US President Election 2020: जानें क्या है फेडरल इलेक्शन कमीशन, जो करवाता है चुनाव

अमेरिका के संघीय चुनाव आयोग का कार्यालय. (तस्वीर विकिमीडिया कॉमन्स)
अमेरिका के संघीय चुनाव आयोग का कार्यालय. (तस्वीर विकिमीडिया कॉमन्स)

जैसे भारत में चुनाव आयोग (Election Commission) है, उसी तरह अमेरिका में यह कमीशन कानूनी ढंग से चुनाव होना सुनिश्चित करता है और जुर्माने आदि की कार्यवाही भी. लेकिन जानने की बात यह है कि यह कमीशन कैसे पंगु हो चुका है और क्यों.

  • News18India
  • Last Updated: November 3, 2020, 5:19 PM IST
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क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में 2018 में जो मध्यावधि चुनाव (Midterm Polls) हुए थे, उनमें सबसे ज़्यादा रकम खर्च की गई थी? सेंटर फॉर रिस्पॉंसिव पॉलिटिक्स के मुताबिक मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के कार्यकाल के दौरान हुए इन चुनावों में राजनीतिक पार्टियों, कमेटियों और बाहरी समूहों के ज़रिये इन चुनावों में रिकॉर्ड 5.7 अरब डॉलर की रकम झोंक दी गई थी. अमेरिकी चुनावों (US Elections) में कौन, कहां से और कितना पैसा चुनाव में किस तरह लगाता है, इसका पूरा हिसाब रखने और इस बारे में हिदायतें देने वाली संस्था है फेडरल इलेक्शन कमीशन (FEC).

इस कमीशन का काम है कि वो चुनाव में फंड के लेन देन की तमाम प्रक्रियाएं कानूनी तौर पर होना सुनिश्चित करे. हालांकि करीबन ढाई सौ साल के चुनावी इतिहास वाले अमेरिका में यह कमीशन बहुत नया है. अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में इस बार चर्चा में इसलिए है क्योंकि कोरम पूरा न होने के कारण जुलाई 2020 से यह कमीशन एक तरह से बंद पड़ा है.

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क्या है और कब शुरू हुआ FEC?
चुनावी प्रचार अभियानों को मैनेज करना और कानूनी तौर पर उन्हें चलवाना इस कमीशन की ज़िम्मेदारी है. व्हाइट हाउस, सीनेट या हाउस ऑफ रिप्रेज़ें​टेटिव के लिए होने वाले चुनावों में उम्मीदवारों को फंड संबंधी समानता का अधिकार देने के लिए कैंपेन फाइनेंस कानून अमेरिका में हैं. लेकिन शुरू से यह समस्या रही कि इन कानूनों को लागू करवाने के लिए कोई मज़बूत संस्था नहीं थी.

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साल 1971 में फेडरल इलेक्शन कैंपेन एक्ट के तहत इन कानूनों में कुछ सुधार और संशोधन किए गए. साल 1975 में FEC प्रभाव में आ गया. हालांकि यह एक स्वायत्त संस्था है लेकिन इसमें वर्तमान राष्ट्रपति द्वारा छह कमिश्नर नियुक्त किए जाते हैं. दूसरी तरफ, इसके सदस्यों की नियुक्ति के लिए सीनेट की रज़ामंदी ज़रूरी होती है और ध्यान रखा जाता है कि इस कमीशन के सदस्य सभी पार्टियों का बराबर प्रतिनिधित्व करते हों.

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क्यों पड़ी थी FEC की ज़रूरत?
इस कमीशन की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज है कि यह संस्था वास्तव में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति थ्योडोर रूज़वेल्ट की सोच की पैदाइश थी. रूज़वेल्ट चाहते थे कि चुनाव कैंपेन में अनाप शनाप पैसा न लगे और फंड को लेकर पारदर्शिता रहे. कानूनों को लागू करवाते हुए फंड की पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने के लिए बनी संस्था वक्त के साथ अपना काम क्या बखूबी करती रही? यह भी जानना चाहिए.

मज़बूत है या कमज़ोर FEC?
कई पूर्व कमिश्नर इस कमीशन को नपुंसक तक बता चुके हैं यानी यह सिर्फ दिखावे की संस्था बनकर रह गया है. इस कमीशन पर आरोप हैं कि न तो ये कानून सुनिश्चित करवा पाता है और न ही शिकायतों का निवारण कर पाता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि इस कमीशन का दो दलीय ढांचा ही इसे कमज़ोर कर देता है. यह कमीशन निष्पक्ष नहीं रहता और यह भी आरोप है कि शिकायतों के निपटारे के लिए बहुत समय ज़ाया हो जाता है.

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इस कमीशन की दिखावे की शक्तियों और डिजिटल युग में इसकी अस्पष्ट नीतियों को लेकर भी आलोचना होती रही है. प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वे में शामिल लोगों में से 77 फीसदी ने माना कि इस कमीशन को यह सीमा सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई व्यक्ति या समूह चुनावी कैंपेन में कितना खर्च कर सकता है. इसका विश्लेषण यह हुआ कि अपनी स्थापना के 45 साल बाद यह कमीशन बेसिक गाइडलाइन तक नहीं बना पाया.



क्या है चुनाव में डार्क मनी का गणित?
मौजूदा राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन दोनों के चुनावी कैंपेन में अवैध धन का इस्तेमाल होने की खबरें रहीं. इस बारे में वॉशिंग्टन एग्ज़ामिनर के साथ इंटरव्यू में FEC के चेयरमैन रहे ट्रेन ट्रेनोर ने कहा कि डेमोक्रेट उम्मीदवार हों या रिपब्लिकन, डार्क मनी का इस्तेमाल दोनों ही कर रहे हैं और अच्छा खासा कर रहे हैं. ट्रेनोर के इस बयान के बाद साफ है कि FEC अपने मिशन और परिकल्पना में किस तरह कमज़ोर है.

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इस चुनाव के दौरान यह संस्था वैसे भी प्रासंगिक नहीं रह गई है क्योंकि कोरम पूरा न होने की वजह से इस साल जून से यह पूरी तरह निष्क्रिय पड़ी हुई है. एनवायटी की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि FEC में छह ​कमिश्नरों की सीटों में से 3 के खाली रहने की वजह से सितंबर 2019 से ही कमीशन न तो किसी मामले में जांच कर पाया और न ही जुर्माने लगा सका क्योंकि कमीशन के सक्रिय होने के लिए कम से कम 4 सीटें भरी होनी चाहिए.
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