कौन है चीनी सेना के वेस्टर्न थिएटर का बॉस जनरल झाओ, जो बना भारत का विलेन

कौन है चीनी सेना के वेस्टर्न थिएटर का बॉस जनरल झाओ, जो बना भारत का विलेन
भारत चीन सीमा पर हुई हिंसा के लिए अमेरिकी इंटेलिजेंस ने चीनी सेना को ज़िम्मेदार ठहराया. फाइल फोटो.

चीन के राष्ट्रपति और सत्ताधारी Communist Party of China के साथ गहरे संबंध रखने वाले General Zhao के पास अनुभव और ताकत की कमी नहीं, फिर भी वह भारत के खिलाफ लगातार नाकाम साबित हुए हैं! Galwan Valley में India-China Standoff को लेकर नए खुलासों के साथ ही, जानिए कि कैसे जनरल झाओ की यह तीसरी बड़ी हार है.

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डेढ़ हफ्ते पहले Ladakh Borders में भारत चीन (India-China) सेना के बीच हुए संघर्ष में 20 जवानों के शहीद होने के बाद हाल में, अमेरिकी इंटेलिजेंस ने कहा ​कि भारतीय जवानों पर हमले के पीछे चीन का एक क्रूर जनरल था. यह जनरल पहले भी भारत के लिए मुसीबतें खड़ा करता रहा है, लेकिन इसी जनरल की वजह से हर बार चीन को शर्मिंदगी झेलना पड़ी है. जनरल झाओ जोंगकी (General Zhao Zongki) कैसे भारत के खिलाफ नाकाम साबित होते रहे हैं?

कौन हैं विवादों में घिरे जनरल झाओ जोंगकी?
सिचुआन, तिब्बत, गानसू, निंग्ज़िया, किंघाई, झिनजियांग और चोंगकिंग इलाकों पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का जो नियंत्रण दस्ता है, उसे वेस्टर्न थिएटर कमांड (Wetern Theater Command) कहते हैं और 2016 से इसके बॉस हैं जनरल झाओ. सेना में तिब्बत के इलाकों का करीब 20 साल का अनुभव रखने वाले झाओ बेहद महत्वाकांक्षी रहे और पीएलए में काफी प्रमोशन हासिल किए.

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सैन्य फैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में शामिल जनरल झाओ के बारे में खबरें कहती हैं कि 1979 में वियतनाम युद्ध के दौरान भीषण हमले से बचकर वह भाग निकले थे. साल 2016 में झाओ ने भारत यात्रा की थी और 2017 में डोकलाम विवाद हुआ था.
डोकलाम विवाद के पीछे भी झाओ ही थे!


साल 2017 में जब भारतीय सैन्य दलों ने देखा कि चीनी सेना के संरक्षण में डोकलाम तक एक सड़क का निर्माण किया जा रहा है, तब इसका विरोध किया गया. इस सड़क के ज़रिये चीनी सेना दक्षिण डोकलाम में सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब जामफेरी रिज तक अपने वाहनों से आवाजाही कर सकती थी.

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डोकलाम विवाद के पीछे भी चीन के टॉप मिलिट्री अधिकारी थे, जिनमें झाओ का नाम प्रमुख था. यह विवाद करीब 73 दिनों तक सुर्खियों में रहा और जब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं यानी नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग ने तय किया कि सीमा पर इस तरह का स्टैंडऑफ दोनों ​ही देशों के हित में नहीं है, तब जाकर कहीं दोनों तरफ की सेनाएं पीछे हटीं.

क्यों खतरनाक हैं LAC के जानकार झाओ?
भारत के लिए विलेन साबित हो चुके झाओ और खतरनाक साबित हो सकते हैं. खबरों की मानें तो भूटान-भारत-तिब्बत के त्रिकोणीय सीमाई इलाकों में बरसों का अनुभव रखने वाले झाओ को LAC की गहरी समझ है. 1992 में माउंटेन इन्फेंट्री ब्रिगेड में कमांडर रह चुके झाओ ने तब भी तिब्बत से लगने वाली सीमाओं को मज़बूत करने की रणनीति पर काम किया था. 2003 में इस क्षेत्र से जाने के बाद 2016 में फिर झाओ यहीं पहुंचे.

जिनपिंग के कितने करीबी हैं झाओ?
इसका अंदाज़ा आप ऐसे लगा सकते हैं कि झाओ को ​चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 'आंख और कान' कहा जाता है. घात लगाकर हमला करने में माहिर क्रूर जनरल झाओ अस्ल में, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की आंखों में काम के सैन्य अधिकारी के तौर पर छवि बनाने की कोशिश करते हैं. इसलिए झाओ डोकलाम में ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन हड़पने की कोशिश में थे. अस्ल में, झाओ और जिनपिंग दोनों को ही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शांक्सी प्रांत के इन्किलाबी नायकों में गिना जाता है. दोनों के बीच करीबी रिश्ता बताया जाता है.

कैसे झाओ की तीसरी हार है लद्दाख स्टैंडऑफ?
पहले वियतनाम में मुंह की खा चुके झाओ को डोकलाम में भी मुंह की खानी पड़ी थी. हालांकि वह​ विवाद को लंबा खींचने में कामयाब रहे थे, लेकिन आखिरकार इस मुद्दे पर चीन को वैश्विक आलोचना के बाद कदम पीछे लेने पड़े. इससे पहले चुमार के विवाद का फायदा उठाने में भी झाओ सफल नहीं हो सके. अब ताज़ा विवाद में भी झाओ की भूमिका संदिग्ध हो गई है.

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झाओ पर अमेरिकी खबरों में आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने भारतीय जवानों पर हमला करने के लिए अपने सैन्य दलों को छूट दी क्योंकि वह भारत को 'सबक सिखाना' चाहते थे. इसके बावजूद, चीन के हाथ शर्मिंदगी ही लगी क्योंकि चीन के इस हमले में जहां भारत के 20 जवान शहीद हुए, वहीं चीन के कम से कम 35 जवान मारे गए. इससे पहले 40 जवानों के आंकड़े को चीन ने फेक न्यूज़ बताया था लेकिन सही आंकड़ों का खुलासा नहीं किया.

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इस हमले तक बात कैसे पहुंची?
बीती 15 जून को लद्दाख से जुड़ती सीमा पर हुए चीनी हमले से पहले मई के पहले हफ्ते में पैंगॉंग त्सो इलाके में भारतीय और चीन पेट्रोलिंग दसतों के बीच झड़पें हुई थीं. इनमें दोनों तरफ के करीब 250 जवान शामिल थे. इसके कुछ ही दिन बाद 9 मई को दूसरी बार हिंसक विवाद हुआ था जिसमें चार भारतीय और सात चीनी जवान घायल हुए थे. इन घटनाओं के बाद 15 जून को हुए फेसऑफ में झाओ से खुली छूट पा चुके चीनी सैनिकों ने घातक हमला किया.
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