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क्यों खास है चीनी हमले से जूझी 'बिहार रेजिमेंट' और क्यों दुर्गम घाटी में तैनात है

1941 में बनी बिहार रेजिमेंट ने कई महत्वपूर्ण युद्धों में पराक्रम दिखाया है. फाइल फोटो.

1941 में बनी बिहार रेजिमेंट ने कई महत्वपूर्ण युद्धों में पराक्रम दिखाया है. फाइल फोटो.

18वीं सदी में बिहार बटालियन से शुरू हुआ गठन 1941 में बिहार रेजिमेंट के तौर पर स्थापित हुआ. तबसे अब तक इस रेजिमेंट के जवान Surgical Strike से लेकर सीमाओं पर संघर्ष (Border Conflicts) के समय में History रचते रहे हैं. 'वी​र बिहारियों' की इस रेजिमेंट के नाम एक 'World Record' समेत कई कीर्ति गाथाएं दर्ज हैं.

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    अपने पराक्रम और शौर्य (Gallantry) के लिए मशहूर रही बिहार रेजिमेंट भारत के तमाम महत्वपूर्ण सैन्य संघर्षों का हिस्सा रही है. China के साथ इस रेजिमेंट का खूनी संघर्ष बीते सोमवार को हुआ. Ladakh में Indo-China Border पर चीनी हमले में बिहार रेजिमेंट के अधिकारी समेत जवान शहीद हुए. देश के लिए प्राणों की आहुति देना Bihar Regiment की परंपरा रही है. इसकी शौर्य गाथाएं इतिहास में दर्ज हैं. भारत चीन सीमा पर इस रेजिमेंट की तैनाती क्यों है और ये भी जानें कि क्या हैं इस रेजिमेंट की खासियतें.

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    आज़ाद भारत में हुए लगभग सभी युद्धों में बिहार रेजिमेंट की टुकड़ियों ने हिस्सा लिया और अपने पराक्रम के लिए कई अवॉर्ड्स जीते. 'वीर बिहारी' के नाम से भी पुकारी जाने वाली इस रेजिमेंट ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति ऑपरेशनों (Peacekeeping Operations) के तहत सोमालिया और कोंगो में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है. इस रेजिमेंट के बारे में खास तथ्य जानिए.

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    बिहार रेजिमेंट दूसरे विश्वयुद्ध के साथ ही आज़ाद भारत के लिए कई अहम युद्धों में महत्वपूर्ण रही है.


    उरी में दर्ज हुआ रेजिमेंट का बलिदान
    18 सितंबर 2016 की तारीख इस रेजिमेंट के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि जम्‍मू कश्‍मीर के उरी सेक्‍टर में पाकिस्‍तानी सीमा से आए घुसपैठियों से मुकाबले में इस रेजीमेंट के 15 जांबाजों ने जान न्यौछावर कर दी थी. उरी सेक्टर स्थित भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले में कुल 17 जवान शहीद हुए थे, जिनमें सबसे ज़्यादा 15 जवान बिहार रेजिमेंट के थे. इनमें से 6 बिहार मूल के थे.

    यहां जानिए कि इस रेजिमेंट में सिर्फ बिहार के लोग ही नहीं चुने जाते, बस इस रेजीमेंट का नाम ही 'बिहार रेजिमेंट' है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इसकी शुरूआत बिहार के ज़िलों से हुई थी.

    मुंबई में शहीद हुए थे मेजर उन्नीकृष्णन
    साल 2008 में जब मुंबई में आतंकी हमला हुआ था, तब एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ऑपरेशन ब्लैक टॉरनैडो में शहीद हुए थे. अस्ल में, मेजर उन्नीकृष्णन बिहार रेजीमेंट के थे, जिन्हें प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में भेजा गया था. मुंबई में आतंकी हमले से जूझने से पहले कारगिल युद्ध में बिहार रेजिमेंट ने इतिहास रचा था.

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    बिहार रेजिमेंट के शहीदों का इतिहास उल्लेखनीय रहा है.


    कारगिल में भी कुर्बान हुए जांबाज़
    जुलाई 1999 में बटालिक सेक्टर के पॉइंट 4268 और जुबर रिज पर पाकिस्‍तानी घुसपैठियों के कब्जे की कोशिश को बिहार रेजिमेंट के जवानों ने ही नाकाम किया था. कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन गुरजिंदर सिंह सूरी को महावीर चक्र और शहीद मेजर मरियप्पन सरावनन को वीर चक्र से नवाज़ा गया था. पटना के गांधी मैदान के पास कारगिल चौक पर कारगिल में शहीद हुए 18 जांबाजों की याद में स्‍मारक है.

    यहां जानना चाहिए कि 1941 में स्थापित हुई बिहार रेजिमेंट के नाम भारत की आज़ादी से पहले ही 5 मिलिट्री क्रॉस और 9 मिलिट्री मेडल थे जबकि आज़ादी के बाद से अब तक इस रेजिमेंट के खाते में 7 अशोक चक्र, 9 महावीर चक्र और 21 कीर्ति चक्र, 70 शौर्य पदक सहित सेना के कई पुरस्कार और मेडल शामिल हैं.

    दुनिया का सबसे बड़ा सरेंडर
    साल 1971 के बांग्लादेश युद्ध के समय पाकिस्तानी सेना से संघर्ष के दौरान बिहार रेजिमेंट के किस्से मशहूर हैं. कहा जाता है कि गोलियां कम पड़ने पर इस रेजिमेंट के सैनिकों ने दुश्मन को संगीनों से ही मार दिया था. उस युद्ध में पाकिस्तान के 96 हजार सैनिकों ने बिहार रेजिमेंट के जांबाज़ों के आगे ही घुटने टेके थे. इस आत्‍मसमर्पण को दुनिया में लड़े गए अब तक के सभी युद्धों में रिकॉर्ड माना जाता है.

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    बिहार रेजिमेंट के जवान इस हुंकार के साथ दुश्मन पर टूटते हैं.


    प्रसिद्ध है बिहार रेजिमेंट का मोटो और हुंकार
    'करम ही धरम' इस रेजिमेंट का मोटो रहा है और इसके मुताबिक मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य को ही रेजिमेंट के जवान अपना कर्म और धर्म मानते हैं. वॉर क्राय यानी हुंकार के रूप में बिहार रेजिमेंट के वाक्य हैं 'जय बजरंग बली' और 'बिरसा मुंडा की जय'. इस तरह की हुंकार भरकर बिहार रेजिमेंट के जवान दुश्मन पर टूट पड़ते हैं.

    क्यों दुर्गम घाटियों में तैनात है रेजिमेंट?
    खबरों की मानें तो बिहार रेजीमेंट के जवान चूंकि बहादुर होते हैं और वो किसी भी स्थिति को झेलने की क्षमता रखते हैं इसलिए इस रेजिमेंट के जवानों की तैनाती दुर्गम और जटिल परिस्थितियों वाले इलाकों में की जाती रही है. भारत चीन सीमा यानी एलएसी पर गलवन घाटी और इस तरह के कुछ अन्य दुर्गम स्थानों पर रेजिमेंट के जवान तैनात हैं.

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