जानें उस शार्ली एब्दो के बारे में, जिसने फिर प्रकाशित किए पैगंबर के कार्टून

जानें उस शार्ली एब्दो के बारे में, जिसने फिर प्रकाशित किए पैगंबर के कार्टून
चार्ली हेब्दो पर हुए आतंकी हमले के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग. (File Photo)

फ्रांस के आधुनिक इतिहास में सबसे बड़े आतंकी हमले से जुड़ी जांच 5 साल तक चलने के बाद ट्रायल (France Terror Trial) शुरू होना था, लेकिन कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी के कारण देर से सुनवाई शुरू हुई. पैगंबर मोहम्मद (Prophet Mohammed) के कार्टून प्रकाशित करने पर जिस पत्रिका ने आतंकी हमला झेला था, उसी के द्वारा फिर वही कार्टून छापे जाने का मतलब क्या है?

  • News18India
  • Last Updated: September 2, 2020, 8:28 PM IST
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आपको याद होगा, पांच साल पहले फ्रांस की राजधानी पेरिस (Paris) में एक व्यंग्य पत्रिका (Satire Magazine) के दफ्तर पर आतंकी हमला हुआ था. तीन दिनों तक चलते रहे इस हमले में एक पुलिसकर्मी समेत 12 लोग मारे गए थे, जिनमें फ्रांस के कई प्रमुख कार्टूनिस्ट शामिल थे. अस्ल में, इस पत्रिका ने पैगंबर मोहम्मद का एक कार्टून (Cartoon of Prophet Mohammed) प्रकाशित किया था, जिस पर इस्लाम के कुछ वर्गों ने काफी ऐतराज़ जताया था और जवाब में आतंकी हमला हुआ था. बहरहाल, अब उसी पत्रिका ने वही कार्टून (Cartoon Controversy) फिर प्रकाशित किया है! क्यों?

जनवरी 2015 में आतंकी हमले से तहस नहस हो गई पत्रिका शार्ली एब्दो ने हाल में फिर वही पुराना कार्टून प्रकाशित किया क्योंकि अब जाकर उस आतंकी हमले में कानूनी ट्रायल शुरू होने जा रहा है. हमले के बाद ही तीन जिहादियों को मार गिराया गया था, लेकिन पांच साल लंबी चली जांच प्रक्रिया के बाद अगले कुछ महीनों के दौरान इस केस में करीब 14 संदिग्धों के खिलाफ सुनवाई होगी.

पेरिस में कुछ महीने पहले ही इस केस की सुनवाई शुरू होना थी, लेकिन कोविड 19 के कारण ट्रायल शुरू होने में देर हुई. बहरहाल, अब इस ट्रायल के दौरान कोर्ट रूम में सोशल डिस्टेंसिंग के चलते कम लोगों को प्रवेश मिलेगा और यह उन करीब एक दर्जन ट्रायलों में शुमार होगा, जिसे रिकॉर्ड किया जाएगा. आइए, इस ट्रायल से जुड़े कुछ खास तथ्यों के साथ ही शार्ली एब्दो के बारे में कुछ अहम बातें जानें.



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आतंकी हमले के खिलाफ 'मैं हूं शार्ली' जन अभियान सुर्खियों में रहा था. (File Photo)

हमले के खास आरोपी और फैक्ट्स
अंतर्राष्ट्रीय स्तर, खास तौर से यूरोप में अब तक हुए आतंकी हमलों में काफी अहम और भीषण हमले के रूप में चर्चित इस केस में संदिग्धों के फरार हो जाने को लेकर काफी गहमागहमी है. फ्रांस 24 की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक शार्ली एब्दो आतंकी हमले के केस ट्रायल के दौरान 14 में से तीन संदिग्ध हयात बौमिदीन, मोहम्मद बलूची और उसका भाई मेहदी बलूची सुनवाई में नहीं दिखेंगे. इनमें से हयात का नाम ज़्यादा चर्चाओं में है.

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रिपोर्ट्स की मानें तो हयात फ्रांस में 'मोस्ट वॉंटेड महिला' है. जब जांचकर्ताओं ने उसकी खोजबीन की मुहिम शुरू की थी, तब उसे बेहद खतरनाक बताया गया था. कहा जाता है कि जनवरी 2015 में हमले के पहले ही हयात सीरिया के रास्ते से तुर्की फरार हो चुकी थी. यही नहीं, फरवरी 2015 में इस्लामी स्टेट आतंकी संगठन की एक पत्रिका में छपा था कि वो एक जिहादी समूह 'खलीफाई' में शामिल हो गई थी.

दूसरी तरफ, आईएस के संदिग्ध आतंकी मोहम्मद बलूची को उस हमले की स्क्रिप्ट तैयार करने में अहम बताया जाता है. हालांकि इस हमले के प्रमुख आरोपी कुआची बंधु और मारा गया कुलीबाली था. यह भी उल्लेखनीय है कि शार्ली एब्दो आतंकी हमले की ज़िम्मेदारी यमन बेस्ड अल कायदा ने ली थी और कहा था कि यह आईएस के साथ उसका साझा हमला नहीं था, बल्कि कुलीबाली और कुआचियों की दोस्ती के कारण ऐसा हुआ था.

बहरहाल, इस हमले के बाद पूरे फ्रांस में आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता नज़र आई थी और 'मैं हूं शार्ली' यानी #iamcharlie अभियान चला था. सड़कों से लेकर सोशल ​मीडिया तक सभी इस हमले पर सख्त कार्रवाई चाहते थे. कई संस्कृतियों के मिले जुले देश फ्रांस में सुरक्षा को लेकर तब बड़ी मांगों की मुहिम चली थी.


फिर क्यों छापा गया विवादित कार्टून?
शार्ली एब्दो पत्रिका ने साफ कहा है कि उसके दो प्रमुख पत्रकार इस पूरे ट्रायल को कवर करेंगे. बीते बुधवार को ट्रायल की शुरूआत को एक ऐतिहासिक घटना के रूप में दर्ज करने के मकसद से प​त्रिका ने उन कार्टूनों को फिर छापा, जिनकी वजह से वो भीषण आतंकी हमला हुआ था. पत्रिका ने यह भी बताया कि ये कार्टून सबसे पहले डैनिश डेली में 2005 और फिर 2006 में एक और फ्रेंच अखबार में छपे थे. पत्रिका के मुताबिक 'यह इतिहास का हिस्सा है और इसे न तो मिटाया जा सकता है, न दोबारा लिखा जा सकता है.'

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शार्ली एब्दों के समर्थन में लगा एक पोस्टर. (File Photo)


क्यों अहम है शार्ली एब्दो?
फ्रांस में बेहद चर्चित साप्ताहिक व्यंग्य पत्रिका है शार्ली एब्दो. इस पत्रिका में कार्टून, रिपोर्ट्स, वाद विवाद और मनोरंजक कटाक्ष आदि छपते हैं. यह पत्रिका खुद के धर्मनिरपेक्ष, नास्तिक, लेफ्ट समर्थक, संशयवादी और नस्लभेद विरोधी होने का दावा करती है. साथ ही, राजनीति, धर्म और संस्कृति से जुड़े पहलुओं पर बहस और कटाक्षों को बढ़ावा देती है.

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जनवरी 2015 में आतंकी हमले से पहले 2011 में भी शार्ली एब्दो पर एक आतंकी हमला हुआ था. पिछले हमले का कारण भी मोहम्मद के कार्टून के प्रकाशन पर प्रतिक्रिया ही रहा था. साल 1970 में यह पत्रिका तब शुरू हुई थी, जब मासिक पत्रिका हारा किरी को पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स दी गॉल की मौत के बाद मज़ाक उड़ाने के मामले में प्रतिबंधित कर दिया गया था.

इसके बाद 1981 में इस पत्रिका को बंद कर दिया गया था, लेकिन 1991 में इस पत्रिका का प्रकाशन फिर शुरू हुआ. सामान्य तौर पर हर बुधवार को प्रकाशित होने वाली इस साप्ताहिक पत्रिका के वर्तमान प्रमुख संपादक ​गेरार्ड बियार्ड हैं. 1970 में शुरूआत में इस पत्रिका का नाम हारा किरी एब्दो रखा गया था. फ्रेंच शब्द एब्दो का मतलब साप्ताहिक है. बाद में लोकप्रिय कार्टून शृंखला 'पीनट' के चरित्र शार्ली ब्राउन के नाम पर इस पत्रिका का नाम 'शार्ली एब्दो' रखा गया.
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