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कौन था वो शख्स जिसने बनाया था पहला संविधान मसौदा, जिसे गांधीजी ने खारिज किया

कौन था वो शख्स जिसने बनाया था पहला संविधान मसौदा, जिसे गांधीजी ने खारिज किया

एमएन राय (फाइल फोटो)

एमएन राय (फाइल फोटो)

constitution Day, Indian Constitution : जानिए उस शख्स के बारे में जिसने विस्तार से भारत का संविधान लिखा था और जनता को वास्तविक अधिकार देने की बात की थी. हालांकि ये काम देश की आजादी के पहले ही हुआ था. 30 के दशक में इस पर काम शुरू किया गया. 40 के दशक की शुरुआत में संविधान का मसौदा बनकर तैयार हो गया. जब इसे गांधीजी को दिखाया गया तो उन्हें पसंद नहीं आया.

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    क्या आपको मालूम है कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की अगुवाई वाली संविधान सभा ने 1950 में जो संविधान तैयार किया था, उससे कुछ साल पहले संविधान का एक और मसौदा तैयार किया गया था, जिसे महात्मा गांधी ने खारिज कर दिया था.

    गांधी का मानना था कि इस संविधान मसौदे की कुछ बातें अतिवादी हैं, जो व्यवहार रूप में संभव नहीं होंगी. इस संविधान ड्राफ्ट को भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के अगुवा एम एन राय ने तैयार किया था, जो भारत में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक थे. बाद में जब सोवियत संघ में जोसफ स्तालिन का सितारा चढ़ने लगा तो वो कम्युनिस्ट आंदोलन से अलग हो गए. तब उन्होंने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में कूदने के लिए रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी बनाई.

    गांधीजी को पसंद नहीं आया
    माना जाता है कि जवाहर लाल नेहरू चाहते थे कि संविधान का एक मसौदा बनाया जाए. उन्हीं के कहने पर एम एन राय ने ये काम शुरू किया. उन्होंने ये काम 30 के दशक के आखिर में शुरू किया. 40 के दशक के शुरू में उन्होंने इसे खत्म किया. जब ये मसौदा कांग्रेस और गांधीजी के पास गया तो ज्यादा पसंद नहीं आया. गांधीजी को ये मसौदा ज्यादा स्वछंद महसूस हुआ. उन्होंने इसे खारिज कर दिया.

    1944 में मसौदा पहली बार प्रकाशित हुआ
    बाद में एम एन राय ने इस गांधीजी के खारिज किये जाने के बाद भी प्रकाशित कराया. इस ड्राफ्ट को 1944 में कांस्टीट्यूशन ऑफ फ्री इंडिया के नाम से जनता के बीच चर्चा के लिए प्रकाशित किया गया.

    1940 में कांग्रेस की एक सभा में एमएन राय (फाइल फोटो)

    क्या था इस मसौदे में
    जब 1944 में इसका प्रकाशन हुआ, तब तक माना जाने लगा था कि ब्रिटेन जल्द ही भारत को आजाद कर देगा. लिहाजा ये मसौदा तीन उद्देश्यों पर टिका था…
    1. भारत के संवैधानिक भविष्य को देखते हुए जब भी ब्रिटेन सत्ता का हस्तांतरण करे तो ये सीधे ब्रिटेन की संसद और भारतीय जनता के बीच हो. इसमें बीच में भारत के सियासी दल नहीं हों. यानि ब्रिटेन भारतीय जनता की ओर से जिन मध्यस्थता कर रहे राजनीतिक दलों से बातचीत कर रहा है, उन दलों को बीच से हटा दिया जाए.
    2. देश के लिए बेहतर संवैधानिक विजन की तैयारी की जा सके.
    3. सत्ता का हस्तांतरण ब्रिटेन से सीधे भारतीय जनता को हो

    हर जिले में पीपुल्स कमेटी की वकालत
    इस प्रकाशित मसौदे में 13 चैप्टर थे. जिसमें सात चैप्टर संघीय केंद्र की बात करता है, जिसमें इसकी संरचना, क्रियान्वयन, संवैधानिक ताकत, चुनाव आदि की बात करते हैं. इसके बाद के अध्याय अधिकार और मूलभूत सिद्धांत, प्रांत, सामाजिक आर्थिक संगठन, न्यायपालिका और स्वशासित स्थानीय सत्ता पर हैं. इसमें एक चैप्टर प्राधिकार के स्रोत नाम से भी, जिसमें जनता की संप्रुभता तय करने की बात की गई है.

    एम एन राय का ये ड्राफ्ट वास्तविक केंद्रीकरण, प्रत्यक्ष लोकतंत्र, पूरे देश में स्थानीय स्तर पर निर्वाचित अधिकार संपन्न पीपुल्स कमेटी की पैरवी भी करता है, जिसमें इन जिलास्तरीय पीपुल्स कमेटी को अधिकार होंगे.

    एमएन राय के संविधान मसौदे में प्रत्यक्ष और वास्तविक लोकतंत्र की भावना पर जोर दिया गया था

    कौन थे एम एन राय 
    अब जानते हैं कि ये एम एन राय थे कौन. उनका असली नाम नरेंद्र नाथ भट्टाचार्य था लेकिन बाद में भारतीय क्रांतिकारी के तौर पर वो मानवेंद्र नाथ राय के नाम से जाने जाने लगे. 1887 में बंगाल में उनका जन्म हुआ. आजादी के बाद 1954 तक वह जिंदा रहे. दूसरे विश्व युद्ध के बाद मार्क्सवाद से उनका मोहभंग हो गया. वो वास्तविक मानवीय फिलास्फी की बात करने लगे. आजादी के आंदोलन के दौरान वो लंबे समय के लिए जेल में भी रहे.

    जर्मनी गए थे अंग्रेजों के खिलाफ मदद लेने 
    हालांकि एक जमाने में राय भी ये मानते थे कि भारत में ब्रिटिश राज का अंत सशस्त्र संघर्ष से ही हो सकता है. 1915 में जर्मनी से हथियारों की मदद लेने के लिए वो देश से चले गए. फिर अगले 16 सालों तक बाहर ही रहे. वो जर्मन जहाजों की मदद से अंडमान जाकर वहां कैदियों को मुक्त कराने और उन्हें हथियारबंद कर ओडिसा के समुद्र तट से भारत में घुसने की योजना बना रहे थे. हथियारों और जहाजों की व्यवस्था हो चुकी थी लेकिन पूरे आपरेशन के लिए पर्याप्त धन नहीं जुट सका. साथ ही जर्मनी ने अचानक कदम पीछे खींच लिये.

    महात्मा गांधी ने एमएन राय के संविधान के मसौदे को खारिज कर दिया, क्योंकि उन्हें कई जगहों पर ये अतिवादी लगा था

    16 साल बाद भारत लौटते ही गिरफ्तार हुए
    इसी बीच वो ब्रिटिश सीक्रेट एजेंट्स की नजरों में भी आए. लेकिन कई देशों में घूमते रहे. सोवियत संघ जाकर लेनिन से भी मिले. 1930 में वो भारत लौटे लेकिन यहां उनकी राजनीतिक गतिविधियां एक साल ही चल पाईं थीं कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. 12 साल की सजा हुई. हालांकि ये सजा बाद में घटकर छह साल कर दी गई. हालांकि भारत की आजादी के बाद जब बीआर अंबेडकर की अगुवाई में संविधान सभा समिति बनाई गई तो उससे उन्हें दूर रखा गया. उन्हें इस बात का मलाल भी रहा.

    Tags: Constitution, Constitution of India, Indian Constitution, Mahatma gandhi

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