ड्रग्स सेवन को लेकर क्या हैं कानून और क्या हो सकती है सजा?

ड्रग्स के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर.
ड्रग्स के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर.

सुशांत सिंह केस (SSR Death Case) में शुरू हुई जांच बॉलीवुड ड्रग्स केस (Bollywood Drugs Case) की शक्ल अख्तियार कर चुकी है. कई नामचीन सेलिब्रिटी ड्रग्स संबंधी मामलों में फंसते नज़र आ रहे हैं. जानें कि ड्रग्स के आरोप साबित हुए तो क्या सज़ा हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 11:59 AM IST
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एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की संदिग्ध मौत के बाद चल रही हाई प्रोफाइल जांच (High Profile Investigation) में बॉलीवुड के ड्रग्स कारोबार के साथ तार जुड़े होने का एंगल सामने आया है. सीबीआई (CBI) के साथ ही इस जांच में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी जांच (NCB Investigation) कर रहा है. रिया चक्रवर्ती के बाद दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone), सारा अली खान, रकुल प्रीत कौर जैसे कई नामी गिरामी सेलिब्रिटी से ड्रग्स इस्तेमाल व खरीद फरोख्त को लेकर पूछताछ चल रही है. ड्रग्स का इस्तेमाल करने या रखने के दोषी पाए जाने पर कानूनन (Laws for Drugs) किसी को क्या सज़ा हो सकती है? जानिए कानूनन क्या प्रावधान हैं.

क्या और कैसा है एंटी ड्रग्स कानून?
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रापिक सब्सटैंस एक्ट यानी NDPS एक्ट 1985 और NDPS एक्ट 1988 दो मुख्य कानून हैं, जो भारत में ड्रग्स संबंधी मामलों में लागू होते हैं. इस कानून के मुताबिक नारकोटिक ड्रग्स या फिर किसी भी नियंत्रित केमिकल या साइकोट्रॉपिक पदार्थ का उत्पादन, पजेशन, बिक्री, खरीदी, व्यापार, आयात-निर्यात और इस्तेमाल किया जाना प्रतिबंधित है. सिर्फ मेडिकल या वैज्ञानिक कारणों से विशेष मंज़ूरियों के बाद यह संभव हो सकता है.

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प्रतिबंध को तोड़ने वाले व्यक्ति के खिलाफ सर्च, कुर्की और गिरफ्तारी का अधिकार भी NDPS एक्ट देता है. जांच एजेंसी ऐसे मामले में निजी या सार्वजनिक स्थानों पर कार्रवाई कर सकती है.



भारत में क्या है ड्रग्स पर नीति?
भारत के संविधान में आर्टिकल 47 के तहत भी राज्य को ड्रग्स नियंत्रण, रोकथाम के लिए शक्ति मिली है. ड्रग्स के नियंत्रण के लिए तीन श्रेणियों में ड्रग्स की चर्चा वर्तमान कानून में है. एक, एलएसडी, मेथ जैसे साइकोट्रॉपिक पदार्थों की श्रेणी है, दूसरी चरस, गांजे, अफीम जैसी नारकोटिक ड्रग्स की और तीसरी श्रेणी मिश्रण वाले केमिकल पदार्थों की है, जिसे कंट्रोल्ड सब्सटैंस कहते हैं.

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एनसीबी का लोगो.


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कोकीन से लेकर गांजे तक सवा दो सौ से ज़्यादा ऐसे साइकोट्रॉपिक और ड्रग्स की सूची है, जो NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित हैं. इनके किसी भी तरह के मिश्रण को अगर आप अपने पास रखते हैं, इस्तेमाल करते हैं या किसी तरह भी इसका व्यापार करते हैं, तो आप कानून तोड़ते हैं. और इस कानून को तोड़ने पर आपको सज़ा हो सकती है. सज़ा इस बात पर तय करेगी कि आपने कानून कैसे और कितना तोड़ा है.

क्या हो सकती है सज़ा?
साल 2008 में यह व्यवस्था दी गई थी कि NDPS एक्ट के तहत ड्रग्स रखने के मामले में सज़ा यह देखकर तय होगी कि कितनी मात्रा में ड्रग्स आरोपी के पास पाई गई. यानी एक किलो से कम तक ड्रग्स रखने को व्यावसायिक नहीं माना गया था. निजी इस्तेमाल के लिहाज़ से ड्रग्स मिलने पर आरोपी को 10 साल तक की कैद जबकि कमर्शियल मात्रा में ड्रग्स पजेशन पर 20 साल तक की सख्त कैद तक का प्रावधान है.

लेकिन इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था को बदला है और अब ड्रग्स की मात्रा से सज़ा तय नहीं होगी. कम से कम 10 साल से लेकर 20 साल तक की सज़ा हो सकती है. साथ ही, कम से कम 1 लाख रुपये का जुर्माना भी हो सकता है.

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क्या मौत की सज़ा संभव है?
जी हां. कुछ विशेष रूप से गंभीर मामलों में अदालतें स्वविवेक से ड्रग्स कारोबार से जुड़े दोषी को मृत्युदंड तक दे सकती हैं. ऐसे कुछ उदाहरणों को देखा जा सकता है.

दिसंबर 2007 : मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने गुलाम मलिक को मौत की सज़ा दी, जिसे 2004 में 142 किलोग्राम हशीश के साथ गिरफ्तार किया गया था.
फरवरी 2008 : पहले 1998 में 40 किलोग्राम चरस और फिर साल 2003 में 28 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किए गए ओंकारनाथ काक को अहमदाबाद सेशन कोर्ट ने मौत की सज़ा दी थी.
फरवरी 2012 : साल 1998 में 1.02 किलो और फिर 2007 में 10 किलो हेरोइन के साथ पकड़े जाने वाले परमजीत सिंह को चंडीगढ़ की ज़िला कोर्ट ने मृत्युदंड दिया था.

कौन ले सकता है ड्रग्स के मामले में एक्शन?
अगर आपके पास प्रतिबंधित ड्रग्स पाई जाती है, तो स्थानीय पुलिस भी शुरुआती कार्रवाई कर सकती है. विस्तृत जांच और कार्रवाई के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल डिविजन, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स, एनसीबी के साथ ही डीआरआई, सीबीआई, कस्टम कमीशन और बीएसएफ को भी ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के ​अधिकार हैं.
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