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महात्मा के साथ मुलाकात के बाद चार्ली चैपलिन ने ऐसे की थी गांधीगीरी

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: October 7, 2019, 8:18 PM IST
महात्मा के साथ मुलाकात के बाद चार्ली चैपलिन ने ऐसे की थी गांधीगीरी
महात्मा गांधी और चार्ली चैपलिन की ऐतिहासिक तस्वीर.

#Gandhi@150 : महात्मा गांधी के साथ चार्ली चैपलिन (Charlie Chaplin) की मुलाकात इसलिए ऐतिहासिक (Historic Meeting) रही कि दोनों ने एक दूसरे को प्रभावित किया था. इस मुलाकात और उसके असर की पूरी कहानी.

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  • Last Updated: October 7, 2019, 8:18 PM IST
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देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के मुरीदों की कमी नहीं थी. सामाजिक, राजनीतिक और जीवन से जुड़े महात्मा गांधी के विचारों के प्रशंसकों और अनुयायियों में उनके समय में ही दुनिया के कई राजनीतिज्ञ और आंदोलनकारी ही नहीं बल्कि विज्ञान और कला जगत की ​हस्तियां (Celebrities) तक शामिल थीं. भारत की आज़ादी के लिए (Freedom of India) अपने विचारों पर आधारित अभियान चला रहे महात्मा गांधी ने दुनिया के सबसे महान फिल्मकारों (Great Filmmakers) में शामिल चार्ली चैपलिन से मुलाकात के लिए मना कर दिया था, लेकिन फिर मुलाकात की. क्यों? ये भी जानें कि इस मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे से कैसे प्रभावित हुए.

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अगर भगवान ने कभी मुझे पश्चिम (Western World) भेजा तो मैं वहां के लोगों के दिलों में उतरना चाहूंगा, वहां के युवाओं से बातचीत करना चाहूंगा और चाहूंगा कि शांति और किसी भी कीमत पर सच चाहने वाले कोमल हृदय के लोगों से मिलने का सौभाग्य हासिल हो.


महात्मा गांधी की एक समग्र पुस्तक में उनका कहा यह वाक्य लिखा हुआ है, लेकिन 1931 में जब गांधी इंग्लैंड के प्रवास पर थे तब उन्होंने चार्ली चैपलिन से मिलने से मना कर दिया था. अस्ल में गांधी ने उस समय के प्रसिद्ध कलाकार चार्ली का नाम नहीं सुना था और जब उन्हें बताया गया कि प्रसिद्ध अभिनेता चार्ली मिलना चाहते हैं, तो उन्होंने पहली प्रतिक्रिया में नकार दिया. गांधी जी कम से कम ये बात जानते थे कि उनके कई प्रशंसक दुनिया में हैं और कई लोग निजी मुलाकात का समय चाहा करते थे.

फिर, उनके साथ के लोगों में कुछ ऐसे लोग थे जो चार्ली के बारे में कुछ और जानकारियां रखते थे. जब एक विश्वस्त ने गांधी जी से कहा कि चार्ली मशहूर हैं और वह भारत के लिए उनके अभियान को लेकर हमदर्द साबित हो सकते हैं, तब गांधी जी ने हामी भरी और कहा कि वह उनसे मिल सकते हैं.

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चार्ली ने पूछा था : आप मशीनों के खिलाफ क्यों हैं?
लंदन के ईस्ट एंड के एक फ्लैट में गांधी जी ठहरे हुए थे. जब चार्ली उनसे मिलने गए तो वह नर्वस थे. ऐसा खुद चार्ली ने बाद में लिखा था और याद किया था वह गांधी जी से मिलने जाते वक्त रिहर्सल कर रहे थे कि उन्हें कैसे बात करनी थी. मुलाकात हुई और चार्ली ने गांधी जी से कहा :

मैं आपके देश और वहां के लोगों की आज़ादी के लिए पूरी तरह सहमत हूं. लेकिन मुझे आपकी एक बात समझ में नहीं आती. आप मशीनों का इतना विरोध क्यों करते हैं? आपको नहीं लगता कि मशीनों के बगैर बहुत सारा काम जो हो रहा है, वह ठप हो जाएगा?


अस्ल में, गांधी जी भारत में मशीनों और उद्योगों को लेकर बेहद चिंतित रह चुके थे और उसके खतरे देख पा रहे थे. यह सबूत था कि गांधी जी जो लिखते थे, उसे पूरी दुनिया बड़ी गंभीरता से पढ़ती थी. चार्ली से मुलाकात और इस सवाल के बाद गांधी जी ने साफ जवाब दिया था :

मैं मशीनों के खिलाफ नहीं हूं लेकिन जब कोई मशीन किसी आदमी से उसका काम छीन ले, तो यह मुझसे बर्दाश्त नहीं होता. हम आज आपके देश के गुलाम हैं क्योंकि हम आपके सामानों के आकर्षण से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. अगर हम इस तरह के आकर्षणों से आज़ाद हो जाएं तो हम वाकई आज़ाद हो जाएंगे.


क्या हुआ गांधी पर चैपलिन का असर?
चार्ली चैपलिन से मुलाकात के बाद मशीनों को लेकर गांधी जी के विचारों में धीरे धीरे बड़ा बदलाव देखने को मिला. वह यंग इंडिया और ​हरिजन पत्रों में पिछले दो दशकों से मशीनों के खिलाफ जितनी कट्टरता के साथ लिखते रहे थे, 30 और 40 के दशक में उनकी सोच उतनी कट्टर नहीं थी. वह मशीनों के समझदारी से इस्तेमाल के पक्ष में आ रहे थे और समाज के विकास में उनके उपयोग को सिरे से नहीं नकार रहे थे.

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दूसरी तरफ, हास्य को लेकर भी उनका रुझान पहले से ज़्यादा समझा गया. 'अगर मुझमें सेंस ऑफ ह्यूमर न रहता तो मैं कबका खुदकुशी कर लेता.' यह वाक्य महात्मा गांधी ने कहा था, लेकिन इसके पीछे चार्ली की प्रेरणा या असर था, यह स्पष्ट नहीं है. फिर भी चार्ली से मुलाकात के बाद हास्य व्यंग्य को गांधी जी के पत्रों में ज़्यादा समझा जा सकता है.

और चार्ली पर गांधी जी का असर
चार्ली चैपलिन पहले से ही गांधी जी के फैन थे. निजी मुलाकात के बाद हुआ ये कि चार्ली पर गांधीवाद का असर गहरा और साफ दिखने लगा था. 1940 में चार्ली की मशहूर क्लासिक फिल्म द ग्रेट डिक्टेटर रिलीज़ हुई थी. यह फिल्म हिटलर के समय में ही हिटलर के खिलाफ मज़बूत कटाक्ष के लिए मशहूर हुई. हिटलर के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध को चार्ली ने इस फिल्म का विषय बनाया. इस फिल्म के एक दृश्य में आपको चार्ली की आवाज़ और अदाकारी में महात्मा गांधी के कई विचार सुनाई दे सकते हैं. देखें ये वीडियो.



कुल मिलाकर, ये कहा जा सकता है कि दो दिग्गजों की मुलाकात के बाद एक इतिहास रचा गया. 1930 का दशक वो समय था, जब सिनेमा मूक से बोलने की तरफ बढ़ रहा था. जब बोलता सिनेमा ने होश संभाला, तब मूक सिनेमा की दुनिया के सबसे बड़े कलाकार की आवाज़ में गांधी जी की आवाज़ गूंज रही थी.

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First published: October 7, 2019, 7:30 PM IST
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