दुनिया के सबसे पहले तलाक़ की कहानी, जब महिला को नहीं मिलता था गुजारा भत्ता

ऐमेज़ॉन चीफ जेफ बेज़ोस से तलाक़ लेकर मैकेंज़ी दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला बन गयी हैं, लेकिन एक समय था जब महिलाओं के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं था. कैसे बने तलाक़ के कानून? तलाक़ की कानूनी व्यवस्था की सालों पहले की अनसुनी कहानी.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 6, 2019, 9:07 PM IST
दुनिया के सबसे पहले तलाक़ की कहानी, जब महिला को नहीं मिलता था गुजारा भत्ता
ऐमेज़ॉन प्रमुख जेफ बेज़ोस और मैकेंज़ी बेज़ोस.
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 6, 2019, 9:07 PM IST
ऐमेज़ॉन प्रमुख जेफ बेज़ोस और मैकेंज़ी बेज़ोस का तलाक़ दुनिया का सबसे महंगा तलाक़ साबित हुआ है, जिसमें मैकेंज़ी को 38 बिलियन डॉलर की रकम मिली है और वो दुनिया की 22वीं सबसे अमीर बन गयी हैं. इस तलाक़ की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में पहला तलाक़ कब और क्यों हुआ था? तलाक़ के लिए क्या और कैसे क़ानून बने थे?

भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में यही माना जाता रहा कि जोड़ियां तो स्वर्ग में बनती हैं. ऐसे में तलाक़ का कॉन्सेप्ट या शब्द कैसे आ गया? क्यों तलाक़ के लिए कानूनों की ज़रूरत पड़ी? इन सवालों के जवाब में आप जानेंगे कि समाज कैसे बदलता चला गया और इस बदलाव का शादी जैसी संस्था पर क्या असर पड़ता गया. लैंगिक समानता, अर्थव्यवस्था, नैतिकता जैसे कई पहलुओं पर बहस के बाद शादी के रिश्ते में लोगों ने कानूनी ढंग से अलग होने का रास्ता चुना, जिसे तलाक़ कहा गया.

दुनिया का पहला तलाक़
औपनिवेशिक समय के दौरान अगर शादी को ख़त्म करना हो तो आपसी बातचीत से अलग होना या जीवन साथी को छोड़ देना ही प्रचलित कदम हुआ करते थे. लेकिन, बाद में शादी ख़त्म होगी तो बच्चे किसके पास रहेंगे? संपत्ति में कितना हिस्सा किसका होगा? पति छोड़ रहा है तो पत्नी का जीवन कैसे चलेगा? इन तमाम सवालों ने एक व्यवस्था की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसके तहत एक शादी को ढंग से ख़त्म किया जा सके और कोई पक्ष पीड़ित न रह जाए.

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20वीं सदी में भी तलाक़ जैसा विषय बेहद चर्चित रहा था लेकिन कोई व्यवस्थित तलाक़ तब नहीं हुआ था. कानूनी ढंग से हुए पहले तलाक़ के बारे में अब तक जितने रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, उनके हिसाब से 1929 में अमेरिका के मैसेचुसेट्स की बे कॉलोनी के एक जोड़े का तलाक़ पहला कानूनी तलाक था. इस केस में पहली बार किसी न्यायिक कचहरी ने तलाक़ को लेकर सुनवाई की थी. इस केस में परित्याग, दूसरी शादी, व्यभिचार और नपुंसकता के आधार पर तलाक़ दिया गया था.

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1950 में फैमिली कोर्ट सिस्टम शुरू हुआ.

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इससे पहले और बाद के हालात
ऐसा नहीं कि इससे पहले तलाक़ सम्बन्धी क़ानून नहीं थे, थे लेकिन, इसलिए प्रासंगिक नहीं थे क्योंकि महिला को अवैधानिक इकाई यानी वो मनुष्य माना जाता था, जिसके कोई कानूनी अधिकार नहीं थे. महिलाएं किसी संपत्ति पर किसी किस्म का दावा कर ही नहीं सकती थीं. 17वीं से 19वीं सदी के बीच इन कानूनों में सुधार की प्रक्रियाएं चलीं लेकिन सुस्त गति से. गति सुस्त होने के साथ ही, इन सुधारों से महिलाओं के हाथ कुछ ख़ास लगा भी नहीं.

20वीं सदी में जाकर तलाक़ की कानूनी लड़ाई की व्यवस्था बन सकीय. ये तब हुआ जब 1887 में अमेरिकी कांग्रेस में इस समस्या को लेकर चिंता जताई गयी और तलाक़ की स्थिति में महिलाओं के अधिकारों की कुछ वकालत की गयी. 1920 के दशक में ट्रायल मैरिज क़ानून का सूत्रपात हुआ, जिसके तहत असल में शादी से पहले कोई महिला और पुरुष शादी का ट्रायल कर सकते थे और देख सकते थे कि वो वास्तव में साथ जीवन जी सकते हैं या नहीं.

पढ़ें : तलाक के लिए मैकेंजी बेजॉस को मिले 38 अरब डॉलर

ये कवायद इसलिए की गयी थी कि तलाक़ के बढ़ते चलन को काबू में लाने की कोशिश की जा सके. समय के साथ फैमिली लॉ यानी परिवार से जुड़े मुद्दों पर क़ानून बने. 1950 में, फैमिली कोर्ट सिस्टम शुरू हुआ और इसके तहत समय समय पर बने नियमों के बाद तलाक के लिए वकीलों की मदद से केस लड़े जा सकने की व्यवस्था बनी.

तलाक़ और गुरु दत्त की फिल्म
ये तमाम कवायदें पश्चिम में हो रही थीं और इनका सीधा असर भारत में हो रहा था या होने वाला था. 1950 के दशक में भी भारतीय समाज में तलाक़ को लेकर काफी झिझक थी क्योंकि महिला का थाने या कचहरी जाना सभ्यता नहीं समझी जाती थी. साथ ही, तलाक़ का विकल्प हमेशा यही था कि महिला किसी भी तरह रिश्ता निभाती रहे.

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गुरु दत्त और मधुबाला स्टारर फिल्म का स्क्रीनशॉट.


भारतीय समाज की सोच, परंपरा और तलाक़ के क़ानून से देश में आने वाली नई सामाजिक क्रांति के विषय पर हिंदी फिल्मों के बेहतरीन फिल्मकार गुरु दत्त ने मिस्टर एंड मिसेज़ 55 फिल्म बनायी थी. यह फिल्म उस समय काफी चर्चित भी रही थी, जब भारत में तलाक़ सम्बन्धी क़ानून को मान्यता मिलने का दौर था. इस फिल्म में क़ानून और परंपरा के बीच एक मध्य मार्ग खोजने का सन्देश गुरु दत्त ने दिया था.

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First published: July 6, 2019, 7:44 PM IST
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