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FATF ने ब्लैकलिस्ट किया तो पाकिस्तान की टूट जाएगी कमर, दुनिया कर सकती है बायकॉट

न्यूज़18 क्रिएटिव

टेरर फंडिंग (Terror Funding) के मोर्चे पर एफएटीएफ (FATF) में पाकिस्तान (Pakistan) गिड़गिड़ाकर खुद को बचाने की कोशिश करेगा लेकिन जानें कि ब्लैकलिस्ट होने पर क्या संकट खड़े होंगे.

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    पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट (Grey List) में बरकरार रखना है या उसे ब्लैकलिस्ट (Black List) में डाला जाए? पेरिस (Paris) में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की होने वाली बैठक में यह फैसला किया जाएगा. एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और टेरर फंडिंग जैसे वित्तीय मामलों में दखल देते हुए तमाम देशों के लिए गाइडलाइन तय करती है और यह तय करती है कि वित्तीय अपराधों (Financial Crimes) को बढ़ावा देने वाले देशों पर लगाम कसी जा सके. एफएटीएफ के ग्रे और ब्लैक लिस्ट का मतलब क्या होता है? और ये भी जानें कि अगर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया, तो क्या अंजाम होंगे.

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    ब्लैक लिस्ट का क्या मतलब है?
    एफएटीएफ (Financial Action Task Force) दो लिस्ट में चिंताजनक हालात वाले देशों को शामिल करती है. इनमें से एक ब्लैकलिस्ट है. आतंकवाद (Terrorism) को वित्तीय तौर पर बढ़ावा देने वाले देशों को इस लिस्ट में तब रखा जाता है, जब उनका असहयोगात्मक रवैया जारी रहता है. मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को लगातार काबू न कर पाने के चलते इन देशों को टैक्स चोरी का स्वर्ग (Safe Tax Heavens) भी करार दिया जाता है.

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    पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया तो आर्थिक संकट से पहले ही जूझ रहे देश को बहुत बड़ा झटका लगेगा.


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    इस तरह के हालात वाले देशों को ब्लैकलिस्ट करने का सिलसिला साल 2000 से संस्था ने शुरू किया था. ऐसे देशों को पहले चेतावनी दी जाती है और फिर कुछ देशों की एक कमेटी बनाकर निगरानी की जाती है कि ऐसे देश गाइडलाइन्स के मुताबिक गंभीर मामलों को काबू करने के लिए क्या और कैसे कदम उठा रहे हैं.

    ग्रे लिस्ट होती है चेतावनी
    मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामलों में टैक्स चोरी का स्वर्ग न होकर ऐसे देश, जो इस स्थिति का शिकार होते लगते हैं, उन्हें इस लिस्ट में रखा जाता है. यह एक तरह से चेतावनी होती है कि समय रहते ये देश काबू करें और वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के कदम उठाएं. अगर ये देश ग्रे लिस्ट में आने के बाद भी सख़्त कदम नहीं उठाते हैं, तो इन पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा बढ़ता है.

    जब किसी देश को एफएटीएफ ग्रे लिस्ट में रखता है तो उसके सामने कुछ चुनौतियां पेश आती हैं. आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और एडीबी जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और अन्य देशों से आर्थिक सहयोग, कर्ज़ मिलने में मुश्किल के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कई तरह की अड़चनें और इंटरनेशनल बहिष्कार तक की नौबत का खतरा पैदा होता है, अगर कोई देश ग्रे लिस्ट में आता है.

    क्या होगा पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट हुआ तो?
    विशेषज्ञों की मानें तो एफएटीएफ ने अगर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया तो आर्थिक संकट से पहले ही जूझ रहे इस देश को बहुत बड़ा झटका लगेगा. एक मीडिया रिपोर्ट ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि अगर पाक ब्लैकलिस्ट कर दिया गया तो उसे जिस तरह के निवेश की ज़रूरत है, वह लड़खड़ा जाएगी क्योंकि कोई भी वैश्विक बैंक या निवेशक पाकिस्तान के साथ कोई डील करने से पहले सौ बार सोचेगा. एक तरह से पाकिस्तान के सामने इंटरनेशनल बायकॉट के हालात हो जाएंगे.

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    टूट जाएगी पाकिस्तान की कमर!
    एफएटीएफ ने अगर ब्लैकलिस्ट करने का फैसला किया तो पाकिस्तान को आईएमएफ यानी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से जो 6 अरब डॉलर का कर्ज़ मिलने की स्थिति बन रही है, वह भी धराशायी हो सकती है. एक रिपोर्ट ने पाकिस्तान के ही आर्थिक विशेषज्ञ के हवाले से लिखा है कि ये बड़ा झटका होगा. हालांकि आईएमएफ देश के साथ डील करता रहेगा लेकिन ब्लैकलिस्टिंग के बाद फंड जारी होने की रफ्तार या तो बहुत धीमी पड़ जाएगी या रुक जाएगी.

    गौरतलब है कि पिछले करीब एक साल से पाकिस्तान बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है और ऐसे में कर्ज़, अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और निवेश में किसी भी तरह की रुकावट आती है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा सकती है. यह पाकिस्तान के लिए बेहद डरावनी स्थिति है इसलिए पाकिस्तान के आर्थिक और कूटनीति के विशेषज्ञ अपना पक्ष और जवाब लेकर पेरिस की एफएटीएफ की बैठक में पहुंचेंगे, जहां पाकिस्तान की तरफ से विश्वास दिलाया जाएगा कि उसने संभव और बड़े कदम उठाकर टेरर फंडिंग पर लगाम कसी है.

    अब क्या मुमकिन हो सकता है?
    पाकिस्तान 2012 में पहली बार एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शुमार हुआ था और 2015 तक रहा था. इसके बाद 2018 से पाकिस्तान फिर ग्रे लिस्ट में है. अब पिछले तकरीबन एक साल के हालात के मद्देनज़र भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ दबाव बनाया है जिसके चलते कहा जा रहा है कि अमेरिका, यूके और भारत एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करने की पुरज़ोर वकालत कर सकते हैं.

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    आतंकवाद को पोसने के आरोपों को लेकर पाकिस्तान वैश्विक मंच पर घिरा नज़र आ रहा है.


    वहीं, चीन और तुर्की जैसे देश पाकिस्तान को रियायत देने के पक्ष में हो सकते हैं. वहीं, पाकिस्तान अपने हक में अफगानिस्तान और बीच में रुक गई शांति वार्ता को मुख्य बिंदु बनाकर ब्लैकलिस्ट से ​बचने की कोशिश कर सकता है. विशेषज्ञ फिलहाल बंटे हुए दिख रहे हैं, कुछ मान रहे हैं कि पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है तो कुछ को उम्मीद है कि शायद अभी ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा.

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