अंतरिक्ष में ये लैंडर भी हुआ था गायब, फिर मिला 11 साल बाद

News18Hindi
Updated: September 12, 2019, 3:38 PM IST
अंतरिक्ष में ये लैंडर भी हुआ था गायब, फिर मिला 11 साल बाद
एक अंतरिक्ष यान के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर.

भारत के चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) मिशन के तहत चंद्रमा की सतह के पास लैंडर विक्रम (Lander Vikram) के गायब होने से मिलने तक के घटनाक्रम के बीच उस अंतरिक्ष यान के बारे में जानें, जो सालों तक रहस्य बना रहा था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 12, 2019, 3:38 PM IST
  • Share this:
लाखों किलोमीटर के सफर के बाद चांद से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2 mission) के लैंडर विक्रम का गायब हो जाना, फिर संपर्क कट जाना. इसके बाद ये कि चांद से टकराकर विक्रम घायल (ISRO Moon Mission) हुआ. जल्दी-जल्दी हर अपडेट के बाद ताज़ा खबर ये है कि लैंडर विक्रम मिल चुका है, उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है और वह फिर अपना काम शुरू करेगा. विक्रम के छू मंतर होने से सही सलामत मिल जाने के बीच भावुकता और प्रतिक्रियाओं का हंगामा रहा लेकिन आपको जानना चाहिए कि अंतरिक्ष (Space Program) में ऐसा होता रहा है. अंतरिक्ष यान (Spacecrafts) खोते और मिलते रहे हैं. ऐसी ही एक दिलचस्प दास्तान है जब एक 'गुम' हो गया यान रहस्य बना रहा और फिर सालों बाद रहस्य (Space Mystery) से पर्दा उठा.

ये भी पढ़ें : चीन को रोक पाना अब अमेरिका के लिए क्यों है नामुमकिन?

भारत का महत्वाकांक्षी चंद्रयान 2 मिशन (India Moon Mission) लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. ताज़ा घटनाक्रम से क्या यह जिज्ञासा पैदा होती है कि कोई अंतरिक्ष यान पहले भी गायब (Lost Spacecrafts) होकर यानी संपर्क से कट जाने के बाद फिर मिल सका है? इस सवाल का जवाब हां हो या नहीं, आपको ब्रिटेन के उस अंतरिक्ष यान (British Spacecraft) के लैंडर के बारे में जानना चाहिए, जो 11 सालों तक अंतरिक्ष का एक रहस्य बनकर रह गया था.

पढ़ें : चंद्रयान 2 की तरह इजरायल के मून मिशन में आई थी गड़बड़ी, जानिए कहां हुई थी चूक?

क्या था ब्रिटेन का मंगल मिशन?
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ज़रिये ब्रिटेन ने अपना मार्स लैंडर बीगल 2 साल 2003 में मार्स एक्सप्रेस मिशन के तौर पर लॉंच किया था. ये मिशन लॉंच होने के बाद लैंडर बीगल 2 को 25 दिसंबर 2003 को मंगल की सतह पर लैंड करना था लेकिन उस दिन से ही बीगल 2 से संपर्क खत्म हो गया और कई कोशिशों के बावजूद जब संपर्क बहाल नहीं हुआ तो फरवरी 2004 में इसे नाकाम घोषित कर दिया गया.

ज़रूरी जानकारियों, सूचनाओं और दिलचस्प सवालों के जवाब देती और खबरों के लिए क्लिक करें नॉलेज@न्यूज़18 हिंदी
Loading...

Space craft history, chandrayaan 2 updates, chandrayaan 2 lander, what is lander vikram, lander vikram found, अंतरिक्ष यान, चंद्रयान 2 अपडेट, चंद्रयान 2 लैंडर, लैंडर विक्रम क्या है, लैंडर विक्रम कैसे मिला
नासा ने एक कलाकार द्वारा बनाई गई मंगल पर बीगल 2 की प्रतिकृति जारी की थी.


क्या था मिशन का मक़सद और खूबी?
अस्ल में, बीगल 2 खगोलीय जीवविज्ञान को समझने का मिशन था जिसके ज़रिए ये पता लगाया जाना था कि मंगल ग्रह की छिछली सतह पर पहले जीवन की क्या संभावना या स्थिति रही थी. मशहूर जीवविज्ञानी चार्ल्स डार्विन ने जिस जहाज़ से दुनिया की सैर की थी, उसका नाम एचएमएस बीगल था और इसी जहाज़ के नाम पर ब्रिटेन ने मंगल मिशन के यान का नाम बीगल रखा था.

क्यों नहीं पता चला बीगल 2 का हाल?
2003 के क्रिसमस के दिन जब महत्वाकांक्षी ब्रिटिश मार्स लैंडर से संपर्क कट गया तो न केवल ब्रिटेन बल्कि यूरोपीय स्पेस एजेंसी के कई वैज्ञानिक इसका कारण समझने में जुट गए कि आखिर क्या हुआ. यूरोपीय एजेंसी के मार्स एक्सप्रेस मिशन के ऑर्बिटर के ज़रिए लैंडर बीगल 2 को मंगल तक ट्रांसपोर्ट किया गया था और संपर्क कट जाने के बाद ऐसी तस्वीरें मिली ही नहीं जिनसे पता चल पाता कि हुआ क्या था.

कुछ महीनों की मशक्कत के बाद जब बीगल 2 से संपर्क नहीं हुआ तो इस मिशन को नाकाम मानकर भुला देने की कोशिशें हुईं. लेकिन इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिक अगले कई सालों तक यही सोचते रहे कि आखिर बीगल 2 कैसे और कहां गायब हो गया? उसने कभी मार्स पर लैंडिंग की भी या नहीं? किसी पिंड या मंगल की सतह से टकराकर दम तोड़ दिया? या वह दिशा भटक गया? इस तरह की कई थ्योरीज़ और आशंकाओं के बीच बीगल 2 का गुम हो जाना एक रहस्य बन चुका था.


कैसे उठा रहस्य से पर्दा?
तकरीबन 11 साल बाद जब नासा का एक मंगल की जासूसी करने वाला ऑर्बिटर चक्कर लगाकर तस्वीरें खींच रहा था, तब इस ऑर्बिटर ने हाईराइज़ कैमरा से बीगल 2 की कुछ तस्वीरें भेजीं. इन तस्वीरों से पता चला कि उस लैंडर को जिस लोकेशन पर लैंड करना था, वह उससे 4.8 किलोमीटर की दूरी पर पड़ा हुआ था और मंगल के इस हिस्से को इसिडिस प्लैनेशिया क्षेत्र के नाम से जाना जाता था. इस खबर के बाद फिर ब्रिटिश स्पेस वैज्ञानिकों ने कारण समझने की कोशिश की.

पढ़ें : चांद की सतह छूना सबसे मुश्किल, लैंडिंग में ही क्यों फेल होते हैं मून मिशन?

आखिर क्या हुआ था हादसा?
नासा से जो तस्वीरें मिलीं, उनके विश्लेषण के बावजूद यह स्पष्ट रूप से तय कर पाना था मुश्किल था कि वास्तव में हुआ क्या था. कुल मिलाकर जो थ्योरी तैयार हुई, वो ये कि ऑर्बिटर से अलग होने के बाद लैंडर ने मंगल पर सफलतापूर्वक लैंडिंग तो कर ली थी लेकिन लैंडिंग के दौरान ये हुआ था कि अज्ञात कारणो से सोलर पैनल फेल हो जाने के कारण लैंडर के रेडियो एंटीना ब्लॉक हो गए थे. रेडियो एंटीना के बगैर बीगल 2 का संपर्क कट गया था और इसे पृथ्वी से नियंत्रित भी नहीं किया जा सकता था.

Space craft history, chandrayaan 2 updates, chandrayaan 2 lander, what is lander vikram, lander vikram found, अंतरिक्ष यान, चंद्रयान 2 अपडेट, चंद्रयान 2 लैंडर, लैंडर विक्रम क्या है, लैंडर विक्रम कैसे मिला
बीगल 2 के रेडियो एंटीना को फोकस करने वाली एक प्रतीकात्मक तस्वीर विकिपीडिया पर सुरक्षित है.


इस लैंडर के मुख्य डिज़ाइन इंजीनियर के हवाले से उस वक्त कहा गया था ये खुलासे होना एक ही समय में बहुत शानदार और बहुत निराशाजनक एहसास से गुज़रने जैसा था.

इससे पहले भी हुए थे ऐसे हादसे?
इस तरह के हादसे अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास मे कम नहीं हैं. 1999 में नासा का मंगल क्लाइमेट ऑर्बिटर इसलिए गायब हो गया था क्योंकि प्रोजेक्शन का गणित गड़बड़ाया था. जी हां, इंजीनियरों की टीम में किसी ने फीट और मील जैसी अंग्रेज़ी इकाइयों के साथ गणना की थी तो किसी ने मेट्रिक प्रणाली के हिसाब से. हुआ ये कि ऑर्बिटर जहां प्रोजेक्ट होना था, उससे परे निकलकर संपर्क से बाहर हो गया.

इससे पहले 1992 में नासा का ही मार्स ऑब्ज़र्वर खो गया था और माना गया था कि इसका कारण मंगल पर पहुंचते ही यान के फ्यूल पाइप में विस्फोट हो जाना रहा था.



ये भी पढ़ें:
दुनिया की आबादी जितना हर साल बढ़ता है सिंगल यूज़ प्लास्टिक कचरा?
चीन में अब पेट्रोल वाहन खरीदने पर क्यों होती है लंबी वेटिंग

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए अमेरिका से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 9, 2019, 7:17 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...