
First published: March 23, 2020, 4:20 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading