आखिर क्या होता है हवाला, जिसके जरिये पैसा उगाहते हैं हाफिज़ सईद जैसे आतंकी

'हवाला' शब्द से आप वाकिफ़ हैं, लेकिन हवाला कारोबार कैसे होता है और कैसे होता रहा है? इस बारे में आप कितना जानते हैं? कैसे हवाला कारोबारी अब इंटरनेट के ज़रिए खोज रहे हैं आसान रास्ते? हवाला ट्रेडिंग के बारे में ज़रूरी बातें जानें.

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Updated: July 21, 2019, 2:49 PM IST
आखिर क्या होता है हवाला, जिसके जरिये पैसा उगाहते हैं हाफिज़ सईद जैसे आतंकी
आतंकी हाफिज़ सईद. फाइल फोटो.
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Updated: July 21, 2019, 2:49 PM IST
जमात-उद-दावा प्रमुख हाफ़िज़ सईद को जैसे ही पाकिस्तान ने गिरफ्तार किया, कुछ ही दिनों में भारत ने सईद के एक प्रमुख सहयोगी के खिलाफ चार्जशीट दायर करते हुए दावा किया कि लश्कर ए तैयबा के नेता रहे सईद ने भारत में हवाला कारोबार का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया. भारत की नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी एनआईए ने ये भी कहा कि सईद ने जो हवाला नेटवर्क भारत में बनाया, उससे जुड़े कई अहम सबूत एजेंसी के पास हैं. इन खबरों के सिलसिले में क्या आप जानते हैं कि हवाला नेटवर्क क्या होता है और रकम एक देश से दूसरे देश में हवाला के ज़रिए कैसे और क्यों भेजी जाती है?

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असल में, हवाला का इतिहास बहुत पुराना है और माना जाता है कि दक्षिण एशिया और खासकर भारत में ही इस तरह के कारोबार की शुरुआत तब हुई थी, जब पश्चिम के पास बैंकिंग सिस्टम जैसा कोई कन्सेप्ट तक नहीं था. बैंकिंग और फाइनेंस के क्षेत्र में बेतहाशा तरक्की के बाद अब भी हवाला के ज़रिए पैसों का लेन-देन होता है, लेकिन अब ये तरीक़े क़ानूनी नहीं बल्कि अपराध की श्रेणी में हैं.

पहले जानें कि क्या होता है हवाला?

हवाला शब्द का अर्थ 'भरोसे' से लिया जाता है. भारत में पहले समय में इसे हुण्डी के नाम से भी जाना जाता था और दुनिया के कई देशों में अब भी इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इसे वर्तमान समय में 'अंडरग्राउंड बैंकिंग' या 'अवैध बैंकिंग' का नाम भी दिया जाता है. ये सिस्टम ऐसा है, जिसमें कैश एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं होता, लेकिन एक ग्राहक एक जगह से अपना पैसा दूसरी जगह किसी को भी भेज सकता है.

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हवाला कारोबारी मोबाइल फोन और इंटरनेट तकनीक के इस्तेमाल के और उपाय खोज रहे हैं.

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ऐसे चलता है हवाला नेटवर्क
वास्तव में कैश को बगैर ट्रांसफर किए, ट्रांज़ैक्शन किया जाना इस कारोबार की खासियत है. इस पूरे नेटवर्क में कई हवालादार या हवाला डीलर होते हैं. ऐसे समझें कि आप मुंबई में हैं और अपने किसी दोस्त को यूएई में एक रकम भेजना चाहते हैं. तो, ऐसे में हवाला ​नेटवर्क के ज़रिए आप सबसे पहले मुंबई के एक हवाला ब्रोकर के पास जाएंगे. जो रकम आप यूएई भेजना चाहते हैं, वो रकम उस ब्रोकर को देंगे. बदले में, ब्रोकर आपको एक कोड देगा. ये सीक्रेट कोड लेकर आपका दोस्त यूएई के हवाला ब्रोकर के पास जाएगा. कोड बताते ही आपके दोस्त को आपकी भेजी रकम मिल जाएगी, बस इसमें से कुछ कमीशन वो यूएई का ब्रोकर काट लेगा.

इस नेटवर्क के ज़रिए करंसी एक्सचेंज भी हो जाता है यानी यहां से आप रुपये में रकम देते हैं और दूसरे देश में वहां की करंसी के हिसाब से रकम का भुगतान हो जाता है. तो, ऐसे काम करता है हवाला नेटवर्क. और पिछले कुछ अरसे से मोबाइल फोन पर भुगतान की सुविधा से ये और भी आसान होता जा रहा है. हालांकि कई देशों में डेबिट या क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग के ज़रिए एक सीमा तक ही और केवल लोकल बैंकिंग की सुविधाएं हैं. फिर भी, हवाला कारोबारी इस तकनीक के इस्तेमाल के और उपाय खोज रहे हैं.

दूसरी तरफ, हवाला नेटवर्क में अब भी हिसाब किताब रखा जाता है और भेजी गई या डिलीवर की गई रकम की पूरी किताब तैयार की जाती है, ताकि डीलिंग बराबर चलती रहे.

क्यों गैरकानूनी है हवाला कारोबार?
बैंकिंग और फाइनेंस की कई औपचारिक और कानूनी प्रणालियों के आ जाने के बाद दशकों पहले हवाला कारोबार को गैर कानूनी घोषित कर दिया गया क्योंकि इस कारोबार में रकम, रकम भेजने वाले, रकम पाने वाले के बारे में ज़रूरी और ज़्यादा जानकारियां जुटाना टेढ़ी खीर रहा. ये भी हुआ कि इस कारोबार में चूंकि कोई दस्तावेज़ी हिसाब नहीं होता इसलिए रकम का दुरुपयोग आतंकवाद या गैरकानूनी धंधों के लिए भी होता है.

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दुनिया के कई देशों में हवाला गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है.


भारत समेत दुनिया के कई देशों में हवाला गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है. भारत में फेमा यानी फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट 2000 और पीएमएलए यानी प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉंड्रिंग एक्ट 2002 जैसे दो प्रमुख कानूनों के तहत इस नेटवर्क और कारोबार को गैरकानूनी माना जा चुका है.

क्यों होता है हवाला कारोबार?
गैरकानूनी होने के बावजूद लोग अब भी हवाला के ज़रिए रकम के लेन देन में क्यों रुचि लेते हैं? या क्यों इसकी ज़रूरत दरकार होती है? इसके पीछे कुछ बड़े कारण हैं.
1. हवाला के ज़रिए रकम भेजने में कानूनी ढंग से रकम भेजने से कम कमीशन देना पड़ता है.
2. इस नेटवर्क के ज़रिए लेन देन में कोई आईडी या इनकम संबंधी दस्तावेज़ों की ज़रूरत नहीं होती.
3. हवाला के ज़रिए होने वाले लेन देन में न तो असली पहचान और न ही रकम के स्रोत को लेकर कोई पूछताछ होती है.
4. यानी अपनी नाजायज़ संपत्ति या ब्लैक मनी को इस नेटवर्क के ज़रिए आसानी से कहीं और ट्रांसफर किया जा सकता है.

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First published: July 21, 2019, 2:18 PM IST
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