गांधी परिवार के कितने खास रहे वोरा और क्यों बनाए जा सकते हैं कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष?

इस्तीफा वापस न लेने के फैसले पर कायम राहुल गांधी के अल्टीमेटम के बाद नया कांग्रेस अध्यक्ष बनने तक पार्टी के सीनियर नेता मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने की खबरों के बीच वोरा के बारे में आपको कुछ बातें ज़रूर जानना चाहिए.

News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 5:51 PM IST
गांधी परिवार के कितने खास रहे वोरा और क्यों बनाए जा सकते हैं कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष?
मोतीलाल वोरा. फाइल फोटो.
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Updated: July 3, 2019, 5:51 PM IST
कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद शुरू हुई खींचतान के बाद सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस सीनियर नेता मोतीलाल वोरा को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है. राहुल इस्तीफे की ज़िद पर अड़े रहे लेकिन पार्टी राहुल के अल्टीमेटम के बाद भी पार्टी अध्यक्ष पद के लिए किसी नाम पर सहमति नहीं बना सकी है इसलिए अब कहा जा रहा है कि जब तक नया कांग्रेस अध्यक्ष नहीं ढूंढ़ लिया जाता, तब तक वोरा अंतरिम अध्यक्ष रहेंगे. 50 सालों से कांग्रेस में नेता रहे मोतीलाल वोरा के बारे में दिलचस्प और ज़रूरी बातें जानिए.

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90 साल के हो चुके मोतीलाल वोरा पुराने दिग्गज राजनीतिकों में शुमार किए जाते रहे हैं और 50 सालों से कांग्रेस के साथ संगठन और सरकारों में जुड़े रहे हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके वोरा का राजनीतिक सफर 1960 के दशक में शुरू हुआ था और शुरूआत में वोरा समाजवादी विचारधारा वाली पार्टी के साथ जुड़े थे लेकिन उसके बाद 1970 में कांग्रेस में आए और कांग्रेस पार्टी और राज्य सरकार में उच्च पदों पर रहने के बाद राज्यसभा तक भी पहुंचे. वोरा विवादों में भी फंसे लेकिन कुछ कारणों से गांधी परिवार के चहेतों में शुमार रहे.

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गांधी परिवार से रिश्ते
प्रभात तिवारी और पंडित किशोरीलाल शुक्ला की मदद से 1970 में वोरा कांग्रेस में शामिल हुए थे. उसके एक दशक के भीतर ही वो गांधी परिवार के काफी करीब आ गए थे. उनकी कुशलता और एक दशक में मध्य प्रदेश में तीन बार चुनाव जीतना खास कारण थे. 1983 में इंदिरा गांधी सरकार में वोरा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में वोरा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला. इसके बाद राजीव गांधी सरकार में भी वोरा शामिल हुए, जब राज्यसभा के सदस्य के तौर पर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था.

राहुल गांधी का समर्थन
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दो चुनाव पहले जब कांग्रेस प्रधानमंत्री पद के लिए चेहरे की तलाश में थी, तब वोरा ने खुलकर पार्टी के भीतर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की वकालत की थी. वोरा उन गिने चुने नेताओं में से थे, जिन्होंने राहुल को पार्टी की कमान पूरी तरह सौंपे जाने का समर्थन किया था. गांधी परिवार के साथ उनके समीकरण हमेशा सधे रहे और इसी का मुज़ाहिरा था कि वोरा हर बार राहुल के समर्थन में थे, हालांकि पार्टी ने मनमोहन सिंह को ही दो बार प्रधानमंत्री बनाया.

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कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रह चुके हैं मोतीलाल वोरा.


नेशनल हेराल्ड केस से नाता
मोतीलाल वोरा कांग्रेस के एक खास नेता इस मायने में भी रहे हैं कि नेशनल हेराल्ड केस में जिन तीन संस्थाओं का नाम आया, उन तीनों में ही वोरा महत्वपूर्ण पदों पर रहे. एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड यानी एजेएल में 22 मार्च 2002 को वोरा चेयरमैन और एमडी बने थे. नेशनल हेराल्ड केस में आरोपी के तौर पर शामिल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में वोरा कोषाध्यक्ष का पद संभाल चुके थे और इस केस में तीसरी संस्था यंग इंडियन का नाम आया था, इसमें भी वोरा 12 फीसदी के शेयर होल्डर रहे.

और कुछ खास बातें
मोतीलाल वोरा राजनीति में आने से पहले पत्रकार थे. राजस्थान के जोधपुर में ब्रिटिश इंडिया के ज़माने में जन्मे वोरा ने छत्तीसगढ़ के रायपुर और कलकत्ता से उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद कई अखबारों के साथ काम किया था. इसके अलावा, वोरा सामाजिक कामों में भी हमेशा आगे रहे थे. इसके बाद वह सक्रिय राजनीति में आए और अर्जुन सिंह सरकार में मंत्री रहने के अलावा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रहे. वोरा के बेटे अरुण वोरा भी राजनीति में हैं और छत्तीसगढ़ के दुर्ग से तीन बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं.

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First published: July 3, 2019, 4:52 PM IST
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