सीमा विवाद : कैसी है भारत की वो अहम सड़क, जिससे घबरा रहा है चीन

सीमा विवाद : कैसी है भारत की वो अहम सड़क, जिससे घबरा रहा है चीन
दौलत बेग ओल्डी स्थित वायुसेना का लैंडिंग ग्राउंड. फोटो विकिकॉमन्स से साभार.

भारत की उत्तरी सीमाओं (Borders) पर चीन अपनी मनमानी और भारत की आपत्तियों को अनदेखा करता रहा है लेकिन भारत अपनी सीमाओं के भीतर अगर कोई निर्माण या बचाव की तैयारी कर रहा है, तो चीन को न केवल ऐतराज़ है बल्कि एक बेचैनी है. अब जिस DBO Road को चीन मुद्दा बना रहा है, वो क्या है और क्यों अहम है?

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भारत और चीन (India-China) के बीच सीमा विवाद से जुड़ी वार्ताओं के दौर के बीच खबरें हैं कि Ladakh में भारत की एक अहम सड़क को लेकर चीन ने ऐतराज़ जताया है. चीन ने ये भी कहा है कि भारत इस सड़क का ज़्यादा इस्तेमाल न करे. ये चीन की घबराहट भी है और एक तरह से धमकी भी, लेकिन द्विपक्षीय वार्ता (Confrontations) के दौर के बावजूद भारत ने अपना इरादा साफ किया है कि वो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के इस तरफ यानी अपने हिस्से में सड़क निर्माण का काम जारी रखेगा.

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255 किलोमीटर लंबी दरबूक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DSDBO) सड़क लेह से अक्साई चीन की सीमा से सटे Daulat Beg Oldie तक कनेक्टिविटी बनाती है. चीन की सीमा से करीब 9 किमी दूर तक यह ​रोड भारत के लिए अहम है क्योंकि यह डीबीओ सीमा पोस्ट तक पहुंचती है. आर्मी की भाषा में 'सब सेक्टर नॉर्थ सड़क' का 220 किलोमीटर तक निर्माण 2019 तक पूरा हो चुका था और शेष काम जारी है. अब फैक्ट्स और ज़मीनी तथ्यों के मुताबिक समझना ये है कि चीन इससे खतरा क्यों महसूस कर रहा है और भारत के लिए इस सड़क के क्या मायने हैं.



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भारत के सबसे उत्तरी कोने पर आप दौलत बेग ओल्डी को सीआईए के जारी इस नक्शे में देख सकते हैं.


भारत के लिए क्यों हैं ये सड़क महत्वपूर्ण?
चूंकि भारत और चीन की ज़्यादातर सीमाएं पहाड़ी इलाकों में हैं इसलिए किसी भी देश के अघोषित युद्ध शुरू करने की हालत में वह देश फायदे में ही रहेगा जिसकी सेनाओं और रक्षा संबंधी सामानों को जल्द से जल्द सीमा तक पहुंचाने का रास्ता होगा. चूंकि पहाड़ी क्षेत्रों में हवाई रास्ते से भी सैनिकों और उपकरणों को पहुंचाने में कई बार मौसम संबंधी समस्याएं होती हैं इसलिए सड़क मार्ग को ज़्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है.

क्यों चीन को खटक रही है ये सड़क?
लद्दाख की राजधानी लेह से चीन की सीमा पर स्थित काराकोरम पास तक पहुंचने वाले DSDBO सड़क के इस साल पूरे हो जाने की उम्मीदें हैं. 14 हज़ार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह सड़क दरबूक से भारतीय सीमा के लद्दाख में स्थित आखिरी गांव श्योक तक पहुंचती है. लद्दाख को चीन के झिनजियांग प्रांत से अलग करने वाले काराकोरम पास और श्योक के बीच दौलत बेग ओल्डी स्थित है, 16 हज़ार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पहाड़ी मैदान भारतीय वायुसेना की सप्लाई के लिहाज़ से एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (ALG) की लोकेशन है.

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इस सड़क का सामरिक महत्व क्या है?
दौलत बेग ओल्डी भारत का सबसे उत्तरी कोना है और वहां तक एक सड़क का होना भारत के लिए वाकई अहम है. अक्साई चीन की सीमा रेखा के समानांतर चलने वाली DSDBO सड़क LAC से सिर्फ 9 किमी की दूरी पर है. इस सड़क की वजह से भारत अक्साई चीन, चिप चैप नदी और जीवन नल्ला से सटे इलाकों तक सीमाओं को मैनेज कर सकता है. इस सड़क से सेनाओं की जल्द तैनाती में भी मदद मिलेगी. इस सड़क से पहले सिर्फ एएलजी के रास्ते से ही इन इलाकों तक पहुंचा जा सकता था.

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दरबूक से दौलग बेग ओल्डी तक सड़क की एक प्रतीकात्मक तस्वीर विकिकॉमन्स से साभार.


चीन का ऐतराज़ किस बात पर?
भारत अपनी सीमाओं में कोई भी निर्माण करने के लिए स्वतंत्र है तो चीन को आखिर दिक्कत क्या है? असल में गालवान वैली की सुरक्षा के लिहाज़ से DSDBO सड़क महत्वपूर्ण है और इस सड़क के कारण ही यहां भारत लगातार पैट्रोलिंग कर पा रहा है. अब तक चीन ने सीमाओं पर जो पोस्ट बनाई हैं, उनके ज़रिये वह गालवान वैली पर पूरी नज़र रख सकता है और इसलिए DSDBO पर चीन से खतरा भी है. चीन को इसी बात पर ऐतराज़ है और वो नहीं चाहता कि भारत इस तरह की सामरिक रणनीतियों पर आक्रामकता के साथ काम करे.

DSDBO सड़क की कहानी है पुरानी
साल 2000 में इस सड़क की योजना फाइनल हुई थी और दो साल के भीतर इसे कंंप्लीट करना था. फिर 2014 तक की समय सीमा तय की गई. लेकिन खराब प्लानिंग के चलते 320 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना पर इसलिए पानी फिर गया क्योंकि इसका डिज़ाइन श्योक नदी के डूब क्षेत्र में आ गया था. इसके बाद इस सड़क को दोबारा एलाइन कर काम शुरू किया गया था.

एक और सड़क का काम ज़ोरों पर
DSDBO सड़क को पूरा करने के अलावा भारत लद्दाख क्षेत्र में ससोमा से सेसर ला पास तक एक ग्लेशिएटेड सड़क का निर्माण कर रहा है, जो कई सालों में पूरी होने पर एक और वैकल्पिक रास्ता होगी. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनाई जा रही दोनों सड़कों के निर्माण में चीन की सीमा से सटे इलाकों में 11,815 श्रमिकों को काम पर लगाया गया है. 17,800 की ऊंचाई पर ससोमा से सेसर ला पास सड़क को लेकर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ज़रूरत के मुताबिक ब्रानग सा, मुर्गो और डीबीओ तक इसका विस्तार संभव होगा.

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चीन पाकिस्तान कॉरिडोर पर भारत के ऐतराज़ को चीन ने खारिज किया था.


DSDBO क्यों है ऑल वेदर रोड?
सिंध नदी के बेसिन में मौत की नदी कही जाने वाली श्योक नदी और उसकी शाखाएं हर मौसम में बाढ़ का कहर ढाती हैं. साथ ही यहां बर्फबारी का भी जोखिम रहता है. इसलिए दौलत बेग ओल्डी तक कंप्लीट की जा रही सड़क हर मौसम में कारगर साबित हो इसका पूरा ध्यान रखा गया है. सेना के पूर्वनिर्मित 37 पुलों को यह सड़क जोड़ती है. इसके अलावा, यहां पिछले साल अक्टूबर में 500 मीटर लंबे कर्नल चेवांग रिनचेन बेली ब्रिज की शुरूआत भी हो चुकी है, जो दुनिया का अपनी तरह के सामरिक महत्व वाला सबसे ऊंचा ऑल वेदर ब्रिज है.

ये पूरा इलाका है भारत के लिए संवेदनशील
दौलत बेग ओल्डी के पश्चिम में गि​लगिट बाल्टिस्तान का क्षेत्र है, जहां चीन और पाकिस्तान की सीमाएं मिलती हैं. यह पूरा इलाका इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहां यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चीन फिलहाल चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर बना रहा है. इस पर भारत ऐतराज़ कर चुका है.

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