बदहाल सड़कों और खस्ताहाल ट्रैफिक के लिए कौन देगा जुर्माना?

ट्रैफिक नियमों (Traffic Rules) की अनदेखी पर भारी जुर्माना वसूलने की खबरों के बीच हाईकोर्ट (High Court) का निर्देश गौरतलब है कि खराब सड़क से नुकसान होने पर प्रशासन मुआवज़ा देगा. जानें देश में बेहाल ट्रैफिक और सरकार की जवाबदेही क्या है.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: September 4, 2019, 9:16 PM IST
बदहाल सड़कों और खस्ताहाल ट्रैफिक के लिए कौन देगा जुर्माना?
देश में कई सड़कें खस्ताहाल हैं.
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: September 4, 2019, 9:16 PM IST
नए मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) के मुताबिक़ ट्रैफिक और वाहनों संबंधी नियमों की अनदेखी को लेकर भारी जुर्माने (Traffic Challans) की व्यवस्था के बाद कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं. लेकिन, इस बीच एक खबर और है कि कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने कहा है कि खराब सड़कों (Dangerous Roads) की वजह से अगर लोगों को चोट या नुकसान होता है तो वो नगर पालिका (Municipal Corporation) से मुआवज़ा मांग सकते हैं.

इस खबर और भारी जुर्माने के नियमों की खबरों की तमाम हलचलों के बीच अब सवाल है कि नियम, कायदे की एक व्यवस्था (Traffic Rules) का पालन न करने पर आम जनता को इतनी कीमत चुकाना पड़ रही है तो बेहाल और खतरनाक अव्यवस्थाओं के लिए सरकार या प्रशासन की जवाबदेही के लिए क्या इंतज़ाम है?

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देश की सड़कों और ट्रैफिक व्यवस्था (Traffic System) का हाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) यह टिप्पणी कर चुका है कि आतंकी वारदात के कारण होने वाली मौतों से ज़्यादा आंकड़ा बदहाल सड़कों की वजह से मौतों का है. इसी संदर्भ में गार्जियन की एक रिपोर्ट का शीर्षक था 'आतंकवाद (Terrorism) से ज़्यादा खतरनाक हैं सड़कें'. सड़कों की क्वालिटी (Road Quality) के बारे में अगर बात की जाए तो ग्लोबल इकोनॉमी.कॉम के अनुसार भारत इस मामले में दुनिया में 53वें नंबर पर है. जानिए कि भारी चालान चुका रहे लोग वाहनों और सड़कों से जुड़ी कितनी समस्याओं से जूझने पर मजबूर हैं.

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द ग्लोबल इकोनॉमी.कॉम पर जारी आंकड़ों के मुताबिक सड़क गुणवत्ता के मामले में भारत टॉप 50 देशों में भी नहीं है.


सरकार, सड़कें खराब नहीं खतरनाक हैं..
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मेट्रो समेत देश के कई बड़े शहरों सड़कों पर गड्ढों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. खराब क्वालिटी की सड़कें होने के कारण कुछ ही समय में जगह जगह से सड़कों का टूट जाना इतनी आम बात हो चुकी है कि धरने और प्रदर्शन के बाद थक हार चुके लोग इसके आदी हो चुके हैं. सड़कों की क्वालिटी को लेकर मैप्स ऑफ इंडिया पोर्टल ने एक सहयोगी वेबसाइट बैड रोड्स इन इंडिया.कॉम तक बना डाली है, जिसमें देश की सड़कों का तमाम ब्योरा है.



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दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क रखने वाले देश में तकरीबन 30 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जो दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है. उपरोक्त पोर्टल के मुताबिक कुल नेटवर्क का करीब आधा सड़क निर्माण घटिया क्वालिटी का है. साथ ही, ये भी कहा गया है कि सड़कों के निर्माण में फुटपाथों से जुड़े व अन्य नियमों का पालन नहीं किया जाता है. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्टों के अनुसार भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर पुख्ता और सटीक इंतज़ाम नहीं हैं यानी सड़कों पर चलना कम जोखिम नहीं है.

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एक स्टडी की मानें तो भारत में सड़कों के कुल नेटवर्क का करीब आधा सड़क निर्माण घटिया क्वालिटी का है.


सड़कों की दुर्दशा के और सबूत
1. मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में तुलनात्मक रूप से कुछ बेहतर है, लेकिन पूरे देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हालत खस्ता है, जिससे निजी वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलता है.
2. दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहर हों या छोटे शहर या गांव, हर जगह बारिश के मौसम में सड़कों के टूट जाने, सड़कों पर पानी भर जाने और सड़कों के कारण हादसे होने की खबरें आम हैं.



3. सड़कों के निर्माण के दौरान नियमानुसार डिवाइडर न होने के साथ ही सड़कों पर आवारा पशुओं के घूमने और निजी वाहनों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, हाथ ठेलों, साइकिलों व भारी वाहनों के लिए देश में अधिकतर जगह रोज़मर्रा की समस्याएं पेश आती हैं.

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देश में कई शहरों में बारिश सड़कों की गुणवत्ता की कलई खोल देती है.


4. गार्जियन की एक रिपोर्ट की मानें तो सड़कों पर गड्ढों की वजह से साल 2017 में 3579 जानें गईं और 25 हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए. इसके अलावा सड़कों पर खुले मेनहोल और गंदगी की समस्याएं भी देश भर में हैं.

लचर ट्रैफिक सिस्टम
नये मोटर व्हीकल एक्ट में ज़्यादा स्पीड, खतरनाक ड्राइविंग और सड़क पर रेस करने जैसी स्थितियों में 1 हज़ार से 10 हज़ार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. लेकिन सड़कों और ट्रैफिक की हालत बयान करती है कि रोज़मर्रा में लोगों को किन समस्याओं से जूझना पड़ता है. ऐसी सड़कों और ट्रैफिक के चलते क्या तेज़ रफ्तार मुमकिन है? आंकड़े कुछ कहते हैं.

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दिल्ली के 75 फीसदी से ज़्यादा ट्रैफिक सिग्नलों और सड़कों पर लगे मार्कों का दुरुस्त न होना पाया गया था.


देश की चर्चित टैक्सी सर्विस ओला के एक सर्वे के हवाले से कई रिपोर्ट प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें कहा गया कि 2017 के ट्रैफिक के मद्देनज़र बेंगलूरु में वाहन 17.2 किमी प्रति घंटे की औसत रफ्तार से दौड़ पाते हैं. सबसे ज़्यादा औसत रफ्तार दिल्ली की पाई गई थी जहां 25 किमी प्रति घंटे की स्पीड रोज़मर्रा की औसत पाई गई. मुंबई में 20.7, कोलकाता में 19.2, हैदराबाद में 18.5 और चेन्नई में 18.9 किमी प्रति घंटा औसत रफ्तार थी. तो ये है ट्रैफिक और सड़कों की गुणवत्ता का असर.



ट्रैफिक सिस्टम के शर्मनाक आंकड़े
1. देश में कई जगह ट्रैफिक सिग्नल्स साल में कई बार खराब होते हैं, अस्थायी रूप से बंद होते हैं. 2017 में मिंट की एक रिपोर्ट में एक स्टडी के हवाले से कहा गया कि दिल्ली के 75 फीसदी से ज़्यादा ट्रैफिक सिग्नलों और सड़कों पर लगे मार्कों के दुरुस्त न होने के कारण ट्रैफिक नियम टूटते हैं, जिनका इल्ज़ाम वाहन चलाने पर लगता है जो जायज़ नहीं है.

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2. देश के छोटे और मझोले शहरों में कई नाकों, चौक, चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था अब तक है ही नहीं और तो और वहां ट्रैफिक पुलिसमैन के अक्सर नदारद रहने को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं.
3. ट्रैफिक की बदइंतज़ामी, बढ़ते लोड के मुताबिक सड़कों के न होने और पूरे सिस्टम के लचर होने के कारण देश में ट्रैफिक जाम की समस्या भयानक हो रही है. बारिश हो या नहीं, आम तौर पर जाम लग रहे हैं. स्क्रोल की 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीक टाइम में ट्रैफिक फंसता है. देश के चार महानगरों में जाम का आंकड़ा ये है कि एक तय दूरी के लिए लगने वाला समय 149 फीसदी बढ़ रहा है जबकि इसका एशियाई औसत 67 फीसदी है.

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देश के चार महानगरों में जाम का आंकड़ा ये है कि एक तय दूरी के लिए लगने वाला समय 149 फीसदी बढ़ रहा है


ये भी तो जनता ही चुकाती है..
जिस जनता से भारी जुर्माना वसूला जा रहा है, उसका तर्क ये है कि खराब सड़कों और बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था का बोझ भी तो उसी की जेब पर पड़ता है. देखिए कैसे.
1. एक रिपोर्ट में एक अनुमान के हवाले से कहा गया है कि खराब सड़कों के कारण हर साल वाहनों की मरम्मत पर 200 करोड़ का खर्च होता है, जिसका बोझ सीधे लोगों की जेब पर पड़ता है.
2. स्क्रोल की एक रिपोर्ट एक स्टडी के हवाले से कह चुकी है कि भारत के बड़े शहरों में ट्रैफिक फंसने के कारण हर साल 22 अरब डॉलर तक का नुकसान हो रहा है, जिसका बोझ सीधे यात्रियों की जेब पर पड़ता है.



तो, सरकार क्यों न चुकाए मुआवज़ा?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने ताज़ा फैसले में करीब दो साल पहले के बॉम्बे हाईकोर्ट के उस निर्देश का भी हवाला दिया, जिसमें अच्छी सड़कों को नागरिकों की अहम ज़रूरत बताया गया था और कहा गया था कि नागरिकों को खराब सड़क के कारण होने वाले नुकसान के लिए उचित मुआवज़ा मिलना चाहिए. ये भी जानिए कि क्या ऐसा कोई सिस्टम और किसी देश में भी है.

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कहां खस्ताहाल सड़क पर मिलता है मुआवज़ा
एक महीने पहले ही समाचार वेबसाइट मिरर पर अपडेट की गई रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में कुछ सड़कें गड्ढ़ों की समस्या से बीमार हो चुकी हैं और नियम है कि इन खस्ताहाल सड़कों के कारण कोई एक्सीडेंट होता है तो प्रशासन मुआवज़ा देगा. कई विकसित देशों में इस तरह के दावे किए जाने की सुविधा नागरिकों को है.

कानूनी सहायता देने वाले अमेरिकी पोर्टल ऑललॉ.कॉम के मुताबिक 'अगर आप दावा करें तो आपको साबित करना होगा कि सरकारी इकाइयों ने सड़कों के रखरखाव या सुरक्षा को लेकर ठीक कदम नहीं उठाए जिसकी वजह से आपको नुकसान हुआ... अमेरिका के हर राज्य में अलग विशेष नियम हैं लेकिन खराब सड़क के कारण हुए नुकसान को लेकर सरकारों से मुआवज़े का दावा किया जा सकता है'.

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ब्रिटेन में खराब सड़क के कारण नुकसान होने पर नागरिक मुआवज़ा मांग सकते हैं.


घर, परिवार और जीवन से बढ़ रही दूरी
सड़कों और ट्रैफिक की बदहाली की इस पूरी कहानी का सारांश ये है कि आम आदमी सड़कों पर ट्रैफिक के बीच ज़्यादा फंसा हुआ है और उसका ज़्यादा समय इस बदइंतज़ामी से जूझने में जा रहा है. इसी साल जून में तकनीक विशेषज्ञ की रिपोर्ट के हवाले से मिंट की खबर में कहा गया कि मुंबई में जो लोग रश अवर में सड़कों पर यात्रा करते हैं, उन्हें 65 फीसदी ज़्यादा समय गंवाना पड़ता है, जो दुनिया के शहरों में सबसे ज़्यादा है. दिल्ली में 58 फीसदी ज़्यादा समय ट्रैफिक में खर्च हो रहा है.



ट्रैफिक में फंसने के कारण लोग घंटों तक अपने जीवन और घर से दूर रहने पर मजबूर हैं. यही नहीं, बल्कि ट्रैफिक से सेहत को लेकर भी गंभीर स्थितियां सामने आ रही हैं. प्रदूषण की बात तो अलग, लेकिन ट्रैफिक और सड़कों की खस्ताहाली से लोगों में एक तनाव उपजने की शिकायत लगातार बढ़ रही है. कुल मिलाकर बात ये है कि एक तरफ आपको खस्ताहाल सड़कों और बदहाल ट्रैफिक की कीमत भी चुकाना है और अब भारी जुर्माने से भी दो चार होना है.

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First published: September 4, 2019, 9:03 PM IST
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