भारतीय राजनीति में कैसे गढ़ा गया आयाराम-गयाराम का मुहावरा?

कर्नाटक में चल रही राजनीतिक उठापटक के संदर्भ में जानें कि कैसे कभी हरियाणा इस तरह के राजनीतिक नाटक के लिए चर्चाओं में रहा था. हरियाणा में भजनलाल कैसे अपने दर्जनों विधायकों को लेकर रातों रात दूसरी पार्टी में चले गए थे.

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Updated: July 11, 2019, 9:09 PM IST
भारतीय राजनीति में कैसे गढ़ा गया आयाराम-गयाराम का मुहावरा?
प्रतीकात्मक तस्वीर.
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Updated: July 11, 2019, 9:09 PM IST
कर्नाटक में कुर्सी और राज्य सत्ता को लेकर जो राजनीतिक उठापटक चल रही है, उससे आप वाकिफ हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तरह की उठापटक और सियासी ड्रामे की जड़ कहां है? कर्नाटक से पहले विधायकों की जोड़ तोड़ के साथ सरकारें गिराने और बनाने का सिलसिला हरियाणा की याद दिलाता है, जहां 40 साल पहले इस तरह के नाटक की शुरूआत हुई थी. और, तभी 'आया राम गया राम' का मुहावरा भारतीय राजनीति में गढ़ा गया था. राजनीति के जानकार या पिछली पीढ़ी के लोग इन किस्सों से वाकिफ हैं, लेकिन अगर आप नई पीढ़ी के हैं, तो ये दिलचस्प कहानी आपको ज़रूर जानना चाहिए.

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बात करीब 40 साल पहले की है, जब 1979 में हरियाणा में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल था. जनता पार्टी से जुड़े चौधरी देवीलाल की हरियाणा में सरकार थी, लेकिन राजनीतिक संकट था और ऐसे में राज्य सरकार में मंत्री रहे भजनलाल ने देवीलाल की आंखों से सुरमा चुराते हुए न केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी हथिया ली थी, बल्कि पार्टियों और विधायकों की ऐसी उठापटक की थी, जो इतिहास में दर्ज हो गई. जानें उस कहानी के खास पड़ाव.

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भजनलाल ने तोड़े थे नज़रबंद विधायक
चौधरी देवीलाल को अपनी सरकार संकट में नज़र आ रही थी, इसलिए उन्होंने अपने 40 विधायकों को नज़रबंद कर लिया था और घर को किला बना दिया था. विधायकों को बाहर जाने की इजाज़त नहीं थी और बंदूक की नोक पर बंद विधायकों से उनके परिवार को मिलने के लिए भी खास इजाज़त लेना होती थी. ऐसे में भजनलाल चूंकि मंत्री थे, तो उनका वहां आना जाना रोका नहीं जा सका. भजनलाल ने कैद विधायकों के परिवारों से खुसर फुसर कर अपने प्रपोज़ल विधायकों तक पहुंचाए.

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भजनलाल सिर्फ 8 साल के राजनीतिक करियर में सीएम बन गए थे.

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दो खेमे बन चुके थे, भजनलाल और देवीलाल. बताया जाता है कि उस किले में कैद विधायक रात भर जागते और टहलते रहते थे, यही सोचकर कि किस खेमे में जाएं. आखिर भजनलाल के प्रस्ताव ज़्यादा लालच देने वाले थे और 40 विधायक कुछ ही समय में उनके साथ हो गए. भजनलाल ने देवीलाल की सरकार गिरा दी और खुद सीएम बन बैठे.

घूस के तौर पर घी और ऊंट
भजनलाल के बारे में कहा जाता है कि उनके पास खास कला थी कि वो जल्दी भांप जाते थे कि किसी की ज़रूरत क्या है. देवीलाल की लोकप्रियता के आगे भजनलाल की यही कला बीस साबित हुई थी कि वो लोगों को लालच देना खूब जानते थे. किसी को सरकारी नौकरी, तो किसी को प्लॉट तो किसी को कैश, सबकी ज़रूरत के मुताबिक भजनलाल के पास हर रास्ता था. राजनीति में आने से पहले वो घी बेचने के धंधे से जुड़े थे और उनकी कुशलता साबित होती है कि वो सिर्फ 8 साल के राजनीतिक करियर में सीएम बन गए थे.

'बड़े लोगों' को घूस देने के भजनलाल के तरीके अनोखे थे. कभी उन्होंने मोरारजी देसाई के पास घी के पीपे भिजवाए तो कभी वरुण गांधी के जन्म पर संजय गांधी के पास सोने का पत्तर चढ़ा ऊंट भिजवाया. इसी तरह बनाए संबंधों से भजनलाल ने आगे भी उठापटक जारी रखी.

ऐसे हुआ था ऐतिहासिक दलबदल
भजनलाल जनता पार्टी से जुड़े थे और इमरजेंसी के बाद जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी, तो वो देवीलाल सरकार का तख्तापलट कर खुद मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए थे. इसके बाद 1980 में केंद्र में तख्तापलट हुआ और फिर इंदिरा गांधी सरकार बनी. भजनलाल ने फौरन समझ लिया कि जनता पार्टी का जहाज़ डूब गया और वो फौरन अपने 40 विधायकों को लेकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे. देश ने पहली बार इतना बड़ा दलबदल देखा था.

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देवीलाल लोकप्रियता और भाषण कला में भजनलाल से आगे माने जाते थे.


इस दलबदल के बाद भी हरियाणा में राजनीतिक अस्थिरता जारी रही और 90 के दशक के अंत तक यही चलता रहा कि कभी देवीलाल की सरकार बनती, कभी भजनलाल की. दूसरे नेताओं और मीडिया में बाद में दोनों लालों के बीच पॉलिटिकल फिक्सिंग भी करार दिया गया.

'आया राम गया राम' कहावत ऐसे चली
जब पहली बार भजनलाल ने हरियाणा में तख्तापलट किया था, उस दौरान एक विधायक थे गया लाल, जो भजनलाल खेमे के करीबी माने जाते रहे. तब आरोप लगे थे कि कई विधायकों, जजों और सरकारी अधिकारियों को दिल्ली, चंडीगढ़ और पंचकूला में प्लॉट बांटे जाने के आरोप लग रहे थे. गया लाल को भी दो प्लॉट दिए जाने के आरोप थे. ये वही गया लाल थे, जिन्होंने राजनीतिक उठापटक के दौरान 15 दिनों के भीतर तीन बार पार्टी बदल ली थी.

इस विधायक के दलबदल के चलते ये कहावत राजनीतिक गलियारों में गूंजी और भजनलाल के कारनामे चर्चित होने लगे थे. सत्ता के समीकरण साधने वाले भजनलाल के बारे में एक सरकारी अधिकारी ने इंडिया टुडे से कहा था कि भजनलाल भगवान को ठग सकने का हुनर रखते थे. बहरहाल, ये कहानी सियासत में कुर्सी के लिए हर संभव रास्ता खोज निकालने, हर कानून में लूपहोल खोज लेने और हर नैतिकता को दरकिनार कर देने की कहानी है, जो इन दिनों कर्नाटक में लाइव देखी जा सकती है.

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