जानें उन शानदार ईको फ्रेंडली फ्लैट्स के बारे में, जो सांसदों के लिए बनाए गए हैं

दशकों पुराने फ्लैटों की जगह सांसदों के लिए नए फ्लैट बनाए जा रहे हैं, जिसका पहला चरण पूरा हो चुका है. जानिए क्या है पूरी योजना. ये भी जानिए कि ये फ्लैट किस तरह ईको फ्रेंडली हैं? ईको फ्रेंडली भवनों के बारे में और भी बहुत कुछ.

News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 12:46 PM IST
जानें उन शानदार ईको फ्रेंडली फ्लैट्स के बारे में, जो सांसदों के लिए बनाए गए हैं
प्रतीकात्मक तस्वीर.
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Updated: June 19, 2019, 12:46 PM IST
केंद्र सरकार लुटियन दिल्ली में सांसदों के लिए जो 400 नए फ्लैट बनाने जा रही है, दावे के मुताबिक वो ईको फ्रेंडली फ्लैट्स होंगे. इस बारे में अब तक खबर आ चुकी है कि पुराने फ्लैटों को तोड़कर जो मलबा होगा, उसका इस्तेमाल नए फ्लैटों में किया जाएगा. ये फ्लैट राष्ट्रपति भवन के दोनों ओर नॉर्थ एवेन्यू और साउथ एवेन्यू में बनाए जाएंगे, जिनमें से करीब 36 फ्लैट तैयार हो चुके हैं और ये भी कहा जा रहा है कि और बनने वाले फ्लैट इनसे भी बेहतर होंगे. तो क्या है ईको फ्रेंडली फ्लैट का पूरा कॉंसेप्ट और प्लान? और कैसे होते हैं ईको फ्रेंडली फ्लैट या भवन?

पढ़ें : दिल्ली में सांसदों के लिए मलबे से बनेंगे 400 नए फ्लैट

सीपीडब्ल्यूडी के महानिदेशक प्रभाकर सिंह बता चुके हैं कि नॉर्थ और साउथ एवेन्यू में सांसदों के लिए आवंटित रहे पुराने फ्लैटों को तोड़कर नए फ्लैट बनाए जाएंगे. सीपीडब्ल्यूडी ने हाल में 80 करोड़ रुपए की लागत से 36 डुप्लेक्स फ्लैट्स बनाए हैं जो नवनिर्वाचित सांसदों को आवंटित किए जाएंगे. सिंह ने ये भी कहा कि सांसदों के लिए नए फ्लैट चरणबद्ध तरीके से बनाए जाएंगे ताकि कोई अव्यवस्था नहीं हो.

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क्यों पड़ी ज़रूरत और कैसे बनी योजना?
वास्तव में, जो 400 पुराने फ्लैट सांसदों के लिए आवंटित रहे, उनको लेकर कई शिकायतें थीं. एक तो, ये फ्लैट आज़ादी के समय बने थे इसलिए काफी पुरानी हालत में आ चुके थे. दूसरे, इनमें कम स्पेस या जगह की शिकायतें भी सांसदों ने समय समय पर की थीं.

दूसरी ओर, ये भी एक समस्या रही थी कि इन फ्लैटों में दुरुस्तीकरण का काम चलने या पहले से आवंटित होने पर समय से सांसदों द्वारा खाली किए न जाने के चलते जो सांसद देश भर से संसद सत्र के दौरान दिल्ली आते थे, वो होटलों में रुकते थे, जिसका खर्च केंद्र सरकार को उठाना होता था. इन तमाम कारणों के चलते एक लंबे समय तक की योजना की ज़रूरत थी.
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प्रतीकात्मक तस्वीर.


2014 में शहरी विकास मंत्री रहे वेंकैया नायडू ने बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी को फ्लैटों का मामला सौंपा. रूडी ने सीपीडब्लूडी के साथ इन नए घरों का प्लान तैयार किया. रूडी के मुताबिक, इन घरों को तैयार करने में काफी वक्त लगा. अभी 36 तैयार हुए है और बाकी घर इनसे बेहतर होंगे. वहीं, रूडी का ये भी कहना है कि ये घर अगले 100 साल के हिसाब से तैयार किए गए हैं.

कैसे हैं ये ईको फ्रेंडली फ्लैट?
सीपीडब्लूडी की मानें तो सांसदों की ज़रूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखने के साथ ही इन फ्लैटों को ईको फ्रेंडली बनाने की तरफ भी ध्यान रखा गया है. ये हैं इन फ्लैटों के ईको फ्रेंडली होने के सबूत :

* घर के आगे एक लॉन है, जबकि पीछे की तरफ यूटिलिटी एरिया.
* बिजली के लिए छत पर सोलर पैनल लगे हैं ताकि सोलर एनर्जी का इस्तेमाल हो सके.
* बड़ी खिड़कियां बनाकर ध्यान रखा गया है कि कुदरती रोशनी रहे ताकि कृत्रिम बिजली का उपयोग कम हो.
* पीएनजी गैस कनेक्शन मुहैया कराया गया है.
* निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में पुराने फ्लैटों के मलबे का जो इस्तेमाल हो सकता था, किया गया है.

और ये हैं इन फ्लैटों में सुविधाएं :
* ये डुप्लेक्स घर 450 स्क्वेयर मीटर के क्षेत्रफल में बनाए गए हैं.
* हर फ्लैट में कुल 7 कमरे हैं यानी एक बैठक, 4 बेडरूम और 2 ऑफिस रूम.
* पहली मंज़िल पर एक पूजा घर बनाया गया है.
* एक ही मंज़िल होने के बावजूद एस्कैलेटर है, जो बेसमेंट पार्किंग से फर्स्ट फ्लोर के लिए है.
* बेसमेंट है, जहां 2 गाड़ियों की पार्किंग हो सकती है. साथ ही, ड्राइवर रूम भी है. बाहर भी पार्किंग व्यवस्था है.
* इंटरनेट और सेंट्रलाइज़्ड एसी जैसी सुविधाएं भी हैं.

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एक दक्षिण भारतीय कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बनाया गया ग्रीन फ्लैट का डिज़ाइन.


अब जानिए क्या होते हैं ईको फ्रेंडली घर
- ऐसे घरों में निर्माण सामग्री के ईको फ्रेंडली यानी पर्यावरण के अनुकूल होने पर ध्यान रखा जाता है, जैसे कांच, लकड़ी आदि.
- निर्माण सामग्री में वो चीज़ें इस्तेमाल करने की कोशिश होती है, जो किसी उद्योग का वेस्ट होती हैं. इस तकनीक को जीएफआरजी भी कहा जाता है.
- ईको फ्रेंडली घर एनर्जी एफिशिएंट होते हैं यानी कुदरती स्रोतों का पूरा इस्तेमाल करते हैं, जैसे सोलर पैनल. इसके अलावा, जल संरक्षण के लिए इन घरों में सिस्टम लगाए जाते हैं. पानी और वेस्ट की रीसाइकिलिंग के लिए इंतज़ाम होते हैं.
- हरियाली का ध्यान रखा जाता है. ऐसे घर भी देश में बन चुके हैं, जो पेड़ पौधों के सही ढंग से इस्तेमाल के कारण मुफीद तापमान मेंटेन करते हैं और इनमें पंखों या एसी की ज़रूरत तक नहीं होती.
- इन घरों के डिज़ाइन में ध्यान रखा जाता है कि हवा और रोशनी बराबर बनी रहे.
- साथ ही, ऐसे घरों में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और उनके संरक्षण पर ध्यान देने के और भी तरीके अपनाए जाते हैं जैसे छोटे बायोगैस प्लांट, खाद के इंतज़ाम, बगीचों की जगह और ज़रूरत के मुताबिक अपने आप चालू व बंद होने वाले इलेक्ट्रिक सिस्टम आदि.

ये हैं देश की टॉप पांच ग्रीन बिल्डिंगें
ग्रीन अपार्टमेंट्स, या फ्लैट या स्वतंत्र बंगलों के कुछ प्रोजेक्ट देश भर में कारगर साबित हुए हैं लेकिन अब भी हाउसिंग सेक्टर यानी गृह निर्माण क्षेत्र में इस तरह की तकनीकों को तवज्जो दिया जाना सामान्य बात नहीं हुई है. हालांकि बड़े भवनों में ईको फ्रेंडली तकनीकों को ध्यान में रखा जाने लगा है. इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) जैसी संस्थाएं बन चुकी हैं. भारत के उन पांच भवनों के बारे में जानिए, जो ईको फ्रेंडली होने के कारण देश ही नहीं दुनिया भर में तारीफ हासिल कर चुके हैं.

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हैदराबाद स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तस्वीर.


पुणे स्थित सुज़लॉन वन अर्थ कंपनी का भवन ऐसी लिस्ट में टॉप पर आता है. इस भवन को 'बगीचे में बना दफ्तर' कहा जाता है. दावा किया जाता है कि यह भवन 100 फीसदी रीन्यूएबल ऊर्जा से बना है. इसके बाद हैदराबाद स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भवन कम से कम पानी और बिजली का इस्तेमाल करते हुए कुदरती संसाधनों के संरक्षण का ध्यान रखने वाले डिज़ाइन के कारण इस लिस्ट में रहता है.

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हैदराबाद स्थित सीआईआई, गोदरेज ग्रीन बिज़नेस सेंटर का विहंगम दृश्य.


हैदराबाद स्थित सीआईआई - सोहराबजी गोदरेज ग्रीन बिज़नेस सेंटर को दुनिया के आर्किटेक्चर में एक मिसाल माना जाता है और इसे लीड द्वारा प्लैटिनम रेटिंग तक दी जा चुकी है. मैसूर स्थित इनफोसिस का भवन और कोलकाता स्थित इनफिनिटी बेंचमार्क कंपनी का भवन भी देश के पांच बेहतरीन ईको फ्रेंडली भवनों की लिस्ट में शुमार होते हैं.

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First published: June 19, 2019, 12:46 PM IST
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