जानें कैसे और किस कदर समुद्रों का दम घोंट रहा है प्लास्टिक कचरा

#MISSIONPAANI: विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के मौके पर पढ़ें एक सतर्क करने वाली रिपोर्ट. केवल पढ़ें नहीं, बल्कि संकल्प भी लें कि अब आप जब किसी समुद्री किनारे पर छुट्टी मनाने जाएंगे, तो समुद्री ईकोसिस्टम पर इस तरह का कोई अत्याचार नहीं करेंगे.

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Updated: July 28, 2019, 9:11 PM IST
जानें कैसे और किस कदर समुद्रों का दम घोंट रहा है प्लास्टिक कचरा
समुद्र में प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है. फाइल फोटो.
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Updated: July 28, 2019, 9:11 PM IST
क्या आप जानते हैं कि प्लास्टिक कचरे से समुद्र किस कदर बेहाल हो चुके हैं? हर साल कितना प्लास्टिक कचरा समुद्रों में डंप कर दिया जाता है? ऐसे ही और चौंकाने वाले आंकड़े साफ संदेश दे रहे हैं कि अगर अब प्लास्टिक कचरे से तौबा नहीं की गई, तो प्रकृति को लगातार हो रहा ये नुकसान जो आफत लेकर आएगा, वो बड़ी भारी पड़ेगी. विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर समुद्रों का दम घुटने का ये दस्तावेज़ पढ़ें और खुद से वादा करें कि जब आप अगली बार किसी बीच पर जाएंगे तो प्लास्टिक बोतल, पॉलीथिन, डिस्पोज़ेबल या सिगरेट जैसा कोई कचरा वहां नहीं फेंकेंगे.

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समुद्रों में प्लास्टिक कचरा कैसे पहुंचता है? इसके तीन प्रमुख कारण या ज़रिये हैं. पहला, समुद्री किनारों यानी बीच पर जाने वाले लोग वहां प्लास्टिक कचरा फेंक जाते हैं. दूसरा, समुद्र पर तैरने वाले जहाज़ या नाव समुद्र में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कूड़ा डंप करते हैं. और तीसरा, नदियां अपने साथ भारी मात्रा में कचरा लेकर समुद्र में मिलती हैं.

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नदियों से कितना कचरा मिलता है समुद्र में?
इस सवाल से पहले इस सवाल का जवाब जानें कि समुद्र में कितना प्लास्टिक कचरा है. 2017 में छपे एक शोध के हवाले से स्लोएक्टिव वेबसाइट ने लिखा है कि 1.15 से 2.41 मिलियन टन यानी 24 लाख टन तक प्लास्टिक कचरा हर साल समुद्रों में जा चुका था. और इतना सिर्फ नदियों के ज़रिये जा रहा है. 20 प्रमुख नदियों को लेकर किए गए अध्ययन में पाया गया कि ज़्यादातर एशिया की नदियां हैं जो समुद्रों में ये कचरा पहुंचा रही हैं और दुनिया भर में नदियों से जो प्लास्टिक कचरा समुद्र में पहुंचता है, समुद्री कचरे का 67 फीसदी होता है.

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कहां से आता है इतना प्लास्टिक वेस्ट?
पिछले 70 सालों में प्लास्टिक की डिमांड बेतहाशा बढ़ी है. प्लास्टिक ओशियन संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 300 मिलियन यानी 30 करोड़ टन से ज़्यादा प्लास्टिक का उत्पादन हर साल दुनिया में हो रहा है. इसमें से आधा प्लास्टिक डिस्पोज़ेबल चीज़ों के लिए इस्तेमाल किया जाता है यानी एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है. नतीजा ये होता है कि हर साल 80 लाख से 1 करोड़ टन तक प्लास्टिक वेस्ट समुद्रों में जाता है.

कहां कितना है प्लास्टिक का इस्तेमाल?
वर्ल्डवॉच इंस्टिट्यूट ने एक अनुमानित रिपोर्ट में आंकड़ा दिया है कि एक अमेरिकी या यूरोपीय व्यक्ति एक साल में करीब 100 किलोग्राम प्लास्टिक का इस्तेमाल करता है और इसमें से ज़्यादातर इस्तेमाल पै​केजिंग के लिए किया जाता है. दूसरी ओर, अगर एशिया की बात करें तो प्रति व्यक्ति यह आंकड़ा 20 किलोग्राम प्रति वर्ष का है. एशिया में इस आंकड़े के कम होने के पीछे आर्थिक विकास कम होना है.

एक नज़र में प्लास्टिक प्रदूषण के आंकड़े
1 से 2 करोड़ टन : वर्ल्डवॉच की 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक़, हर साल समुद्रों में इतना कचरा शामिल हो रहा है.
5.25 ट्रिलियन : दुनिया भर के समुद्रों की सतह 10 खरब से ज़्यादा प्लास्टिक पार्टिकल बह रहे हैं.
13 अरब डॉलर : समुद्री पर्यावरण को लगातार हो रहे नुकसान के चलते इस मूल्य का नुकसान हर साल हो रहा है.

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प्लास्टिक प्रदूषण समुद्री जीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है.


और ये कचरा नष्ट नहीं होता!
प्लास्टिक के इस्तेमाल ने इसलिए ज़ोर पकड़ा क्योंकि ये बहुत लंबे समय तक बना रहता है, यानी आपके जीवन में तो पूरी तरह नष्ट नहीं हो सकता. विज्ञान ये है कि सूरज की गर्मी यानी ज़्यादा तापमान के संपर्क में आने से प्लास्टिक कणों में टूटता है. अब समुद्र में मिल चुका प्लास्टिक उतने तापमान का सामना नहीं करता यानी डायरेक्ट धूप के संपर्क में भी नहीं होता इसलिए समुद्री प्लास्टिक कचरे को नष्ट होने में और ज़्यादा वक़्त लगता है. और जब तक पुराना प्लास्टिक कचरा नष्ट होने की कगार पर पहुंचता है, तब तक नया और कचरा भारी मात्रा में आ चुका होता है.

समुद्री जीवन हो रहा है नष्ट
समुद्री चिड़ियों और जीवों की कई प्रजातियां प्लास्टिक के अनचाहे सेवन से नष्ट हो रही हैं. ये भी देखा जा रहा है समुद्र तटीय मेंढ़क व अन्य तटीय जीव जेली के धोखे में प्लास्टिक खा लेते हैं और बीमार होते हैं या मर जाते हैं. कुल मिलाकर प्लास्टिक कचरे में मिले केमिकल्स के कारण समुद्री जीवों और वन​स्पतियों को धीमा लेकिन घातक नुकसान हो रहा है. पानी में ज़हर घुलने से जीवों के टिशू की संरचना तक बदलने लगी है. इसका असर पूरे ईकोसिस्टम पर पड़ना तय है और पड़ रहा है.

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समुद्र तटीय मेंढ़क व अन्य तटीय जीव जेली के धोखे में प्लास्टिक खा लेते हैं.


दूसरा अहम पहलू ये है कि समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है क्योंकि पेयजल संकट पूरी दुनिया के कई हिस्सों को चपेट में ले चुका है. ऐसे में, समुद्र में इस कदर प्लास्टिक कचरे के जाने से आने वाले समय में जो पेयजल आपके हाथ में होगा, वह भी धीमे ज़हर जैसा होगा क्योंकि प्रोसेसिंग और प्यूरीफिकेशन के बाद भी पेट्रोलियम जैसे कुछ कण या तत्व ऐसे रह जाएंगे, जिनसे निजात पाना संभव नहीं होगा. यक़ीन मानें कि अगर आप आज समुद्र में प्लास्टिक कचरा फेंकेंगे और अगले कुछ 10-20 साल और जिएंगे, तो अपने फेंके हुए ज़हर को आप पी रहे होंगे.

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First published: July 28, 2019, 8:57 PM IST
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