क्या है उस इडली की कहानी, जो सोशल मीडिया से लेकर अमेरिका तक चर्चा में है!

सोशल मीडिया पर इडली विवाद में शशि थरूर लगातार उलझे रहे.
सोशल मीडिया पर इडली विवाद में शशि थरूर लगातार उलझे रहे.

एक ओपिनियन से ट्विटर पर इडली को लेकर ऐसी बहस छिड़ी कि इडली की संस्कृति, इतिहास (History of Idli) से लेकर उससे जुड़े तमाम क़सीदे पढ़े गए. शशि थरूर (Shashi Tharoor) क्यों इस विवाद में उलझे और इडली से जुड़े सही फैक्ट्स क्या हैं?

  • News18India
  • Last Updated: October 12, 2020, 12:13 AM IST
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इंग्लैंड की एक यूनिवर्सिटी (University of England) में इतिहास के प्रोफेसर एडवर्ड एंडरसन ने क्या कहा कि उन्हें इडली पसंद नहीं है, सोशल मीडिया पर इस दक्षिण भारतीय व्यंजन (South Indian Food) को लेकर ऐसी जंग छिड़ी कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Elections) तक गूंज पहुंच गई. जी हां, भारत के चर्चित राजनेता शशि थरूर (Shashi Tharoor Social Media) पहले और लगातार इस विवाद में उलझे कि विदेशी तक में इडली पर चर्चा होने लगी. इस विवाद के कारण इडली को लेकर कई तरह की बातें (Discussions on Idli) चल रही हैं.




पहले ये बताते हैं कि इडली को लेकर यह पूरा विवाद क्या है और फिर इडली की ऐतिहासिक कहानी के साथ ही आपको इडली का पोषण महत्व भी बताएंगे. जानिए कि थरूर से लेकर कमला हैरिस तक के नाम इडली विवाद में कैसे जुड़ गए.



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क्यों अचानक चर्चा में आई इडली?
एक अनौपचारिक परिचर्चा में ट्विटर पर यूज़र इंगेजमेंट के मकसद से सवाल दागा गया था कि 'कौन सा व्यंजन लोकप्रिय होने के बावजूद आपको नापसंद है?' इस परिचर्चा में नॉथम्ब्रिया यूनिवर्सिटी में लेक्चरर एंडरसन ने ट्वीट कर दिया कि 'इडली दुनिया का सबसे बोरिंग भोजन है.' हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि वो डोसा और दक्षिण भारतीय व्यंजनों के दीवाने हैं और उनका इरादा भारतीय भोजन का अपमान करना नहीं है, लेकिन इडली उन्हें सख्त नापसंद है तो है.

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दक्षिण भारतीय प​त्र मनोरमा की रिपोर्ट का उल्लेख एंडरसन ने किया.


(सोशल मीडिया पर इडली को लेकर चला पूरा विवाद यहां देखें)

इस ट्वीट पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी और एंडरसन को इडली के बारे में ज्ञान देना शुरू कर दिया. इस ट्विटर जंग में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर भी शामिल हुए और एंडरसन को कई तरह की सलाहें दे दीं. पिछले कुछ दिनों से जारी ट्विटर विवाद में शनिवार को थरूर ने एंडरसन के साथ नाश्ते पर भी रज़ामंदी जताई. इस विवाद पर चुटकी लेते हुए दक्षिण भारतीय समाचार पत्रिका मनोरमा ने कार्टून छापा तो विदेशी मीडिया में खबर छपी कि 'कमला हैरिस की पसंदीदा डिश के अपमान पर विवाद'.

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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के साथ, खबर को भुनाने के लिए इस तरह का शीर्षक दे दिया गया, जिसकी आलोचना फिर सोशल मीडिया पर हुई. हालांकि थरूर पहले भी कुछ मौकों पर इडली को अपना पसंदीदा व्यंजन बता चुके हैं. बहरहाल, अपने मज़ाकिया ट्वीट के इतने व्यापक असर हो जाने पर खुद एंडरसन भी हैरान हो गए. इडली किसी को पसंद है या नहीं, यह उसकी निजी पसंद है, लेकिन अब चूंकि चर्चा हो ही रही है और कई फैक्ट्स आ रहे हैं, ऐसे में आपको सही फैक्ट्स जान लेना चाहिए.

इंडोनेशिया से आई इडली या अरब से?
विशेषज्ञ के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट कहती है कि चूंकि दक्षिण भारत में चावल उगाने का इतिहास 3000 साल से पुराना नहीं है इसलिए इससे पहले तो इडली की संभावना हो ही नहीं सकती. लेकिन इडली का भारत में चलन कहां से शुरू हुआ? एक थ्योरी यह है कि शैलेंद्र, इस्याना और संजय वंश के समय में यानी 800 से 1200 ईस्वी के बीच इडली का कॉंसेप्ट इंडोनेशिया से भारत पहुंचा.
विद्वानों के एक और वर्ग के मुताबिक दूसरी थ्योरी कहती है कि इडली का कॉंसेप्ट अरब के कारोबारियों के ज़रिये दक्षिण भारत पहुंचा. चूंकि अरब के लोग हलाल भोजन को लेकर काफी सतर्क रहा करते थे इसलिए भोजन से जुड़ी कश्मकश को सुलझाने के लिए उन्होंने राइस बॉल जैसी चीज़ ईजाद की, जो दक्षिण भारत में आसानी से मुहैया थी. इसके बाद इस राइस बॉल में बदलाव आते गए और आधुनिक समय में प्रचलित इडली जैसा विकास हुआ.क्या वाकई बोरिंग है इडली?अस्ल में, फूड एक्सपर्ट उस भोजन को बोरिंग मानते हैं जो एक ही तरह से, एक ही स्वाद में या एक ही पारंपरिक ढंग से बनाया जा सकता है. लेकिन इडली के साथ कई वैरिएशन जुड़े हैं. जैसी इडली आप केरल में खाएंगे, उससे काफी अलग कर्नाटक में और उत्तर भारत में तो काफी अलग. प्रिप्रेशन से लेकर प्रेज़ेंटेशन तक काफी कुछ बदल जाता है. उड़द दाल और चावल के मिश्रण को खमीर उठाकर बनाई जाने वाली इडली सामान्य रूप से नारियल की चटनी के साथ खाई जाती है.ये भी पढ़ें :-जानिए क्या है नई नंबर प्लेट और ड्राइविंग दस्तावेज़ों से जुड़े नए नियमKBC सवाल : अंग्रेजों के खिलाफ क्यों बंगाल में हिंदू-मुसलमानों ने मिलकर मनाया था रक्षाबंधन?लेकिन, इडली के कई वैरिएशन हैं. कहीं इसकी प्रिप्रेशन में दही का इस्तेमाल होता है तो कहीं नमक का. वेज इडली, बटर इडली, पनीर इडली जैसे इनोवेशन हो चुके हैं. इसके साथ ही, यह भी कहा जा रहा है कि इडली में कोई विशेष स्वाद नहीं होता बल्कि इसे जिसके साथ खाया जाता है, उससे स्वाद तय होता है जैसे नारियल चटनी के साथ अलग स्वाद आएगा तो सांभर के साथ अलग और रसम के साथ और अलग.


आखिर में बात यही है कि खाने में खाने वाले की पसंद ही सब कुछ है. और यह पसंद सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक कारणों पर काफी निर्भर करती है. किसी पर भोजन से जुड़ी पसंद थोपी नहीं जा सकती, लेकिन किसी भोजन की पैरवी या मनाही स्वास्थ्य कारणों और पोषण के आधार पर की जा सकती है.

क्या है इडली का पोषण?
30 से 40 ग्राम की एक इडली में प्रोटीन 1 ग्राम ही होता है और कार्बोहाइड्रेट 7 से 8 ग्राम. विटामिन ए और फॉलिक एसिड के साथ ही इडली में पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे खनिज अच्छी मात्रा में होते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक हेल्दी लाइफस्टाइल, वजन बढ़ाने, बच्चों और दिल के मरीज़ों के लिए इडली को अच्छा भोजन बताया जाता है, जबकि कहा जाता है कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को सीमित मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए.
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