तूफान के समय दिए जाने वाले ऑरेंज, रेड और यैलो अलर्ट क्या होते हैं

अलग अलग रंगों में जारी होने वाले मौसम अलर्ट के मायने भी अलग होते हैं.

अरब सागर से उठे चक्रवाती तूफान ने भारत के पश्चिमी छोर के प्रांतों में कहर बरपाया हुआ है. इससे काफी मौतें हुईं तो बड़े पैमाने पर नुकसान भी. यहां तक कि इसका असर देश के दूसरे इलाकों में देखा जा रहा है. इससे निपटने अलग अलग रंगों के अलर्ट जारी किए गए हैं. क्या होते हैं इन अलर्ट के मतलब

  • Share this:
    ताउते तूफान के कारण पूरे भारत में मौसम बदला हुआ है. पश्चिमी तटीय इलाकों से घनघोर बारिश और तेज हवा ने जहां तांडव किया है, वही उत्तर भारत भी इसके असर से बच नहीं सका है. किसी राज्य ने इससे निपटने के लिए रेड अलर्ट जारी किया तो किसी राज्य में इससे सावधान होने के लिए यैलो अलर्ट जारी कर दिया गया. एक-दो राज्यों ने रेड अलर्ट भी जारी किया है. क्या आपको पता है कि इन अलर्ट का मतलब क्या होता है? रंगों के आधार पर अलर्ट कैसे जारी किए जाते हैं? वैसे ऐसे अलर्ट दूसरी आपदाओं के समय भी दिए जाते हैं. मसलन कोरोना से निपटने में भी कई राज्यों और इलाकों में ऐसे अलर्ट की बात सामने आई.

    रंगों के आधार पर अलर्ट जारी किए जाने की शुरुआत तकरीबन 12-13 साल पहले हुई थी. जल्द ही इस प्रणाली को दुनिया के ज़्यादातर मौसम विभागों ने अपना लिया. इस प्रणाली से चेतावनी के संकेत आसानी से समझे जा सकते हैं और रंगों पर आधारित होने के कारण दुनिया भर में इसका समान अर्थ निकाले जाने की संभावना बढ़ जाती है. आइए जानें, किस अलर्ट का क्या मतलब होता है.

    यलो अलर्ट - सचेत रहें
    मौसम के अनुसार इस अलर्ट या चेतावनी का मतलब होता है कि आप अपने इलाके या रूटीन को लेकर सचेत रहें. कुछ सावधानियां बरतें. यलो अलर्ट जारी करने का मकसद वास्तव में लोगों को सतर्क करना होता है. इसके मुताबिक आपको तुरंत कोई खतरा नहीं होता, लेकिन मौसम के हाल को देखते हुए आपको जगह और अपने मूवमेंट को लेकर सावधान रहना चाहिए.

    ऑरेंज अलर्ट - तैयार रहें
    मौसम विभाग जब ऑरेंज अलर्ट जारी करता है, तो इसका मतलब होता है कि मौसम की मांग है कि अब आप और खराब मौसम के लिए तैयार हो जाएं. जब मौसम इस तरह की करवट लेता है, जिसका असर जनजीवन पर पड़ सकता है, तब ये अलर्ट जारी किया जाता है. खराब मौसम के लिए आपको अपनी यात्राओं, कामकाज या स्कूली बच्चों के लिए आवागमन के बारे में तैयारी रखने की ज़रूरत होती है.

    Meteorological Department, temperature, weather forecast, weather warning, weather alert, मौसम विभाग, तापमान, मौसम भविष्यवाणी, मौसम चेतावनी, मौसम अलर्ट
    मौसम विभाग की वेबसाइट पर कलर कोड के ज़रिये मौसम से जुड़े अलर्ट.


    रेड अलर्ट - एक्शन का वक्त
    हालांकि बेहद गंभीर स्थितियों में रेड अलर्ट जारी किया जाता है, इसलिए यह कम ही होता है. फिर भी, रेड अलर्ट का मतलब होता है कि जान माल की सुरक्षा का समय आ चुका है. अक्सर इस अलर्ट के बाद खतरे के ज़ोन में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया जाता है. मौसम के मुताबिक सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाते हैं, जैसे गर्मी के मौसम में अगर रेड अलर्ट जारी हो तो आपको घर से बाहर नहीं निकलने और ज़रूरी इंतज़ाम करने की हिदायत होती है. इसी तरह, बारिश के मौसम में अगर ये अलर्ट जारी हो तो इसका साफ संकेत होता है बाढ़, तूफान या नुकसानदेह बारिश की चेतावनी है इसलिए ज़रूरी इंतज़ाम करें.

    रेड अलर्ट के समय सामान्य जनजीवन के लिए खतरे को भांपते हुए अक्सर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, स्कूल संचालन जैसे नियमित कामकाज बंद किए जा सकते हैं.

    भारत और दुनिया भर में चेतावनी सिस्टम
    रंगों के आधार पर चेतावनी या अलर्ट जारी करने के सिस्टम के चलते कई तरह की आपदाओं से पहले की तुलना में ज़्यादा बचाव संभव हो सका है. इस प्रणाली की शुरुआत 2016 में हुई थी और यूके के मौसम विभाग के बाद भारत समेत कई देशों ने इस चेतावनी प्रणाली को अपनाया. कलर कोड चेतावनी प्रणाली में हरे रंग के कलर कोड का मतलब सब ठीक होने का संकेत है इसलिए इसे अलर्ट के तौर पर नहीं इस्तेमाल किया जाता.

    भारत के भू विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय मौसम विभाग नियमित तौर पर अपनी वेबसाइट पर इस कलर कोड के ज़रिये मौसम का हाल और भविष्यवाणियां बताता है. इस कलर कोड प्रणाली के मुताबिक आप आसानी से अपने इलाके के मौसम का हाल समझ सकते हैं.

    Meteorological Department, temperature, weather forecast, weather warning, weather alert, मौसम विभाग, तापमान, मौसम भविष्यवाणी, मौसम चेतावनी, मौसम अलर्ट
    प्रतीकात्मक तस्वीर


    कुछ देशों में अलग भी हैं तरीके
    कलर कोड के तहत चेतावनी जारी करने की प्रणाली के कारगर होने के बावजूद अब भी कुछ देशों में अलग तरीके अपनाए जाते हैं. उदाहरण के लिए स्वीडन का मौसम विभाग चेतावनी जारी करने के लिए मौसम का हाल क्लास 1, क्लास 2 और क्लास 3 के हिसाब से बताता है. क्लास 1 का अर्थ सतर्कता से होता है और क्लास 2 में मौसम खराब होने का संकेत होता है जबकि क्लास 3 का मतलब होता है कि मौसम बहुत बिगड़ने वाला है और जान माल के नुकसान की आशंका है. कुछ और भी देश पुराने या अपने अलग तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं.

    कलर कोड चेतावनी सिस्टम वास्तव में, यूरोप की मानक प्रणाली बन चुका है और इस तरीके से यूरोप के कम से कम 31 मौसम विभाग अलर्ट जारी करते हैं. यूरोप के अलावा एशिया के कई देश भी इस प्रणाली को अपना चुके हैं. मीटियोअलार्म नाम की वेबसाइट पर उन लोगों के लिए एक अलग कलर कोड सिस्टम है जो कलर ब्लाइंड यानी रंगों को लेकर अंधेपन के शिकार होते हैं. इनके लिए इस वेबसाइट पर ग्रे के हल्के से गाढ़े शेड्स के ज़रिये मौसम के खतरों की चेतावनी समझाए जाने की प्रणाली भी अपनाई जाती है.