इको फ्रेंडली तकनीकों से बनाई गई है सुप्रीम कोर्ट की नई इमारत

राष्ट्रपति बुधवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट की अतिरिक्त नई इमारत का उद्घाटन करेंगे. आपके लिए इस नई इमारत के बारे में जानना दिलचस्प होगा कि ये इमारत क्यों बनाई गई और पर्यावरण के लिहाज़ से निर्माण में किन खास तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है.

News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 11:08 AM IST
इको फ्रेंडली तकनीकों से बनाई गई है सुप्रीम कोर्ट की नई इमारत
सुप्रीम कोर्ट की नई अतिरिक्त इमारत का उद्घाटन बुधवार को होगा.
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Updated: July 17, 2019, 11:08 AM IST
भारत के सुप्रीम कोर्ट की एक और नई इमारत बनकर तैयार है, जिसका उद्घाटन बुधवार को किया जाना है. पुरानी इमारत से लगभग दोगुनी बड़ी इस नई इमारत में तकरीबन 2100 लोगों को समायोजित करने की क्षमता है और यह नई इमारत पुरानी सुप्रीम कोर्ट के साथ 3 अंडरग्राउंड पैसेज के साथ जुड़ी हुई है. केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने इस नई इमारत का निर्माण खास ढंग से किया है और ये भी कहा जा रहा है कि विभाग ने अब तक की ये सबसे बड़ी इमारत बनवाई है. इस नई इमारत के बारे में क्या खास है, ये जानना दिलचस्प है.

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नई दिल्ली में प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन के नज़दीक बनाई गई इस नई इमारत के निर्माण के पीछे मुख्य वजह भारी ट्रैफिक रहा है. ट्रैफिक और पार्किंग की समस्याओं के चलते भगवानदास रोड स्थित सुप्रीम कोर्ट की पुरानी इमारत के पास अक्सर जाम और गहमागहमी की स्थिति बनती रही थी. अब नई इमारत में 1800 कारों की पार्किंग के लिए अंडरग्राउंड जगह है और तमाम सहूलियतों के साथ ही, इमारत को इको फ्रेंडली बनाने की तरफ भी ध्यान रखा गया है.

इको फ्रेंडली स्ट्रक्चर पर खास ध्यान

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों, जजों और मुकदमे के संबंध में आने वाले लोगों को ज़्यादा सुविधाएं देने के लिहाज़ से बनाई गई इस नई इमारत की संरचना को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर खास ध्यान दिया गया है. इस नई इमारत में बड़ी और ज़्यादा खिड़कियां बनाई गई हैं ताकि कुदरती रोशनी भरपूर आ सके. दूसरी ओर इमारत की छत पर एक बड़ा सोलर पैनल लगाया गया है और बिजली के लिए सेंसर तकनीक अपनाई गई है यानी ज़रूरत के मुताबिक बिजली अपने आप चालू या बंद होगी.

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भारतीय सुप्रीम कोर्ट. न्यूज़18 क्रिएटिव.

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छत पर लगाए गए सोलर पावर ग्रिड की क्षमता 1400 किलोवाट की है, जो दिल्ली में एक इमारत में लगे किसी भी सोलर पैनल की तुलना में सबसे ज़्यादा है. इस व्यवस्था से 40 फीसदी आपूर्ति की संभावना है. सूत्रों के हवाले से आई खबरों में कहा गया है कि इस इमारत में सीवेज ट्रीटमेंट 100 फीसदी किया गया है और अपशिष्ट नगरपालिका की लाइन में नहीं जाएगा. साथ ही, बारिश के पानी के संरक्षण यानी रेनवॉटर हार्वेस्टिंग का भी इंतज़ाम है.

इस तरह मिट्टी बचाई गई
इस भवन के निर्माण में टूटे भवनों से निकली सामग्री का भरपूर इस्तेमाल किया गया है. ढहाए गए या गिरे भवनों के मलबे से करीब 20 लाख ब्लॉक इस भवन में इस्तेमाल किए गए हैं जबकि नई ईंटों का इस्तेमाल कम से कम हुआ है. एक अनुमान के मुताबिक इस तरकीब से 35 हज़ार टन मिट्टी की बचत हुई है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी खबर में दावा किया है कि वैल्यू इंजीनियरिंग के चलते इस भवन के निर्माण की लागत में 60 करोड़ रुपयों की बचत हुई है.

ब्लॉक्स, ऑडिटोरिम और मीटिंग रूम
इस इमारत में पांच ब्लॉक फंक्शनल हैं और एक सर्विस ब्लॉक है, जिनकी ऊंचाई 4 से 9 मंज़िला तक है. 620 और 250 लोगों की बैठक क्षमता वाले दो ऑडिटोरिम इस नई इमारत में हैं और साथ ही, कॉन्फ्रेंस व मीटिंग के लिए अलग कमरों की व्यवस्था है. अधिकारियों के हवाले से खबरों में कहा गया है कि नई इमारत के ई ब्लॉक में कैंटीन, बैंक शाखा, डाकघर सहित रेलवे व फ्लाइट टिकट बुक कराने जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी.

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First published: July 17, 2019, 11:08 AM IST
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