हज़ारों फॉलोअरों का नेता, खुद को कहता है क्राइस्ट.. अपने बर्थडे पर मनवाता है क्रिसमस

क्राइस्ट द रिडीमर प्रतिमा.
क्राइस्ट द रिडीमर प्रतिमा.

आधिकारिक चर्च (Official Church) की लंबे समय से उस संगठन पर नज़र थी, जिसका नेता खुद के ईश्वर होने (Reincarnation of Christ) के दावे कर हज़ारों अनुयायी बनाकर अपने हिसाब से ईसाइयत (Christianity) को ढाल रहा था. यहां तक कि बाइबल (Bible) का सीक्वल तक लिख डाला.

  • News18India
  • Last Updated: September 24, 2020, 8:12 AM IST
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इतिहास (History) की तरफ देखें तो ऐसे लोगों की तादाद कम नहीं रही, जिन्होंने खुद को ईश्वर का अवतार (Self Claimed God) घोषित किया हो, या माना हो. ऐसा पिछले कुछ सालों में भी होता रहा है. ताज़ा मामला है रूस (Russia) का, जहां एक पूर्व पुलिसकर्मी ने खुद के जीसस क्राइस्ट का अवतार का दावा किया है. यह व्यक्ति इसलिए चर्चा में आ गया है क्योंकि इसे मनोवैज्ञानिक प्रताड़ना (Psychological Torture) देने और कम से कम दो लोगों को शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

आपको याद होगा कि कुछ साल पहले ऑस्कर रैमिरो नाम के एक आदमी ने अमेरिका में व्हाइट हाउस पर नौ गोलियां चलाई थीं. बाद में इसने खुद को क्राइस्ट का अवतार बताते हुए दावा किया था कि उसे 'ईश्वर ने राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barrack Obama) को मारने भेजा है क्योंकि ओबामा ईश्वर विरोधी हैं.' इस तरह के किस्सों से इतिहास भरा पड़ा है. आपको ताज़ा किस्सा और कुछ पुराने रोचक फैक्ट्स बताते हैं.

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कौन है क्राइस्ट का कथित अवतार?
रूस में जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है उसका नाम सर्गी तोरोप है,​ जो खुद को 'विज़ारियन क्राइस्ट द टीचर' भी कहता है. पहले तोरोप पुलिस और रेड आर्मी के एक विभाग में काम कर चुका है. 59 साल के इस कथित अवतार को साइबेरिया में एक स्पेशल ऑपरेशन चलाते हुए पुलिस ने गिरफ्तार किया और इसके कुछ साथियों को भी पकड़ा.

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क्या हैं इस 'अवतार' पर आरोप?
खबरें कह रही हैं कि तोरोप को गिरफ्तार करने के बाद रूस की जांच कमेटी ने कहा है कि उस पर अवैध रूप से एक धार्मिक संगठन चलाने का केस दर्ज होगा. साथ ही, इस संगठन के मारफत लोगों से रकम ऐंठने और लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप भी लगेगा. कहा गया है कि तोरोप साइबेरिया के क्रैसनॉयार्स्क इलाके में 'क्राइस्ट/चर्च ऑफ द लास्ट टेस्टामेंट' नाम के कंपाउंड में एक संगठन चला रहा था.

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तोरोप के दावे हैं दिलचस्प
जेल भेजे गए तोरोप का दावा है कि ट्रैफिक पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद 1990 के दशक में उसे कई रहस्यमयी अनुभव हुए थे. इन अनुभवों की बदौलत उसे महसूस हुआ कि क्राइस्ट ने उसके रूप में दोबारा जन्म लिया. सोवियत संघ के पतन के बाद अपने उठान के ये अनुभव उसने साझा किए तो कुछ सहयोगियों की मदद से उसने धार्मिक संगठन बनाया.

मैं भगवान नहीं हूं, लेकिन भगवान का जीवित अंश हूं. भगवान की वाणी हूं. वो जो कहना चाहता है, मेरे ज़रिये कहता है.


बाद में खुद को जीसस बताने वाले तोरोप ने यह भी दावा किया कि उसे इस दुनिया में लोगों को यह सिखाने के लिए भेजा गया है कि मानवता के लिए युद्ध के कितने भयानक दुष्परिणाम होते हैं.

ये किस तरह का संगठन है?
तोरोप ने जो संगठन बनाया, उसके अपने कायदे हैं. रूढ़िवादी ईसाइयत को बढ़ावा देने वाले इस संगठन में शाकाहार अनिवार्य है. संगठन के भीतर पैसों को लेनदेन मना है और अनुयायी सीधे सादे और अटपटे से कपड़े पहनते हैं. इस संगठन के अनुयायी तोरोप के जन्मवर्ष 1961 से कैलेंडर शुरू करते हैं और क्रिसमस 25 दिसंबर को नहीं बल्कि तोरोप के जन्मदिन 14 जनवरी को मनाते हैं.

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रूस में हज़ारों लोग इस संगठन से जुड़े बताए जाते हैं और पूरे रूस से तीर्थयात्री भी यहां आते हैं. कई अनुयायी इस संगठन के आश्रम के आसपास के इलाकों में रहते हैं. हालांकि रूस का आधिकारिक चर्च इस संगठन पर काफी समय से नाराज़गी जता रहा था. इस संगठन पर स्थानीय व्यवसाय संबंधी विवादों के आरोप भी लगे थे. अब तोरोप की गिरफ्तारी के बाद यह तय नहीं है कि इस संगठन और इसके अनुयायियों का क्या होगा.

तोरोप का निजी जीवन
विदेशी मीडिया की खबरों की मानें तो तोरोप कम से कम दो शादियां कर चुका है और उसके छह बच्चे हैं. एक शादी तो उसने 19 साल की उस लड़की के साथ भी की थी, जो उसके साथ सात साल की उम्र से रह रही थी. गिरफ्तार किए जाने से पहले तक तोरोप लकड़ी के बने एक आलीशान बंगले में रह रहा था और कहा गया है कि वह 'बाइबल की सीक्वल' दस भागों में लिख भी चुका है.

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चर्च के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर.


तोरोप के चरित्र पर संदेह
गिरफ्तारी के बाद उसके संगठन के ठिकानों में कई लड़कियों की मौजूदगी पाई गई. इस बारे में तोरोप ने कहा कि यहां कई कन्याओं के लिए स्कूल है, जहां लड़कियों को भविष्य में पत्नी और दुल्हन बनने के लिए ट्रेंड किया जाता है. यही नहीं, महिलाओं के बारे में अपने विचार बताते हुए तोरोप ने ये भी कहा कि महिलाओं को पुरुषों से आगे जाने की सोच नहीं रखना चाहिए, अपनी आज़ादी पर फख्र नहीं करना चाहिए. उन्हें शर्मीला और कमज़ोर ही होना चाहिए.

पहले भी हुए हैं ऐसे दावे
20वीं सदी में करीब तीन दर्जन व्यक्ति दुनिया के अलग अलग हिस्सों में इस तरह के दावे कर चुके हैं कि वो ईश्वर के अवतार हैं या उन्हें ईश्वर ने धरती पर अपना दूत बनाकर भेजा. पिछले 20 सालों में ही आधा दर्जन से ज़्यादा ऐसे दावे सामने आ चुके हैं. एलन जॉन मिलर और डेविड शेलर कुछ चर्चित नाम रहे थे, जिन्होंने खुद को जीसस का रूप होने का दावा किया था. मिलर तो अपने संगठन डिवाइन ट्रुथ के चलते काफी सुर्खियों में रहे.
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