बेहद करीब पहुंचकर सूरज की कैसे जासूसी कर रहा है नासा का पार्कर?

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Updated: August 20, 2019, 8:01 PM IST
बेहद करीब पहुंचकर सूरज की कैसे जासूसी कर रहा है नासा का पार्कर?
सूर्य तक भेजे गए स्पेसक्राफ्ट का नासा द्वारा जारी डिजिटल मॉडल.

भारत का चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2 Mission) चांद की कक्षा में प्रवेश कर गया है तो नासा (NASA) का सूर्ययान (Solar Probe) अपनी दूसरी कक्षा का सफर पूरा कर अगली कक्षा में यानी सूरज के और करीब पहुंच गया है. नासा के इस सौर मिशन के बारे में अहम बातें जानें.

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इधर भारत का चंद्रयान 2 मिशन (India's Chandrayaan 2) कामयाबी के साथ चल रहा है. चंद्रयान के चांद की कक्षा में प्रवेश करने की खबरें हैं तो दूसरी ओर, नासा के सूरजयान (NASA Spacecraft) ने एक साल का सफर बखूबी पूरा कर लिया है. सूरज और पृथ्वी के बीच संबंधों और सौरमंडल (Solar System) के कुछ और रहस्यों को समझने के लिए नासा ने सूरज के काफी करीब तक पार्कर सोलर प्रोब (Parker Solar Probe) नाम का स्पेसक्राफ्ट पिछले साल भेजा था, जो सूरज के करीब अपनी दो कक्षाओं को पार करने के बाद तीसरी कक्षा में प्रवेश कर चुका है. सूरज के सबसे करीब पहुंचने का रिकॉर्ड बनाकर सूचनाएं भेजने वाला ये पार्कर प्रोब खास क्यों है? इसके साथ ये भी जानें कि अब तक ये क्या सूचनाएं भेज चुका है और आगे इससे क्या उम्मीदें हैं.

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क्या है इस स्पेसक्राफ्ट का मिशन?
इस स्पेसक्राफ्ट पार्कर प्रोब को भेजने के पीछे तीन प्रमुख उद्देश्य हैं. पहला, सूरज के तेजमंडल को ऊष्मा देने वाली और सोलर विंड (Solar Wind) चलाने वाली एनर्जी (Solar Energy) के बारे में जानना. दूसरा, सोलर विंड के स्रोत पर बनने वाली मैग्नेटिक फील्ड्स यानी चुंबकीय क्षेत्र के पूरे विज्ञान और संरचना को समझना और तीसरा ऊर्जस्वित कणों के वेग और परिवहन के मैकेनिज्म के बारे में जानकारियां जुटाना. नासा के वैज्ञानिकों (NASA Scientists) के मुताबिक ये सब तभी संभव है जब सूरज के बहुत नज़दीक पहुंचकर अध्ययन किया जाए.

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सूरज के कितने पास पहुंचा पार्कर?
पार्कर सोलर प्रोब को 7 साल के सफर में यानी 2025 तक सूरज के इर्द गिर्द अपनी 24 कक्षाओं में गुज़रना है, जिसमें से वह दो कक्षाओं का काम पूरा कर डेटा भेज चुका है. अपने इस मिशन के दौरान पार्कर सूरज से 69 लाख किलोमीटर दूरी तक पहुंचेगा, जो इससे पहले भेजे गए सभी सूर्ययानों के रिकॉर्ड के मुकाबले सात गुना बेहतर होगा यानी सूरज के इतने पास तक कोई स्पेसक्राफ्ट नहीं पहुंच सका है. दो कक्षाएं पूरी कर चुका पार्कर बुध ग्रह की कक्षा तक पहुंच चुका है. इस सफर के दौरान इस स्पेसक्राफ्ट की सर्वाधिक रफ्तार 6 लाख 90 हज़ार किमी प्रति घंटा रहने का दावा है.
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शिकागो यूनिवर्सिटी के भौतिकशास्त्री यूजीन पार्कर, जिनके नाम पर नासा ने सौरयान मिशन का नाम रखा.


पार्कर सोलर प्रोब मिशन के फैक्ट्स
इस प्रोजेक्ट की घोषणा 2009 में हुई थी और इसके लिए डेढ़ अरब अमेरिकी डॉलर का बजट तय किया गया था. पार्कर सोलर प्रोब स्पेसक्राफ्ट को अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के एप्लाइड फिज़िक्स लैब में तैयार किया गया. यह नासा का पहला स्पेसक्राफ्ट है जिसका नाम एक जीवित वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया. शिकागो यूनिवर्सिटी के भौतिकशास्त्री यूजीन पार्कर ने 1950 के दशक से बाहरी सौर मंडल के बारे में कई महत्वपूर्ण सिद्धांत और अध्ययन सौंपे हैं और उन्हीं की थ्योरी के अनुरूप इस मिशन की परिकल्पना की गई.

पार्कर कामयाब हुआ तो ये होगा फायदा
पार्कर सोलर प्रोब के बारे में ताज़ा समाचार यह है कि अपने पिछले दो चरणों के मुकाबले अब ये स्पेसक्राफ्ट 11 दिन के बजाय 35 दिन का ऑब्ज़र्वेशन टाइम लेगा, जिससे ज़्यादा डेटा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. नासा की ओर से कहा गया है कि पार्कर प्रोब दो चरणों का डेटा भेज चुका है, जिसका विश्लेषण किया जा रहा है और इसी साल अब तक की स्टडी को जारी किया जाएगा. इस​ मिशन के ज़रिए सूरज, सौरमंडल और सूरज व धरती के बीच के संबंध के बारे में कई नए महत्वपूर्ण राज़ खुलने की उम्मीद है. अगर मिशन कामयाब रहा तो पृथ्वी के जीवन को प्रभावित करने वाली स्पेस वेदर से जुड़ी घटनाओं को लेकर भविष्यवाणी तक संभव हो सकेगी.

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First published: August 20, 2019, 6:37 PM IST
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