क्या है वो डेथ वैली, जहां पारा ऐसे चढ़ रहा है कि दुनिया देख रही है

क्या है वो डेथ वैली, जहां पारा ऐसे चढ़ रहा है कि दुनिया देख रही है
डेथ वैली के रेतीले टीले. (तस्वीर विकिकॉमन्स से साभार)

दुनिया के कई इलाकों में मानसून (Monsoon) का मौसम शबाब पर है, तो वहीं पश्चिमी देशों में गर्मी (Summer) का मौसम चल रहा है. ऐसे तो यूरोप (Europe) और अमेरिका (US) के ठंडे इलाकों में गर्मियों का इंतज़ार रहता है, लेकिन अमेरिका की डेथ वैली में कहर ढाने वाली गर्मी सुर्खियों में है. यहां पिछले करीब 90 सालों का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने वाला तापमान दर्ज हुआ है.

  • News18India
  • Last Updated: August 18, 2020, 7:27 PM IST
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पर्यटन (Tourism), जैव विविधता और अपने खास आकर्षणों के लिए यूं तो डेथ वैली हमेशा याद की जाती रही है, लेकिन पिछले दो दिनों से इसकी चर्चा दुनिया के सबसे गर्म इलाके (Most Heated Place) के तौर पर हो रही है. अमेरिका के कैलिफोर्निया (California) में स्थित डेथ वैली की फर्नेस क्रीक में 16 अगस्त की दोपहर 3:41 बजे 54.4 डिग्री सेल्सियस या 129.9 डिग्री फॉरेनहाइट तापमान दर्ज किया गया. अगर यह पुष्ट हो जाता है तो यह दुनिया में सबसे ज़्यादा दर्ज तापमान माना जाएगा.

इसके पहले डेथ वैली में 2013 में 54 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था. इस बार अगर इस तापमान की पुष्टि हो जाती है तो 7 साल पुराना यह पुष्ट रिकॉर्ड टूटेगा. अब सवाल ये है कि इस वैली में तापमान इतना बढ़ क्यों गया? यह वैली कैसी है और इस बेतहाशा गर्मी का असर क्या होगा?

ऐतिहासिक तापमान वाली डेथ वैली में क्या है खास?
यह एक रेगिस्तानी इलाका है, जिसे उत्तरी मोजाव रेगिस्तान का सीमावर्ती कहा जाता है. यह पृथ्वी का सबसे गर्म इलाका तो है ही, पृथ्वी के इतिहास में भी सबसे ज़्यादा तापमान कहीं दर्ज हो चुका है तो वो जगह भी यही वैली है. 1913 में यहां 56.7°C तापमान दर्ज हुआ था, लेकिन उस वक्त की तकनीक के लिहाज़ से इसकी प्रामाणिकता पर शक किया जाता है. 1931 में ट्यूनीशिया में दर्ज 55°C तापमान को दुनिया का रिकॉर्ड माना जाता है.
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2017 में ली गई डेथ वैली की सैटेलाइट तस्वीर (विकिकॉमन्स से साभार).




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डेथ वैली का बैडवॉटर बेसिन समुद्र तल से 86 मीटर नीचे स्थित है. यह वैली अपनी जैव ​विविधता और वैरायटी के लैंडस्केप्स के कारण मशहूर रही है. यहां गर्मी का मौसम सबसे लंबा होता है, फिर सर्दियों में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है और बारिश कम होती है. दुनिया भर से पर्यटक यहां आते रहे हैं और फिल्मों की शूटिंग के लिए डेथ वैली चर्चित रही है. फिलहाल चर्चा ये है कि यहां तापमान इतना बढ़ा क्यों और इसका क्या असर होगा.

क्या होगा बेतहाशा गर्मी का असर?
जानकार मानते हैं कि इस बेतहाशा गर्मी का दौर दो से तीन दिनों के लिए होता है. अमेरिका के लोक स्वास्थ्य की शीर्ष संस्था सीडीसी ने कहा है कि अमेरिका में बाकी मौसमों के खराब होने के कारण जितनी मौतें होती हैं, हीटवेव से उससे ज़्यादा होती हैं. तेज़ गर्मी से लोग डिहाइड्रेशन से लेकर हीट स्ट्रोक तक की शिकायतें महसूस कर सकते हैं. वहीं WHO का कहना है कि बेहिसाब गर्मी से सांस की बीमारियों, दिल व किडनी के रोगों से ग्रस्त मरीज़ों को ज़्यादा तकलीफ हो सकती है.

दूसरी तरफ, हीटवेव से कृषि पर खासा असर पड़ता है और कई तरह की सब्ज़ियां व पत्ते मर जाते हैं. कई पौधों और फसलों में रोग लग जाते हैं. इसके अलावा, तेज़ गर्मी से अमेरिका में सड़कों के पिघलने और कारों के भीतर गर्मी बहुत बढ़ने से भी हादसे होते हैं.

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क्यों दहकती रहती है ये वैली?
वैज्ञानिकों ने इस वैली की भौगोलिक स्थितियों के अध्ययन से यहां तेज़ गर्मी के कुछ कारण इस तरह समझे हैं.

1. चूंकि यहां की हवा साफ और सूखी रहती है इसलिए मिट्टी, चट्टानें और रेत जैसी यहां की गहरे रंगों की सतहें सूरज की गर्मी से बहुत तप जाती हैं.
2. गर्म हवा कुदरती तौर पर गर्म और ठंडी होती है. वैली के उत्तर दक्षिण ओरिएंटेशन के जाल में गर्म हवा फंस जाती है.
3. डेथ वैली में यहां से सटे रेगिस्तान की गर्म हवाएं भी बहती हैं. इसके अलावा यहां स्थित सूखे पहाड़ों से भी यहां गर्म हवाओं का एक घेरा बना रहता है.

क्यों बढ़ गया डेथ वैली में तापमान?
सीबीएस की मानें तो कैलिफोर्निया समेत दक्षिण पश्चिम अमेरिका में करीब दस दिनों तक हीटवेव का दौर जारी रह सकता है. वहीं, डीटीई की रिपोर्ट कहती है कि इस साल तापमान बेतहाशा बढ़ा देखा जा चुका है और इसका कारण ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में फैली आग है. दिसंबर 2019 में लगी आग ने ऑस्ट्रेलिया के वनों का 20 फीसदी हिस्सा राख कर दिया था और करीब 3 अरब जीव मारे गए थे. इसी के असर के चलते साइबेरिया में जून में तेज़ गर्मी और जंगल की आग की घटनाएं दर्ज हुई थीं.
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