कॉर्पोरेट कल्चर में मोटे हो रहे हैं कर्मचारी लेकिन समोसा कैसे बना विलन?

एक तरफ पीएम मोदी (PM Modi) फिटनेस की मुहिम छेड़ चुके हैं, दूसरी तरफ फिटनेस का कारोबार (Fitness Business) देश में बढ़ रहा है तीसरी हकीकत ये है कि भारतीय कर्मचारियों की (Indian Employees) कमर और तोंद का साइज़ भी बढ़ रहा है.

News18Hindi
Updated: September 4, 2019, 9:50 PM IST
कॉर्पोरेट कल्चर में मोटे हो रहे हैं कर्मचारी लेकिन समोसा कैसे बना विलन?
आप शाम के नाश्ते में क्या खाते हैं?
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Updated: September 4, 2019, 9:50 PM IST
भारत में एक तरफ फिटनेस उद्योग (Fitness Industry) बढ़ रहा है और दूसरी तरफ लोगों का मोटापा (Obesity) भी! ये विरोधाभास है लेकिन हकीकत यही है. एक फिटनेस सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है ​कि कामकाजी लोग अपनी लाइफस्टाइल (Lifestyle) और काम के तौर तरीकों (Work Culture) के चलते मोटापे के शिकार हैं. डायबिटीज़ (Diabetes) भारत में महामारी बन चुकी है और ऐसे में ये सर्वे कितना चौकन्ना करने वाला है? ये भी जानिए कि इस सर्वे ने कैसे वर्क कल्चर में समोसे को विलन घोषित किया है और किस सेक्टर के कर्मचारियों (Corporate Executives) के सेहत को लेकर क्या ट्रेंड्स दिख रहे हैं.

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तनावपूर्ण जॉब्स (Stressful Jobs), सुस्त लाइफस्टाइल और खाने पीने की बीमारू आदतों (Unhealthy Eating Habits) के कारण कॉर्पोरेट कर्मचारी ओवरवेट हो रहे हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में फिट इंडिया मूवमेंट (Fit India Movement) का आगाज़ किया था और अब हेल्थ और फिटनेस (Health & Fitness) एप हेल्दीफाईमी की एक ताज़ा रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि दो तिहाई कर्मचारियों का बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई (BMI) 25 से ज़्यादा पाया गया जबकि 24.9 से कम बीएमआई को सेहतमंद माना जाता है. जानिए कि इस मोटापे के पीछे क्या कहानी है और इसके खतरे क्या क्या हैं.

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किस सेक्टर के कर्मचारी ज़्यादा चलते हैं?
इस हेल्थ एप ने 'कॉर्पोरेट इंडिया फिटनेस रिपोर्ट' जारी की है जिसके मुताबिक कॉर्पोरेट के कई सेक्टरों के कर्मचारियों पर स्टडी की गई और देखा गया कि फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर और मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के कर्मचारियों की लाइफस्टाइल सबसे कम सेहतमंद है. कंज़्यूमर गुड्स और एफएमसीजी सेक्टर के कर्मचारी ज़्यादा एक्टिव होते हैं और फाइनेंशियल सेक्टर के कर्मचारियों की तुलना में हर रोज़ कम से कम 1 हज़ार से कदम ज़्यादा चलते हैं.

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भारतीय कर्मचारी फिटनेस के लिए स्टेप काउंट करने से ही संतुष्ट हो जाते हैं.

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वॉकिंग है सबसे पसंदीदा विकल्प
इस रिपोर्ट की मानें तो भारतीय कर्मचारी स्टेप काउंट करने से ही संतुष्ट हो जाते हैं. सर्वे में 60 हज़ार कर्मचारियों से डेटा जुटाया गया और ज़्यादातर पुरुषों व महिलाओं दोनों ने ही सेहत की एक्टिटी के तौर पर वॉकिंग को पसंदीदा विकल्प माना. इस सर्वे को तैयार करने के लिए 20 शहरों के 21 से 60 की उम्र तक के कॉर्पोरेट कर्मचारियों के खानपान और एक्टिवटीज़ पर नज़र रखी गई.

तो किसकी आदतें हैं कैसी?
एफएमसीजी सेक्टर के कर्मचारियों ने हेल्दी डाइट के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया और उनका प्रोटीन इनटेक बाकी से ज़्यादा रहा. रिटेल सेक्टर के कर्मचारियों में फैट वाले खानपान की आदतें ज़्यादा देखी गईं. क्वार्ट्ज़ ने इस एप की रिपोर्ट पर आधारित खबर में लिखा है कि पूर्वी भारतीय यानी कोलकाता के लोग सबसे ज़्यादा प्रोटीन का सेवन करते हैं और जो लोग मेट्रो शहरों में नहीं रहते, वो ज़्यादातर फैट वाले भोजन का सेवन करते हैं.

सबसे खतरनाक है शाम का नाश्ता
भारतीय कर्मचारियों के बीच शाम को ब्रेक लेने की एक कॉमन आदत देखी जाती है और इस ईवनिंग स्नैक्स में वो जिस तरह का खानपान करते हैं, रिपोर्ट के मुताबिक वो दिन भर में सबसे ज़्यादा नुकसानदायक मील साबित हो सकता है. ईवनिंग स्नैक्स को लेकर रिपोर्ट में कहा गया कि इस समय के ब्रेक में सबसे कम प्रोटीन और सबसे ज़्यादा फैट्स का सेवन कर्मचारियों ने किया. इसका साफ मतलब यही है कि चाय समोसे वाले ब्रेक्स कॉर्पोरेट कर्मचारियों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं.

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जंक फूड और फास्ट फूड के ब्रेक्स कॉर्पोरेट कर्मचारियों की सेहत के लिए नुकसानदायक पाए गए.


 

डायबिटीज़ के खतरनाक आंकड़े
मोटापे का सीधा जुड़ाव ब्लड प्रेशर और दिल से संबंधित रोगों के साथ डायबिटीज़ जैसी खतरनाक बीमारी से है. भारत में डायबिटीज़ को एक महामारी के तौर पर देखा जा रहा है. एक ताज़ा शोध के मुताबिक दुनिया भर में 2030 तक टाइप 2 डायबिटीज़ के वयस्क मरीज़ 51 करोड़ से ज़्यादा हो जाएंगे. और ऐसे कुल मरीज़ों की आधी आबादी सिर्फ तीन देशों में होगी यानी चीन में करीब 13 करोड़, भारत में करीब 9.8 करोड़ और यूएसए में करीब सवा तीन करोड़.

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First published: September 4, 2019, 8:39 PM IST
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