सबसे कम वक्त के लिए बिहार का सीएम कौन रहा?

न्यूज़18 कार्टून
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Bihar Election Result 2020 : बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने का रिकॉर्ड तो नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अपने नाम कर चुके हैं, लेकिन सबसे कम अरसे के सीएम बिहार में कौन रहे? यह भी फैक्ट है कि उसी सीएम के नाम सबसे युवा सीएम रहने का रिकॉर्ड भी है.

  • News18India
  • Last Updated: November 10, 2020, 8:37 AM IST
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साल 2005 से नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) बिहार के मुख्यमंत्री जो बने, तो 2020 तक करीब 14 साल तक सीएम (Longest Serving CM) रहे. बीच में करीब 9 महीने के लिए जीतनराम मांझी को बिहार की जनता ने सीएम की कुर्सी पर देखा. लेकिन, एक दिलचस्प फैक्ट यह भी है कि पूरे कार्यकाल के सीएम बनने से पहले साल 2000 में नीतीश कुमार 7 दिनों के लिए बिहार के सीएम (Bihar CM) रहे थे, जब राबड़ी देवी (Rabri Devi) सरकार के गिरने की नौबत भी आ गई थी. लेकिन तब नीतीश अपनी सरकार चला नहीं पाए थे.

बहरहाल, एक हफ्ते के लिए सीएम रह चुके नीतीश क्या अपने नाम यह रिकॉर्ड रखते हैं कि वो बिहार में सबसे कम समय के मुख्यमंत्री रहे? क्या आप जानते हैं कि सबसे कम दिनों के लिए बिहार का सीएम कौन रहा था? बिहार के चुनावी इतिहास का एक दिलचस्प किस्सा इसी बहाने आपको बताते हैं और यह भी कि बिहार के साथ ही देश में सबसे कम समय के लिए सीएम रहने के रिकॉर्ड किसके नाम हैं.

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5 दिनों के सीएम थे एसपी सिंह
सतीश प्रसाद सिंह. जी हां, यही वो नाम है जिसके नाम बिहार के सबसे कम वक्त के सीएम रहने का रिकॉर्ड है. 27 जनवरी 1968 की शाम को सीएम बने सिंह सिर्फ पांच दिनों के लिए सीएम रहे थे. सिंह के सीएम बनने का किस्सा भी कम नाटकीय नहीं था. जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा की सरकार बिहार की पहली गैर कांग्रेसी सरकार थी, लेकिन 1967-68 में हुए विद्रोह की भेंट चढ़ गई थी.

उस समय 155 सीटों वाली कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व केबी सहाय कर रहे थे और उन्हें संयुक्त समाजवादी पार्टी का सहयोग हासिल था, जिसके नेता बीपी मंडल थे. मंडल की पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर महामाया सरकार गिरा दी और स्थिति यह बनी कि मंडल को सीएम बनना था, लेकिन वो तब सांसद थे इसलिए जब तक तयशुदा प्रक्रिया पूरी होती, तब तक के लिए मंडल ने अपने करीबी सिंह को सीएम बनने के लिए कहा था.

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बिहार में सबसे कम समय के लिए सीएम रहने का रिकॉर्ड सतीश प्रसाद सिंह के नाम रहा.


इसके बाद, मंडल ने फरवरी 1968 की शुरूआत में ही शपथ ग्रहण की और सीएम की कुर्सी संभाली थी. यह किस्सा इस बात की भी मिसाल माना जाता है कि यह बिहार में सीएम की कुर्सी सौंपने की सबसे शांत और सरल प्रक्रिया रही थी.

सिंह के नाम और भी कीर्तिमान
सीएम पद संभालने के वक्त सिंह की उम्र करीब 32 साल की थी यानी भारत के किसी राज्य में सबसे युवा सीएम होने का रिकॉर्ड भी सिंह के नाम ही रहा. गलतफहमी के चलते माना जाता है कि असम के सीएम रहे प्रफुल्ल कुमार मोहंता सबसे युवा सीएम रहे. मोहंता 33 साल की उम्र में सीएम बने थे. इस लिस्ट में 36 साल की उम्र में सीएम बनने वाले पेमा खांडू और 38 की उम्र में सीएम बने अखिलेश यादव व शरद पवार के नाम भी हैं.

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इसके अलावा, सिंह ने एक इंटरव्यू में खुद बताया था कि सबसे युवा सीएम के अलावा यह रिकॉर्ड भी उनके नाम रहा कि वो बिहार में वो पहले मुख्यमंत्री थे, जो पिछड़ी जाति से थे. गौरतलब है कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के सरकारी आवासों से महज़ आधे किलोमीटर के दायरे में रह रहे एसपी सिंह ने बीते हफ्ते यानी 2 नवंबर को ही अंतिम सांस ली. उनके निधन से पांच दिन पहले ही उनकी पत्नी भी कोविड 19 के कारण ही चल बसी थीं.

ये रहे सबसे कम वक्त के सीएम
सतीश प्रसाद सिंह और नीतीश कुमार के अलावा, बिहार में ही भोला पासवान शास्त्री महज़ 13 दिनों के सीएम रहे हैं. 22 जून 1969 से 4 जुलाई 1969 के बीच सीएम रहे शास्त्री के अलावा देश भर में और ऐसे कितने उदाहरण हैं, देखिए.

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जगदंबिका पाल : सिर्फ 1 दिन के लिए सीएम रहने का रिकॉर्ड पाल के नाम पर है. 21 फरवरी 1998 को पाल तब उत्तर प्रदेश के सीएम बने थे, जब कल्याण सिंह सरकार गिरी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कल्याण सिंह ने फ्लोर टेस्ट पास कर लिया था.

येदियुरप्पा : कर्नाटक में 17 मई 2018 को भाजपा के बीएस येदियुरपप्पा ने सीएम के तौर पर शपथ ली थी लेकिन 19 मई को फ्लोर टेस्ट से पहले ही वह सीएम पद से हट चुके थे. यानी 3 दिन के सीएम रहे.

नबाम तुकी : 13 जुलाई 2016 को कांग्रेस नेता तुकी ने अरुणाचल प्रदेश के सीएम के तौर पर शपथ ली लेकिन सिर्फ 4 दिन सीएम रहकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

ओपी चौटाला : 2 जुलाई 1990 को सीएम बने ओमप्रकाश चौटाला 17 जुलाई तक सीएम रहे थे. 15 दिनों की इस छोटी सी पारी के बाद 1991 में भी चौटाला 14 दिनों के सीएम बने थे.

एससी मारक : मेघालय के सीएम के तौर पर कांग्रेस नेता मारक 27 फरवरी 1998 से 13 दिनों तक मुख्यमंत्री रहे थे.

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साल 2019 में महाराष्ट्र में सियासी संकट के दौरान 23 नवंबर से 26 नवंबर के दौरान सिर्फ 3 दिनों के लिए देवेंद्र फडनवीस राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे, जब उन्होंने रातों रात जोड़ तोड़ करने के बाद शपथ ग्रहण कर ली थी, लेकिन बाद में बहुमत साबित नहीं कर सके थे.
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