आत्मनिर्भर या संस्कारी? भारत की सेक्स टॉएज़ इंडस्ट्री के लिए मौका भी, रोड़ा भी

आत्मनिर्भर या संस्कारी? भारत की सेक्स टॉएज़ इंडस्ट्री के लिए मौका भी, रोड़ा भी
सेक्स टॉएज़ के कारोबार में भारत में कानूनी अड़चनें भी कम नहीं. तस्वीर Pixabay से साभार.

क्या वयस्कों के खिलौनों का Market केवल Metro Cities और महानगरों तक ही सीमित है? क्या Adult Toys के खरीदार देश में सिर्फ पुरुष वर्ग ही है? क्या सेक्स टॉएज़ का उद्योग भारत में बहुत छोटा या सीमित Industry है? ऐसे ही सवालों के जवाबों में जानिए हैरान करने वाले आंकड़े और दिलचस्प फैक्ट्स.

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Coronavirus का कहर टूटा, पूरे देश ने Lockdown झेला, प्रवासियों ने पलायन किया और अर्थव्यवस्था हांफती दिखी... इन हालात को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 'लोकल के लिए वोकल' होने का मंत्र देकर 'आत्मनिर्भर भारत' (Aatmnirbhar India) बनाए जाने का सुनहरा मौका बताया. अब देश में एक बड़ी और गुपचुप उभरती हुआ एक उद्योग है 'सेक्स टॉएज़' का, जो आत्मनिर्भरता के मंत्र से उत्साहित है तो दूसरी तरफ, 'संस्कारी भारत' के नारों से पसोपेश में भी.

China के मुकाबले में ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रही आबादी जल्द ही भारत को दुनिया में सबसे बड़ा देश बना देगी. यही साथ ही दुनिया को कामसूत्र सिखाने वाले देश में सेक्सुअलिटी को लेकर चर्चाएं भी बढ़ी हैं और अलग अलग तरह से कारोबार भी, लेकिन अब भी नियम कायदों से सेक्स टॉएज़ के उद्योग को जूझना पड़ता है. फिर भी इस उद्योग के आंकड़े और भविष्य की योजनाएं चौंकाने वाली हैं.

क्या इसी साल 'आत्मनिर्भर' हो रहा है ये उद्योग?
एडल्ट टॉएज़ के प्रमुख ऑनलाइन स्टोर IMbesharam.com के संस्थापक राज अरमानी के शब्दों में 'जबसे सरकार के इस मंत्र को सुना है, तबसे महसूस हुआ है कि अब हमारे कारोबार को गति मिलेगी.' भारत में एडल्ट टॉएज़ की बिक्री तो होती है लेकिन ज़्यादातर माल आयात किया हुआ होता है. मिंट की हालिया रिपोर्ट की मानें तो अब अरमानी मोदी के विचार के अनुरूप कस्टमाइज़्ड टॉएज़ भारत में ही बनाने के लिए उत्साहित हैं.
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देश में बिक रहे ज़्यादातर सेक्स टॉयज़ आयात किए जाते हैं. फाइल फोटो.




अरमानी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी साल दिसंबर तक स्टोर पुरुषों व महिलाओं के लिए मैस्टर्बेटर लॉंच करेगा, जो न सिर्फ 'मेड इन इंडिया' होंगे, बल्कि सिर्फ भारत के लिए ही होंगे.

भारतीय समाज और परंपरा का नया रूप!
न्यूज़18 ने पहले आपको बताया था कि किस तरह लॉकडाउन के दौरान पॉर्न वेबसाइटों पर एक्टिविटी बढ़ी थी. यह हमारे समाज का आधुनिक बदलाव है कि अब एडल्ट टॉएज़ भी युवाओं के जीवन में शामिल हैं. अरमानी के मुताबिक वो जो मेड इन इंडिया टॉएज़ लॉंच करने जा रहे हैं, उन्हें कामसूत्र की पुरानी माइथोलॉजी को नए ढंग से पेश किया जाएगा. साथ ही, युवाओं की सोच को ध्यान में रखते हुए मैस्टर्बेटर के नाम 'समाज' और 'संस्कार' रखे गए हैं.

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कैसे ये आत्मनिर्भरता होगी चीन को करारा जवाब?
अरमानी की कंपनी के साथ ही दैट्सपर्सनल, लवट्रीट्स, इट्सप्लेज़र, शायकार्ट, प्रिवी प्लेज़र्स और किंकपिन जैसी कंपनियां इस कारोबार में भारत में बड़ी खिलाड़ी हैं. इसके बावजूद अब तक ज़्यादातर टॉएज़ चीन से आयात होते हैं. यही नहीं, मिंट की ही रिपोर्ट के मुताबिक चीन दुनिया के सेक्स टॉएज़ कारोबार में शामिल 70 फीसदी टॉएज़ का उत्पादन करता है. ऐसे में अगर भारत में यह इंडस्ट्री मेड इन इंडिया की तरफ बढ़ती है तो 'बॉयकॉट चाइना' जैसे ताज़ा नारों और नीतियों को भी बल मिलता है.

देश में कितनी बड़ी है ये इंडस्ट्री?
दकियानूसी या पारंपरिक सोच रखने वालों को अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल हो सकता है कि ये इंडस्ट्री भारत में कितनी बड़ी हो गई है. द प्रिंट की रिपोर्ट की मानें तो साल 2020 में इस उद्योग का कुल कारोबार 8700 करोड़ रुपए तक होने का अनुमान है. वहीं, डिकोडिंग की रिपोर्ट में अनुमान है कि इस साल भारत में यह कारोबार 1.6 अरब डॉलर यानी 120 अरब रुपए से ज़्यादा का होगा. दुनिया भर में यह इंडस्ट्री इस साल 29 अरब डॉलर का कारोबार कर सकती है.

देश में कहां तक फैल चुकी है इंडस्ट्री?
संस्कारी भारत के पक्षधरों को यह तथ्य भी चौंका सकता है कि एडल्ट टॉएज़ की पहुंच सिर्फ मुंबई या दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों की बात नहीं रही. खबरों की मानें तो ThatsPersonal का उदाहरण है कि इसके खिलौनों की बिक्री का 48% हिस्सा मेट्रो से छोटे शहरों, 40% हिस्सा टियर2 यानी आम शहरों और 12% हिस्सा टियर3 यानी छोटे शहरों तक पहुंच चुका है. इसी तरह अरमानी स्टोर 37% बिक्री मेट्रो से छोटे शहरों में करती है.

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महिलाओं के बीच सेक्स टॉयज़ का ट्रेंड देश में बढ़ रहा है. (प्रतीकात्मक चित्र Pixabay से साभार)


इन टॉएज़ के खरीदार कौन हैं?
संस्कारी जवाब तो यही होगा कि लड़के और आदमी ही होंगे. लेकिन दिव्या चौहान की कंपनी ItspleaZure के रिकॉर्ड के हवाले से द प्रिंट की रिपोर्ट की मानें तो 75% पुरुष खरीदारी करते रहे हैं लेकिन अब ट्रेंड बदल रहे हैं और पुरुष व महिला खरीदारों को अनुपात 50:50 का होता नज़र आ रहा है. झटका देने वाला एक फैक्ट यह भी है कि महिलाओं के लिए सेक्स टॉएज़ की खरीदारी छोटे शहरों और कस्बों तक हो रही है.

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क्या देश में कानूनी हैं एडल्ट टॉएज़?
आईपीसी की सेक्शन 292 के हिसाब से अश्लील चीज़ों या प्रकाशनों पर प्रतिबंध है. लेकिन इस इंडस्ट्री को ऐसे ही पुराने कानूनों से जूझना पड़ रहा है. फिर भी, देश में शब्दों के खेल से कानूनों में गुंजाइशें तलाशी जाती हैं और कारोबार चलता है. एक और रिपोर्ट कहती है कि इस कारोबार में हर साल 100% का उछाल है और 35% तक मार्जिन, इसके बावजूद कानूनी दिक्कतों के चलते निवेश और विकास के रास्ते पूरी तरह खुले नहीं हैं.

देश की पसंद हैं ये टॉएज़, मानें या नहीं
कोई माने या न माने भारत के मिलेनियल्स एडल्ट टॉएज़ को लेकर बेहद उत्साहित हैं. डिकोडिंग की रिपोर्ट में सर्वे के हिसाब से बताया गया है कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश वो राज्य हैं, जहां के लोग सबसे ज़्यादा सेक्स टॉएज़ खरीदते हैं. अब 'संस्कार' और भारतीय संस्कृति की दुहाई देने वाले मानें या न मानें, लेकिन सच यही है कि देश में ट्रेंड बदले हैं. अंतत: ये इंडस्ट्री हसरत से मोदी के मंत्र की तरफ देख रही है.
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