Inside Story : भारत में कैसे आया इंटरनेट, कैसा रहा सफर?

भारत में इंटरनेट के 25 साल पूरे हुए.
भारत में इंटरनेट के 25 साल पूरे हुए.

भारत में इंटरनेट की शुरूआत (Beginning of Internet) 25 साल पहले हुई थी और पिछले पांच से दस सालों में डेटा और स्पीड सबसे बड़े प्रोडक्ट बन चुके हैं. F-Mail क्या था? .IN डोमेन कैसे आया? इंटरनेट की कहानी के दिलचस्प मोड़ जानें.

  • News18India
  • Last Updated: November 17, 2020, 11:30 AM IST
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भारत में इंटरनेट के सफर के 25 साल पूरे हो चुके हैं और इस मौके पर इस यात्रा से जुड़ी एक बेहद खास स्टोरी आपके लिए है. भारत में इंटरनेट के 25 साल पूरे होने के बाद इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर का देश है और बहुत जल्दी पहले नंबर पर आने वाला है. इंटरनेट की दु​निया में जितनी क्रांति (Digital Revolution in India) भारत में जिस रफ्तार से हुई है, शायद ही किसी और विकासशील देश में हुई. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे इंटरनेट ने डिजिटल इंडिया (Digital India) की कल्पना को साकार किया.

1990 का दशक तकरीबन आधा गुज़र चुका था और भारत में कंप्यूटर से तालमेल बिठाया जा चुका था, लेकिन यह वो समय था, जब इंटरनेट की बातें सिर्फ बातें ही थीं. भारत में इंटरनेट की शुरूआत हुई नहीं थी, लेकिन इस दिशा में कोशिशें जारी थीं. 1995 में 15 अगस्त से इंटरनेट की शुरूआत हुई. शुरूआत के बाद भी शायद किसी को अंदाज़ा नहीं था कि सिर्फ दो दशकों में भारत की तस्वीर इससे कितनी बदल जाएगी.

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पहला इंटरनेट कनेक्शन
विदेश संचार निगम ने देश का पहला इंटरनेट कनेक्शन दिया था, जिसे चलाने के लिए एक लैंडलाइन फोन जरूरी था. भारत में सबसे पहले इंटरनेट कनेक्शन के लिए डोमेन नेम रजिस्टर करवाने के लिए ERNET की NCST टीम को चुना गया था. यह पहली सेवा पब्लिक सर्विस जैसी थी, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं था, लेकिन जल्द ही मुश्किलें खड़ी हुई थीं.

(भारत में इंटरनेट की शुरूआत की इनसाइड स्टोरी विस्तार से इस लिंक पर पढ़ें)

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विदेश संचार निगम लिमिटेड द्वारा 15 अगस्त 1995 को इंटरनेट भारत में शुरू हुआ था.


चूंकि उस वक्त डोमेन नेम भारत में रजिस्टर नहीं होते थे इसलिए इस तरह की मुश्किल खड़ी हुई कि कोई व्यक्ति या संस्था कोई भी डोमेन रजिस्टर करवा सकती थी. यानी रेलवे के अलावा कोई संस्था या व्यक्ति भी IndianRailways.com डोमेन रजिस्टर करवा सकता था. इस समस्या के चलते .IN डोमेन की व्यवस्था की कवायद शुरू हुई थी, ताकि अधिकृत संस्थाओं के लिए डोमेन की समस्या न रहे.

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इससे पहले की कहानी
भारत में 70 के दशक में इंटरनेट की कहानी शुरू हुई थी, लेकिन यह उस वक्त सिर्फ इसकी समझ विकसित करने से जुड़ी थी. इसके बाद, 1986 में NCST और आईआईटी बॉम्बे के बीच ईमेल सेवा की शुरूआत के लिए एक डायल अप लिंक की शुरूआत हुई थी. इंटरनेट का कमर्शियल स्तर पर इस्तेमाल 1995 में शुरू हुआ. 1989 में इंटरनेट का इस्तेमाल शिक्षा और शोध कार्य के लिए ही होता था.

उस दौरान नेशनल एजुकेशन और रिसर्च नेटवर्क (ERNET) के जरिए इंटरनेट मिलता था. 1995 के दौर में सिर्फ सत्यम इनफोवे एक आईएसपी प्रोवाइडर कंपनी थी, जबकि आज देश में 358 से अधिक आईएसपी कंपनियां हैं जो लोगों को घरों तक इंटरनेट पहुंचा रही हैं. उस समय की एक रोचक कहानी ई-मेल से पहले के एफ-मेल से जुड़ी है.


F-Mail: क्या आपने कभी यूज़ किया?
नहीं, अगर आपकी उम्र 30 या 40 साल से कम है, तो आपको यह मौका नहीं मिला होगा. अस्ल में, 1980 के दशक के आखिर में यह प्रयोग तब हुआ था जब आईआईटी कानपुर में डायल अप कनेक्शन और लीज़ लाइन में मुश्किल पैदा हुई तो ईमेल के इस्तेमाल का विकल्प खोजना पड़ा. यह विकल्प IITK और NCST ने आपसी तालमेल से खोजा.

विकल्प यह था कि मेल को फ्लॉपी में लिखा जाता था और इस फ्लॉपी को कोरियर के ज़रिये भेजा जाता था. फ्लॉपी कंप्यूटर की दुनिया में सीडी से पहले का समय था. लेकिन जल्द ही इस फ्लॉपी मेल को लेकर दुविधाएं पैदा हुईं कि मेल को पहुंचने में तीन दिन से ज़्यादा का समय क्यों लगता है? इस बारे में विचार शुरू हुआ और ईमेल की तरफ शिद्दत से बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ. और अब तो आपके लिए लाइव मीटिंग भी सामान्य बात है.

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क्रांति की कथा : तब
* 1995 में जब इंटरनेट भारत में शुरू हुआ था, तब स्पीड मिलती थी सिर्फ 10 KBPS और वो भी किस कीमत पर? अंदाजा लगा लीजिए कि 250 घंटे और थके हुए कनेक्शन के लिए उस वक्त 15 हजार रुपए देने पड़ते थे.
* 1995 में एक एमबी की फोटो डाउनलोड करने में करीब सात मिनट का वक्त लगता था क्योंकि उस दौरान इंटरनेट की स्पीड ही 2.4केबीपीएस से कुछ ही ज़्यादा हुआ करती थी.
* 2000 में भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 55 लाख के आंकड़े को पार कर गई थी. 1995 में इंटरनेट की शुरूआत के बाद करीब 15 सालों में हालात बहुत नहीं बदले थे लेकिन 2010 के बाद तस्वीर बदलना शुरू हुई.

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वीएसएनल द्वारा जारी इंटरनेट की दरें 1995 में इस तरह थीं.


क्रांति की कथा : अब
अब भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 70 करोड़ से अधिक हो चुकी है. पिछले महज़ 10 सालों में यह कारनामा हुआ है. साल 2014-15 में भारत में इंटरनेट (डेटा) का कुल खर्च 83 हजार करोड़ जीबी था जबकि आज हर भारतीय हर महीने औसतन 11 जीबी डाटा खर्च कर रहा है. स्मार्टफोन के ज़रिये इंटरनेट सुबह की चाय की तरह है और देश में 70 करोड़ से ज्यादा लोग खासी स्पीड और डेटा के ग्राहक हैं.

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यह वो समय है जब दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां इंटरनेट के दम पर खड़ी हुई हैं. गूगल, एमेजॉन, फेसबुक, नेटफ्लिक्स, पेटीएम जैसी सैकड़ों कंपनियों का पूरा कारोबार ही इंटरनेट पर खड़ा है. भारत में 2005 तक 6500 रजिस्टर्ड वेबसाइट थीं और अब .in वाली 22 लाख वेबसाइट्स हैं और कुल रजिस्टर्ड वेबसाइट 50 लाख से ज्यादा हैं.

भारत में इंटरनेट का भविष्य
भारत वो देश है, जहां पूरी दुनिया में सबसे सस्ता इंटरनेट उपलब्ध है. विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और ब्लॉक चेन जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी पूरी तरह से इंटरनेट पर ही टिका होगा. ऐसे में भारत अपने सबसे सस्ते और सबसे बड़े इंटरनेट ईको सिस्टम के दम पर सफलता की नई कहनी लिखने का पूरा दम रखता है.
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