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'लिस्बन गांधी' नाम से मशहूर है पुर्तगाली PM बनने जा रहा गोवा का ये 'ब्राह्मण'

News18Hindi
Updated: October 9, 2019, 8:47 PM IST
'लिस्बन गांधी' नाम से मशहूर है पुर्तगाली PM बनने जा रहा गोवा का ये 'ब्राह्मण'
पीएम नरेंद्र मोदी के साथ पुर्तगाली नेता एंटोनियो कोस्टा.

पुर्तगाल (Portugal) में एंटोनियो कोस्टा प्रधानमंत्री (Prime Minister) बनने जा रहे हैं. जानें भारत से उनका कितना गहरा नाता है और उन्हें महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) जैसा क्यों समझा जाता है.

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  • Last Updated: October 9, 2019, 8:47 PM IST
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पुर्तगाल के राष्ट्रपति (President) ने केयरटेकर प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा (Antonio Costa) को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है. हालांकि कोस्टा के पास पूरा बहुमत नहीं है, लेकिन उनकी सेंटर-लेफ्ट समाजवादी (Socialist) पार्टी चुनावों में अव्वल रही है. सरकार बनाने के समीकरणों पर जारी चर्चा के बीच आपके लिए ये जानना दिलचस्प होगा कि कोस्टा किस तरह भारत के समुद्र किनारे बसे राज्य गोवा के ब्राह्मण परिवार (Goan Brahmin) से ताल्लुक रखते हैं और ये भी कि उन्हें लिस्बन के गांधी (Gandhi of Lisbon) के तौर शोहरत क्यों हासिल है.

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ताज़ा घटनाक्रमों को लेकर पुर्तगाल की जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक कोस्टा वहां गठबंधन (Coalition Government) की सरकार बनाने के लिए चर्चाओं में हैं. लेकिन कोस्टा का प्रधानमंत्री बनना भारत के लिए बड़ी खबर हो सकती है. साल 2017 में उन्हें जब प्रवासी भारतीय सम्मान (Pravasi Bharatiya) से नवाज़ा गया था, तब उन्होंने भारत के साथ अपने गहरे रिश्ते और भारत के साथ पुर्तगाल के रिश्तों (Indo-Portugal Relations) को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया था. गोवा से जुड़ी कोस्टा की जड़ों और उनके कारनामों पर एक नज़र डालिए.

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सामान्य लोगों के साथ मिलनसार और साधारण जीवन शैली के कारण कोस्टा को लिस्बन का गांधी कहा जाता है.


अब भी है गोवा में रिश्तेदारी
पैदाइश के तौर पर देखा जाए तो कोस्टा का जन्म पुर्तगाल में ही हुआ और उनके पिता ऑरलैंडो डी कोस्टा का भी, लेकिन उनके पिता ने बचपन और नौजवानी का काफी समय गोवा में गुज़ारा था. प्रसिद्ध लेखक रहे ऑरलैंडो ने रबींद्रनाथ टैगोर पर निबंधों के साथ ही गोवा के अपने अनुभवों को लेकर किताब भी लिखी थी. 2017 में प्रवासी भारतीय सम्मान से नवाज़े जाने के मौके पर कोस्टा ने कहा था कि वो गोवा के मझगांव में अब तक रहने वाले अपने रिश्तेदारों से मिलने भी गए थे. कोस्टा ने तब ये भी कहा था :
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पिता के गोवा छोड़ने के बाद भी हमारा संपर्क खत्म नहीं हुआ. मुझे भारतीय मूल का होने पर गर्व है और यह भी संयोग है कि भारतीय मूल का कोई शख्स पहली बार किसी यूरोपीय देश का प्रमुख होगा.


ब्राह्मण परिवार से कैसे जुड़ी हैं जड़ें
कोस्टा के दादा और ऑरलैंडो के पिता लुइस अफोंसो का जन्म गोवा में हुआ था. आउटलुक की ​एक रिपोर्ट की मानें तो जब गोवा में पुर्तगाली कॉलोनी बनी थी, उस वक्त अफोंसो का परिवार सारस्वत गौड़ ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखा करता था और पुर्तगाली कॉलोनी बनने के बाद परिवार धर्म परिवर्तन कर कैथोलिक हो गया था.

क्यों कहा जाता है लिस्बन का गांधी?
कोस्टा की सरल और सामान्य जीवन शैली, लोगों के साथ सहज बर्ताव जैसी बातों को लेकर उन्हें गांधीवादी करार दिया जाता है. कहा जाता है कि लिस्बन के मेयर रहने के दौरान वह लोगों के लिए बहुत सरलता से उपलब्ध रहते थे, उनसे बात करते थे. यहां तक कि सामान्य से रेस्तरां में बैठकर सिर्फ 10 यूरो का लंच तक कर लिया करते थे. बड़े पदों पर रहने के बावजूद उन्होंने कभी शाहाना अंदाज़ या शो ऑफ वाला कोई एटिट्यूड नहीं अपनाया. इसके अलावा उनके कामों में भी कुछ लोग गांधीवाद की झलक देखते रहे.

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जब बदनाम बस्ती में कोस्टा ने बनाया था दफ्तर
मेयर रहते हुए कोस्टा ने एक हैरानी वाला कदम उठाते हुए मॉरैरिया के उस इलाके में दफ्तर खोल दिया था, जो ड्रग ट्रैफिकिंग और वेश्यावृत्ति के लिए बदनाम हुआ करता था. यह इलाका बहुत पुराना होने के साथ बदहाल था, लेकिन कोस्टा के इस कदम से न उन्हें सिर्फ मीडिया कवरेज और तारीफ मिली, बल्कि वह लोगों के लगातार संपर्क में रहकर उनकी बेहतरी के लिए काम कर सके. उनके कुछ सालों के कार्यकाल के बाद ही कहा गया कि उस इलाके की सूरत काफी बदली. इस तरह के कदम भी कोस्टा के साथ गांधी का टैग जुड़ने के कारण बने.

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साल 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कोस्टा को प्रवासी भारतीय सम्मान से नवाज़ा गया था.


क्या चालाक राजनीतिक और मैनेजर हैं कोस्टा?
इससे पहले कि कोस्टा के राजनीतिक कौशल के बारे में सूचनाएं लें, यह जानें कि उनके बारे में पुर्तगाल के एक महशूर सोशलिस्ट नेता कार्लोस सीज़र ने क्या कहा था :

एंटोनियो कोस्टा एक राजनेता और जननेता होने के साथ एक ऐसी खासियत रखते हैं, जो हमारे देश के नेताओं में नहीं मिलती और वह है 'दिल रखने वाला पॉलिटिशियन' होना.


मेयर रहते हुए नगर परिषद का भार जब कोस्टा को मिला तो परिषद भारी कर्ज़े में डूबी थी, लेकिन कोस्टा ने अपने कार्यकाल में ये कर्ज़ बहुत कम कर दिया और वो भी टैक्स बढ़ाए बगैर. मॉरैरिया के उस बदनाम इलाके समेत कई इलाकों का कायाकल्प किया. आउटलुक की रिपोर्ट की मानें तो लिस्बन के लोग उन्हें अच्छा मैनेजर और राजनीतिक मानते हुए उन्हें एक ऐसा नेता बताते रहे, जिस पर विश्वास किया जा सकता है. इन तमाम बातों के साथ ही पिछली सरकार की टैक्स बढ़ाने, वेतन घटाने जैसी कई अलोकप्रिय नीतियां भी कारण रहीं कि इस बार कोस्टा और उनके सहयोगी चुनाव जीतकर सरकार बनाने की स्थिति तक पहुंच सके हैं.

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First published: October 9, 2019, 8:47 PM IST
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