1962 जैसे नहीं हालात, जानिए चीन के साथ कैसे लोहा ले सकता है भारत

1962 जैसे नहीं हालात, जानिए चीन के साथ कैसे लोहा ले सकता है भारत
भारत और चीन की सैन्य ताकतों के बारे में जानिए.

Defense पर खर्च और निवेश की बात की जाए तो पिछले एक दशक में China ने India से ढाई गुना ज़्यादा खर्च किया है. ये भी तय है कि Nuclear Warheads और GDP के मामले में भी चीन की ताकत ज़्यादा है. फिर भी Galwan Valley Stand-Off के बाद अगर युद्ध की स्थिति बनती है तो भारत के पक्ष में क्या स्थितियां होंगी?

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अगर भारत और चीन के बीच युद्ध (Sino-Indian War) हुआ, तो क्या स्थितियां बन सकती हैं, इसे लेकर News18 आप तक ज़रूरी जानकारियां लगातार पहुंचा रहा है. पिछले दिनों Ladakh Border पर Face-Off के बाद दोनों देशों के बीच तनाव के हालात जारी हैं. युद्ध तक बात पहुंचने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि दोनों देशों की सैन्य क्षमताएं (Forces) यानी युद्ध के लिए ताकत कितनी है.

यहां हम आपको भारत और चीन की Military और Air Force के साथ ही युद्ध संबंधी स्थितियों के बारे में बताएंगे, लेकिन उससे पहले ये समझना होगा कि दोनों देशों ने रक्षा मोर्चे पर पिछले सालों में कितना निवेश किया है. शांति को लेकर शोध करने वाली स्टॉकहोम बेस्ड संस्था SIPRI के अनुमानों की मानें तो साल 2010 में चीन ने भारत की तुलना में ढाई गुना ज़्यादा खर्च किया था और रक्षा के मोर्चे पर 2019 में यह अनुपात बढ़कर साढ़े तीन गुना से भी ज़्यादा रहा. SIPRI ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक भारत ने अपनी सेनाओं पर 2019 में जीडीपी का 2.4% हिस्सा खर्च किया जबकि 2010 में यही खर्च जीडीपी का 2.9% था.

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चीन की तुलना में भारतीय थल सेना बहुत कम नहीं है. फाइल फोटो.

दूसरी ओर, चीन ने 2010 से 2019 तक हर साल करीब अपनी जीडीपी का 1.9% ही खर्च कर रहा है. अब बात है कि चीन की जीडीपी कितनी ज़्यादा है. तो वर्ल्ड बैंक के डेटा के हिसाब से ओआरएफ की रिपोर्ट कहती है कि चीन की जीडीपी 2018 में 13.61 ट्रिलियन डॉलर की थी, जबकि भारत की 2.72 ट्रिलियन डॉलर की. अब दोनों देशों के रक्षा पर निवेश के फर्क को आसानी से देखा जा सकता है.

भारत/चीन : कितनी है किसकी ताकत?
युद्ध संबंधी सैन्य ताकत चार हिस्सों में बंटी है : थलसेना, वायुसेना, नौसेना और परमाणु शक्तियां. भारत और चीन के युद्ध के संदर्भ में नौसेना तकरीबन अप्रासंगिक है. इसलिए सबसे पहले बात थल सेना की.

थल सेना : चीन में फिलहाल सक्रिय थल सेना के जो अनुमान हैं, उसके मुताबिक 21 लाख 83 हज़ार जवानों की फौज है और रिज़र्व में 5 लाख से ज़्यादा की फौज. वहीं, रिपोर्ट की मानें तो भारत में एक्टिव फोर्स 14 लाख 44 हज़ार की है तो 21 लाख की फौज रिज़र्व में है. अब बात थल सेना के हथियारों की.

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पास करीब 3,500 टैंक, 33,000 सशस्त्र वाहन, 3,800 स्वचलित तोपें, 3,600 अन्य तोपें और 2,650 रॉकेट प्रोजेक्टर होने की रिपोर्ट हैं. वही भारतीय सेना के पास करीब 4,292 टैंक, 8,686 सशस्त्र वाहन, 235 स्वचलित तोपें, 4,060 अन्य तोपें और 266 रॉकेट प्रोजेक्टर हैं.


वायु सेना : चीन की PLA एयरफोर्स की ताकत के अनुमान के मुताबिक करीब 1,232 लड़ाकू विमान, 371 डेडिकेटेड अटैक एयरक्राफ्ट, 224 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 314 ट्रेनर, 281 हमलावर हेलिकॉप्टर, 911 हेलिकॉप्टर, और 111 स्पेशल मिशन विमान हैं. वहीं, भारतीय वायु सेना 538 लड़ाकू विमान, 172 डेडिकेटेड अटैक एयरक्राफ्ट, 250 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 359 ट्रेनर, 23 हमलावर हेलिकॉप्टर, 722 हेलिकॉप्टर और 77 रिज़र्व स्पेशल मिशन विमान हैं.

परमाणु शक्ति : चीन के पास कुल 104 मिसाइलें हैं जिनमें घातक DF – 31A, DF-31 और DF-21 मिसाइलें शामिल हैं. वहीं भारत के पास करीब 10 Agni-III लॉंचरों और 8 Agni-II लॉंचरों समेत करीब 51 एयरक्राफ्ट (जगुआर IS और मिराज 2000H फाइटर्स) हैं, जो न्यूक्लियर हथियार लॉंच कर सकते हैं. ताज़ा स्टडी की मानें तो चीन की मिसाइलें भारत में तकरीबन हर लोकेशन को निशाना बना सकती हैं, जबकि भारतीय मिसाइलों की पहुंच तिब्बत से लेकर मध्य चीन और मेनलैंड चाइना तक है.

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विश्लेषण कह रहे हैं कि भारतीय वायुसेना को चीन के मुकाबले भौगोलिक स्थितियों का लाभ मिलेगा. फाइल फोटो.


इस ताकत का विश्लेषण क्या है?
ऊपर बताए गए आंकड़ों से साफ तौर पर चीन की क्षमता और स्थिति बेहतर और मज़बूत लगती है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि यह दोनों देशों की कुल क्षमताओं की बात थी. भारत और चीन सीमा पर अगर युद्ध के हालात बनते हैं तो इन ताकतों में से कितनी उस सीमा पर मौजूद रह सकेंगी और किसके पास भौगोलिक स्थितियों का लाभ होगा?

सैन्य क्षमताएं : बेलफर सेंटर के ताज़ा अध्ययन के मुताबिक दोनों देशों के बीच सीमाओं पर तैनाती की​ स्थिति के अनुसार भारत के पास 270 फाइटर विमान और 68 ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट होंगे जबकि चीन के पास 157 फाइटर विमान और करीब 50 यूएवी व अन्य विमान होंगे. इसी तरह, थल सेना को लेकर स्थिति यह है कि भारत के पास T-72 टैंक ब्रिगेड और ब्रह्मोस मिसाइल रेजीमेंट समेत करीब सवा दो लाख की फौज होगी. वहीं, चीन के पास 2 लाख से 2 लाख 34 हज़ार के बीच फौज का अनुमान है.

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भौगोलिक स्थितियां : पिछली बार जब 1962 में चीन और भारत युद्ध हुआ था तब ​कथित तौर पर भौगोलिक स्थितियों का लाभ चीन को मिला था. लेकिन खबरों की मानें तो इस बार स्थितियां भारत के पक्ष में होंगी. वॉशिंग्टन स्थित न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी सेंटर और बॉस्टन के हार्वर्ड केनेडी स्कूल के बेलफर सेंटर की ताज़ा स्टडी में यह दावा किया गया था.

इसके अलावा, दोनों देशों की सैन्य ताकतों के विश्लेषण में कहा गया है चूंकि चीनी एयरबेस तिब्बत और झिनजियांग के दुर्गम इलाकों में हैं इसलिए चीनी विमानों की क्षमताएं कम होंगी. साथ ही, चीनी विमानों के लिए रिफ्यूलिंग के कारण समय भी ज़्यादा लगेगा. दूसरी ओर, भारत को इस इलाके में भौगोलिक स्थितियों से बढ़त मिलेगी.
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