सिरिल रामाफोसा होंगे साउथ अफ्रीका के नए राष्ट्रपति, कभी चलाते थे मैकडॉनल्ड्स चेन

जैकब जुमा के हटने के बाद राष्ट्रपति बनने वाले रामाफोसा की सियासत में ये दूसरी पारी है

News18Hindi
Updated: February 15, 2018, 6:18 PM IST
सिरिल रामाफोसा होंगे साउथ अफ्रीका के नए राष्ट्रपति, कभी चलाते थे मैकडॉनल्ड्स चेन
दक्षिण अफ्रीका के नए राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा
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Updated: February 15, 2018, 6:18 PM IST
एक जमाना था जब मातामेला सिरिल रामाफोसा राजनीति छोड़ चुके थे. उन्होंने खुद को बिजनेस में झोंक दिया. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में विश्व प्रसिद्ध फूड ब्रांड मैकडॉनल्ड्स की फ्रेंचाइजी ली. बाद में इसे मोटे मुनाफे में बेच भी दिया. उन्होंने कई और व्यवसायों में पैसा लगाया और उनसे मोटी कमाई की. वो अब देश के सबसे धनी लोगों में शुमार हैं.

65 साल के रामाफोसा पर रंगीन मिजाजी के भी आरोप लग चुके हैं. पिछले साल वह लगातार कई महिलाओं के साथ संबंधों के आरोपों को लेकर घिरे रहे. एक आरोप को उन्होंने स्वीकार भी किया. बाकी के बारे में उनका कहना था कि ये सब उन्हें बदनाम करने के लिए किया जा रहा है. अपने जिस अफेयर को उन्होंने माना, उसके बारे में कहा कि इसके बारे में उन्होंने अपनी पत्नी को बता दिया था. अन्य आरोपों का असर लम्बे समय तक नहीं रहा.

मंडेला के प्रिय लोगों में रहे हैं
वह नेल्सन मंडेला के प्रिय लोगों में से एक रहे हैं. जब मंडेला राष्ट्रपति का पद छोड़ रहे थे तो वो चाहते थे कि रामाफोसा उनकी जगह लें. लेकिन अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस ने उनकी जगह थाबो मबेकी को राष्ट्रपति बनाया. इस पर वह काफी निराश हुए. नतीजतन उन्होंने खुद सियासत से किनारा कर लिया. मंडेला उन्हें नई पीढ़ी का सबसे गिफ्टेड नेता कहते थे. जब वह कॉलेज स्टूडेंट थे तो अच्छा गाते और डांस करते थे. ये खूबियां बाद में बहुत काम आईं.

रंगभेद के दिनों में गिरफ्तारी
रंगभेद के दिनों में 1974 में उन्हें जब गिरफ्तार किया गया, तब वह महज 22 साल के थे. कॉलेज में पढ़ रहे थे. उन्हें 11 महीने जेल में रखा गया. बाहर निकलने के बाद उन्होंने पढ़ाई पूरी की. वह अब ट्रेड यूनियन की नेतागिरी करने लगे-क्योंकि उन्हें लगता था कि रंगभेद से त्रस्त इस देश में श्वेत राज के खिलाफ विरोध करने का यही तरीका है. जब 1990 में 27 साल की कैद के बाद मंडेला रिहा हुए तो रामफोसा उनके साथ मिलकर देश में लोकतंत्र लाने वालों में शामिल थे.

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मैकडोनाल्ड चेन पांच साल चलाई
वर्ष 2011 में जब वो मैकडोनाल्ड की फूड चेन लेकर आए तो कहा जा रहा था कि इसे दक्षिण अफ्रीका जैसे घोर असमानता वाले देश में चलाना आसान नहीं होगा. वर्ष 2016 उन्होंने घोषणा की कि इस बिजनेस को उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात की एक कंपनी को बेच दिया. उनकी व्यक्तिगत संपत्ति करीब 5.67 बिलियन रेंड (करीब 3500 हजार करोड़ रुपए) बताई जाती है.

बीवी जानेमाने उद्योगपति की बहन
उनकी दूसरी पत्नी तहेपो मोतसेपे देश के माइनिंग के बादशाह पैट्रिशिया मोतसेपे की बहन हैं. साथ ही पेशे से डॉक्टर भी. जिनसे उनके चार बच्चे हैं. पहली पत्नी से उनका तलाक हो गया. प्राइवेट सेक्टर में उनके कारोबारी साम्राज्य को शांदुका ग्रुप के नाम से जाना जाता है. ये ग्रुप माइनिंग और मोबाइल ऑपरेटर के तौर पर काम करता है.

फिर की राजनीति में वापसी
एक दशक से कहीं ज्यादा समय तक बिजनेस में लंबी छलांग मारने के बाद वर्ष 2012 में फिर राजनीति में वापसी की. दो साल बाद ही वह जैकब जुमा सरकार में नंबर दो यानि उपराष्ट्रपति बन गए. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति और पार्टी के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखा. पिछले साल दिसंबर में एएनसी की बैठक में वह पार्टी के सर्वमान्य नेता के रूप में उभरे.

कभी भ्रष्टाचार के छींटे नहीं पड़े
उनकी छवि ऐसे नेता की है, जो देश में असमानता खत्म करना चाहते हैं. हालांकि एक यूनियन लीडर के रूप में उन्होंने हमेशा फर्स्ट क्लास में यात्राएं कीं. वह हमेशा लग्जरी होटलों में ठहरते रहे. साथ ही पैरवी भी करते रहे कि नेता को इन सबका उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए. उनकी जीवनी लिखने वाले रे हर्जले कहते हैं, रामफोसा के साथ अच्छी बात ये है कि उन पर इतने लंबे करियर में कभी भ्रष्टाचार के कोई छींटे नहीं पड़े हैं.
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