यूथ को आखिर क्यों पसंद आती हैं ड्रग्स माफिया की कहानियां?

इंटरनेट के समय में वेब सीरीज़ और शॉर्ट फिल्म्स की अपनी एक फैन फॉलोइंग है. इस माध्यम पर ड्रग्स से जुड़ी कहानियां पिछले कुछ समय से काफी लोकप्रिय हैं. इंटरनेशनल एंटी ड्रग्स डे पर इन कहानियों के बारे में जानें.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: June 26, 2019, 11:44 AM IST
यूथ को आखिर क्यों पसंद आती हैं ड्रग्स माफिया की कहानियां?
प्रतीकात्मक तस्वीर.
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: June 26, 2019, 11:44 AM IST
गॉडफादर. यही वो पहली किताब और फिल्म थी, जहां से नार्को माफिया की कहानियों में दुनिया की दिलचस्पी शुरू हुई थी. इटली के कुख्यात नार्को माफिया पाब्लो एस्कोबार के जीवन से प्रेरित इस कहानी ने ड्रग्स कारोबार की कुछ परतें दिखाईं, जिनके प्रति आकर्षण का दौर शुरू हुआ. इसके बाद हॉलीवुड समेत दुनिया और भारत में भी इस विषय पर कहानियां सामने आईं. ड्रग्स के कारोबार से जुड़ी ये कहानियां युवाओं को ज़्यादा पसंद आती हैं और इसका सबूत है, वेब सीरीज़ के समय में नार्को माफिया से जुड़े कई शो पसंद किए जा रहे हैं.

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एस्कोबार और एल चापो की कहानियों से जुड़ी वेब सीरीज़ नार्कोज़ की बात हो या हिंदोस्तान में ड्रग्स के कारोबार से जुड़े शो पाउडर की, युवाओं की दिलचस्पी इन कहानियों में साफ दिखाई देती है. क्या कारण हैं कि इन कहानियों को यूथ इतना पसंद करता है? इस सवाल का जवाब तलाशते हैं. 'जब आप नशा करते हैं, जब आप अपने आप को समझ पाते हैं' - प्रसिद्ध गायक बॉब मार्ले. मार्ले अकेला कलाकार नहीं था, जिसने नशे के पक्ष में इस तरह की बात कही हो या गीत रचे हों.

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हिंदोस्तान की शायरी परंपरा में नशे को लेकर काफी चर्चा रही है. पश्चिमी साहित्य में भी ये विषय अछूता नहीं रहा. लेकिन, 1950-60 के दशक के बाद एक लहर दुनिया भर में चली और नशे या ड्रग्स के प्रति आकर्षण इतना बढ़ा कि कई बैंड और स्टार कलाकारों ने इस विषय पर बेहतरीन गीत संगीत तैयार किए. कुछ गायकों की तो ज़िंदगी तक नशे की भेंट चढ़ गई. लेकिन, फैन्स का प्यार उन्हें हमेशा मिलता रहा. यही समय था, जब दुनिया में ड्रग्स का कारोबार और नार्को माफिया की कहानियां खुलकर सामने आने लगी थीं. आइए समझें कि नशे या ड्रग्स कारोबार से जुड़ी कहानियां यूथ फैन्स को क्यों आकर्षित करती हैं.

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वेब सीरीज़ नार्कोज़ को भारत सहित दुनिया भर में मल्टी मिलियन दर्शक मिले.


समस्याओं से बचने का रास्ता
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जीवन में समस्याओं और संघर्ष से जूझने की शुरूआत युवावस्था में होती है और ये संघर्ष कई किस्म के तनावों को जन्म देता है. विज्ञान कहता है कि ड्रग्स में ऐसे केमिकल्स होते हैं, जो स्ट्रेस कम करने, याददाश्त कम करने, कुछ केमिकल रिएक्शनों के कारण शरीर व दिमाग को शिथिल करने और यहां तक कि सोच न पाने तक की तासीर पैदा कर देते हैं. ये एक ऐसी स्थिति है, जिसे शायद मार्ले ने खुद को समझ पाना या खुद से साक्षात्कार होना कहा.

कला और विज्ञान को थोड़ी देर अलग करके सोचें तो ड्रग्स माफिया से जुड़ी कहानियों के पात्र नशा करते हुए काफी कूल दिखाई देते हैं. वो अपने जीवन में वो करते हुए दिख रहे होते हैं, जो वो करना चाहते हैं या जिसमें उन्हें आनंद आ रहा है. इस तरह की पात्र रचना एक मनोवैज्ञानिक असर पैदा करती है. आप ऐसे किसी पात्र की जगह खुद को इमेजिन करते हैं और इसका आसान रास्ता यही दिखता है कि वह पात्र जो नशा कर रहा है, वही सही है. इसके दूरगामी नतीजों के बारे में आप नहीं सोच पाते.

पैसा कमाने का शॉर्टकट
युवावस्था में मन दौलत की तरफ आकर्षित होता है. ड्रग्स कारोबार से जुड़ी क​हानियों में अक्सर ऐसे पात्र दिखाई देती हैं, जिनके पास दौलत की कमी नहीं होती. ड्रग्स के धंधे में बहुत मुनाफा है, ड्रग्स माफिया के पास दुनिया के कई देशों में संपत्ति होती है और यहां तक कि छोटे मोटे ड्रग्स पैडलर के पात्र भी एक ऐसी लाइफस्टाइल जीते दिखते हैं, जो एक सामान्य वर्ग के युवा के बस में नहीं होती. ये कहानियां ड्रग्स के ज़रिये खज़ाने की चाबी पा लेने की तरकीबें दिखाकर युवा मन में आकर्षण पैदा करती हैं.

ग्लैमर और ताकत
ड्रग्स माफिया या इसके कारोबार से जुड़ी क​हानियों के पात्रों की दुनिया को चकाचौंध से भरा दिखाया जाता है. बड़ी बड़ी पार्टियां, आलीशान बंगले, गाड़ियां, गैजेट्स और सेक्स व अय्याशियों के तमाम चित्रों के बीच ऐसे पात्रों के जीवन में न तो खूबसूरत महिलाओं की कमी होती है और न ही सत्ता से जुड़ी ताकत की. इस चकाचौंध के चित्र भी युवाओं को आकर्षित करते हैं, जो कहीं न कहीं आपके मन के किसी कोने में ये खयाल डालते हैं कि इस कारोबार के चलते जो चाहें, उसे हासिल किया जा सकता है.

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गॉडफादर फिल्म के एक दृश्य का स्क्रीनशॉट.


सिर्फ काल्पनिक कहानियों की बात नहीं
उपन्यासों, फिल्मों से अलग ड्रग्स माफिया से जुड़ी वास्तविक कहानियां भी समाज को ये बताती हैं कि नार्को अंडरवर्ल्ड के डॉन और दूसरे लोग कितने ताकतवर और रसूखदार रहे. मैक्सिकन माफिया एल चापो की बात हो, या पुराने ज़माने के एस्कोबार की या फिर पिछले कुछ समय से चर्चित डॉन दाउद इब्राहीम की, हर वास्तविक कहानी में भी ये डॉन एक किंवदंती के तौर पर सामने आता है.

इसके पॉलीटिकल कॉंटैक्ट्स, संपत्ति, दबदबा, अपनी शर्तों पर जीवन और तमाम अय्याशियों के साथ खूबसूरत महिलाओं का इसके जीवन में होना, ये सब वास्तविक कहानियों में है, सिर्फ काल्पनिक कहानियों में नहीं. कुल मिलाकर ड्रग्स एक ज़रिया बनती है, जो ऐसी एक दुनिया की चकाचौंध की तस्वीरें दिखाती है, जो युवाओं के सपनों में होती है.

मनो​वैज्ञानिक कारणों की परतें
मार्ले से अलग एक और गायक गेरार्ड वे ने कहा था 'मैं ड्रग्स से ज्यादा खुद को तबाह करने का एडिक्ट ज़्यादा था... ये एक बेहद रोमांटिक दुनिया थी'. नशे की दुनिया के साथ मन का एक रोमांस पैदा हो जाना इन कहानियों का एक दूरगामी परिणाम हो सकता है इसलिए सतर्क भी रहने की ज़रूरत है. ये जो छोटी मुश्किलों से घबराकर खुद को तबाह कर लेने की प्रवृत्ति है, ये ड्रग्स और दूसरे अपराधों की तरफ ले जा सकती है.

एक पहलू और है
ये कहानियां युवाओं के मन में इसलिए भी कायम रह पाती हैं क्योंकि इनमें एक एक्शन​ थ्रिलर होता है. ऐसे तमाम डॉन्स या ड्रग्स कारोबार के साथ एक फोर्स या एक व्यक्ति संघर्ष कर रहा होता है. ऐसे भी कुछ पात्र होते हैं, जो न चाहते हुए भी इस कारोबार में फंसे होते हैं और इससे छुटकारा तलाश रहे होते हैं. इस दोतरफा संघर्ष के दृश्य भी यूथ को प्रभावित करते हैं क्योंकि उसका मन भी कई किस्म के संघर्षों से जूझ रहा और जीतने का रास्ता तलाश रहा होता है. इस पहलू को ज़्यादा तवज्जो दें और दिशा दें कि आपको शॉर्टकट और चकाचौंध वाले हिस्से से ज़्यादा लगाव महसूस होता है या संघर्ष वाले हिस्से से.

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सेक्रेड गेम्स जैसी वेब सीरीज़ से पहले भी नवाज़ुद्दीन ऐसे पात्र निभा चुके हैं, जो नशे की लत की शिकार रहे.


ड्रग्स या नशे को दूसरे किस्म के अपराधों से जुड़ी कहानियों में भी एक अतिरिक्त ग्लैमर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. एक लेखक ने कहा था कि नशा आपके कई फैसलों को जस्टिफाई कर सकता है, जिन्हें आप होश में नहीं कर सकते. इन किरदारों के पीछे की साइकी और इन कहानियों के हर कीमत पर व्यवसाय के लक्ष्य को समझना ज़रूरी है, न कि चकाचौंध और कैची संवादों से प्रभावित होकर नशे की दुनिया में दाखिल हो जाना.

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First published: June 26, 2019, 10:34 AM IST
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