50 साल पहले छेड़ी गई थी तीन तलाक के ख़िलाफ़ पहली बार जंग

आज से 50 साल पहले एक एंग्री यंग सेक्युलिरीस्ट ने ट्रिपल तलाक को खत्म करने के लिये संघर्ष की शुरुआत की थी

Fahad Sayeed | News18India
Updated: July 30, 2019, 7:07 PM IST
50 साल पहले छेड़ी गई थी तीन तलाक के ख़िलाफ़ पहली बार जंग
आज से 50 साल पहले एक एंग्री यंग सेक्युलिरीस्ट ने ट्रिपल तलाक को खत्म करने के लिये संघर्ष की शुरुआत की थी
Fahad Sayeed | News18India
Updated: July 30, 2019, 7:07 PM IST
तीन तलाक़ को अवैध करार देने वाला ट्रिपल तलाक़ बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया. इस बिल के पास हो जाने के बाद अब ट्रिपल तलाक दिया जाना गैरकानूनी होगा और इसमें सज़ा का प्रावधान होगा. इस बीच दशकों पुरानी एक कहानी का ज़िक्र ज़रूरी है. कम लोग जानते हैं कि 50 साल पहले एक सेक्युलरिस्ट ने ट्रिपल तलाक को खत्म करने के लिए संघर्ष की शुरुआत की थी. लेकिन, सच यह है कि तीन तलाक के पहले आंदोलनकारी को भुला दिया गया है.

पढ़ें : तीन तलाक बिल के पास होने के पीछे ये मुस्लिम महिला रही अहम

कौन था ये शख्स और क्या हैं उसकी संघर्ष गाथा
इस आंदोलनकारी का नाम था हमीद दलवाई जिसने 60 और 70 के दशक में तीन तलाक के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी. हमीद ने ही मुस्लिम महिलाओं को ये हिम्मत दी की तलाक-ए-बिद्दत यानी इंस्टेंट तलाक के खिलाफ घरों से बाहर निकलें. हमीद ने महिलाओं को अपने लिए आवाज़ उठाने के लिए जागरूक किया था.

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1966- जब पहली बार तीन तलाक के खिलाफ़ उठी आवाज़
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1966 में मुंबई में विधानसभा के पास एक मार्च निकाला गया. महिलाओं की हाथों में ट्रिपल तलाक खत्म करने को लेकर बैनर और पर्चे थे जिसका नेतृत्व कर रहे थे हमीद दलवाई. ट्रिपल तलाक के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन का ये पहला मामला था.

इस मार्च में केवल 7 महिलाएं थीं, जो तीन तलाक की शिकार हुई थी. महज 7 महिलाओं के मोर्चे की ये खबरे जब अगले दिन अखबारों की सुर्खियां बनीं तो मुस्लिम समाज में खलबली मची. रातों रात हमीद दलवाई सुर्खियों में आ गए.

हमीद का जन्म 29 दिसंबर, 1932 को महाराष्ट्र के कोंकण में हुआ था. इनका ताल्लुक मध्यमवर्गीय परिवार से था, जो आम मुस्लिम परिवारों की तरह धार्मिक रुढियों से बंधा हुआ था. हमीद शुरू से ही सामाजिक कुरीतियों का विरोध करते थे.


जब पिता ने चौथी शादी की तो हमीद नाराज़ होकर मुंबई चले गए और समाज कल्याण से जुड़े आंदोलनों में हिस्सा लेने लगे. तीन तलाक मुद्दे से उस समय रुबरु हुए जब हमीद के एक दोस्त की बहन को 18 साल की उम्र में ही तलाक मिला था. बस यही से हमीद दलवाई ने तीन तलाक के खिलाफ जंग छेड़ दी.

हमीद ने देश के संविधान को पर्सनल लॉ पर तरजीह दी. हमीद ने सबसे पहले मुस्लिम महिलाओं को कानूनी जानकारी देनी शुरु की ताकि औरतें अपने हक़ को लेकर जागरुक बन सकें. हमीद ने मुस्लिम सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका मकसद था तीन तलाक को खत्म करके महिलाओं को समान अधिकार देना.

Hamid Dalwai, Triple Talaq, Muslim Man Who Started The Revolution Against , talaq- e - biddat

जब पहली बार मुस्लिम महिलाओं  तीन तलाक के खिलाफ आवाज़ उठाई
हमीद की अगुवाई में देश में पहली बार मुस्लिम महिलाओं ने बेखौफ होकर तीन तलाक के खिलाफ बोला. 1970 में मुस्लिम महिलाओं ने एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिये तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाई.

बौखलाए विरोधी भी हमीद की इस मुहिम के विरोध में उतर पड़े, इसके बाद हमीद के खिलाफ आंदोलन शुरु हो गए. उनकी सभाओं में पथराव तक किया जाने लगा साथ ही, कई बार उनपर जानलेवा हमला भी हुआ. हमीद की ये पहल मौलवियों को रास नहीं आई जिसका खामियाजा हमीद के साथ उनके परिवार को भुगतना पड़ा.

आखिरकार रंग लाई हमीद दलवाई की मुहिम
विरोध और प्रदर्शन के दौर में हमीद दलवाई की मुहिम रंग लाई और बात दिल्ली तक पहुंच गई. उस समय राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी इस मुहिम की तारीफ की. तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तो यहां तक कह दिया था कि हिंदू समाज को भी एक दलवाई चाहिए.

मौत के बाद मुहिम की कमान बीवी ने संभाल ली
1977 में हमीद की किडनी की गंभीर बीमारी से मौत हो गई. हमीद दलवाई की मौत के बाद भी आंदोलन थमा नहीं. उनकी बीवी मेहरुनिसा ने मुस्लिम सत्यशोधक समाज के काम को आगे जारी रखा.

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First published: July 30, 2019, 7:05 PM IST
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