28 साल पहले उत्तर प्रदेश में पहली बार सत्ता पाने वाली BJP की अब जम चुकी हैं गहरी जड़ें

28 साल पहले 24 जून को ही उत्तर प्रदेश की सत्ता तक भाजपा पहली बार पहुंचने में कामयाब हुई थी. तबसे यूपी में भाजपा के चार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और दो बार कमबैक के बाद अब भाजपा राज्य में सबसे मज़बूत स्थिति में है.

News18Hindi
Updated: June 24, 2019, 11:09 AM IST
28 साल पहले उत्तर प्रदेश में पहली बार सत्ता पाने वाली BJP की अब जम चुकी हैं गहरी जड़ें
भाजपा के मुख्यमंत्री.
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'देश की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है.' भारत की राजनीति में यह उक्ति हमेशा से प्रचलित रही है. अतीत देखें तो, जनसंख्या और पहले क्षेत्रफल के हिसाब से भी देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में राजनीतिक स्थिरता कभी नहीं रही. आज ही के दिन यानी 24 जून 1991 को सूबे में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनी थी, लेकिन तब करीब डेढ़ साल ही चल सकी थी. इससे पहले सिवाय कांग्रेस के संपूर्णानंद के, किसी भी मुख्यमंत्री ने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया था.

अगर 1952 से अब तक, हर सरकार कार्यकाल पूरा करती, तो राज्य में 14-15 सरकारें बनतीं, लेकिन 1950 से अब तक कुल 21 नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और इनमें से आधा दर्जन नेता एक से ज़्यादा बार मुख्यमंत्री रहे. भाजपा के कल्याण सिंह खुद दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

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28 साल पहले उप्र में बनी थी भाजपा सरकार

1991 से पहले तक उत्तर प्रदेश में सत्ता की धुरी में कांग्रेस और जनता दल ही रहे. 1991 तक मुलायम सिंह यादव राज्य के मुख्यमंत्री थे और तब वो जनता दल के ही सदस्य थे. बाद में, उन्होंने अलग समाजवादी पार्टी (सपा) बनाई. राज्य में राजनीतिक स्थिरता न होने के चलते और हिंदुत्व के मुद्दे के ज़ोर पकड़ने के कारण 24 जून 1991 को कल्याण सिंह पहली बार सीएम बने और भाजपा पहली बार राज्य की सत्ता में आई. लेकिन ज़्यादा समय तक रह नहीं सकी.

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कल्याण सिंह एक साल, 165 दिन ही मुख्यमंत्री रह सके. क्योंकि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद कांड हुआ. बाबरी मस्जिद विध्वंस की खबर पूरे देश में आग की तरह फैल गई और उसी दिन राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था. एक साल तक राज्य के हालात के मद्देनज़र राष्ट्रपति शासन लागू रहा. इसके बाद 4 दिसंबर 1993 को मुलायम सिंह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन इस बार समाजवादी पार्टी के प्रमुख के तौर पर.
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पांच साल बाद मिला कमबैक
मुलायम सिंह भी सीएम का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और डेढ़ साल में ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता मायावती ने तख्ता पलट कर दिया. लेकिन, खुद मायावती भी साढ़े चार महीने ही सीएम रह सकीं और फिर राज्य में 1995 में राष्ट्रपति शासन लगा. पहली बार राज्य की सत्ता तक पहुंचने के बाद भाजपा को दोबारा कुर्सी पाने में करीब पांच साल लगे.

दूसरी बार 1997 में तेरहवीं विधानसभा में भाजपा राज्य की सत्ता में आई, तो कल्याण सिंह फिर मुख्यमंत्री बने. इस बार भाजपा ने पांच साल तक राज्य में सरकार तो चलाई लेकिन स्थिरता न होने के कारण इन पांच सालों में तीन मुख्यमंत्री रहे. कल्याण सिंह के बाद राम प्रकाश गुप्ता और फिर राजनाथ सिंह भाजपा सरकार के सीएम रहे.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( फाइल फोटो)


फिर 15 सालों का इंतज़ार
दो बार राज्य में सरकार बना चुकी भाजपा को 2002 के बाद वापसी के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ा. 15 साल बाद 2017 में भाजपा सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने. लेकिन, इन 15 सालों में उत्तर प्रदेश की राजनीति ने एक दिलचस्प मोड़ लिया. 2002 से 2017 के बीच राज्य में राजनीतिक स्थिरता इस मामले में दिखाई दी कि सरकारें बीच में नहीं गिरीं. बसपा की सरकार रही, तो उसने कार्यकाल पूरा किया और सपा की सरकार बनी तो अखिलेश यादव भी 5 साल सीएम रहे.

भाजपा सबसे असरदार और रसूखदार पार्टी बनी
वर्तमान में राज्य में भाजपा न सिर्फ वापसी कर चुकी है बल्कि अपनी गहरी जड़ें जमा चुकी है. राज्य सरकार पूर्ण बहुमत के साथ चल रही है और पिछले दिनों संपन्न हुए आम चुनाव में लगातार दूसरी बार भाजपा राज्य में सबसे बड़ी और प्रभावशाली पार्टी बनकर उभरी है. राज्य में 80 लोकसभा सीटों में से 64 भाजपा और उसके सहयोगियों के हिस्से में आई हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से जीते हैं. यानी 28 साल पहले जिस राज्य की सत्ता में भाजपा ने एंट्री ली थी, आज वहां भाजपा सबसे असरदार और रसूखदार पार्टी बन चुकी है.

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First published: June 24, 2019, 10:18 AM IST
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