ट्रंप की फेवरिट दवा को क्यों डॉक्टर नहीं मानते कोरोना में असरदार

ट्रंप की फेवरिट दवा को क्यों डॉक्टर नहीं मानते कोरोना में असरदार
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा मलेरिया के इलाज के लिए प्रामाणिक है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रचारित की गई दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर अब भी मेडिकल विशेषज्ञ दोफाड़ हैं. कोरोना संक्रमण को लेकर, विशेषज्ञों का एक वर्ग इस दवा के इस्तेमाल के समर्थन में है तो दूसरा इसके खिलाफ. जानें कि इस दवा का इस्तेमाल कोविड 19 के किन केसों में क्यों किया जा रहा है.

  • News18India
  • Last Updated: April 10, 2020, 5:54 PM IST
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कोरोना वायरस (Corona Virus) के लिए कोई प्रामाणिक और मानक दवा (Standard Medicine) अब तक न होने के कारण एंटी मलेरिया (Anti Malaria) दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके साथ ही न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन (China) में 62 लोगों पर की गई एक स्टडी बताती है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोविड-19 (Covid 19) के हल्के मामलों में मददगार रही है. इतने छोटे स्तर पर किए गए अध्ययन (Study) पर भी सवालिया निशान हैं.

अमेरिका (United States) के सख्त तेवर अपनाने के बाद भारत (India) ने इस दवा के निर्यात (Export) से प्रतिबंध उठाते हुए अमेरिका को पिछले दिनों ही भारी मात्रा में यह दवा उपलब्ध करवाई. सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि इज़रायल (Israel) व यूरोपीय देशों (Europe) को भी भारत ने यह दवा मुहैया करवाई है. आइए समझते हैं कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन क्या है और इसे लेकर दुनिया में क्या विचार चल रहे हैं.

कोरोना के गंभीर मरीज़ों पर बेअसर
कोरोना संक्रमण के गंभीर मामलों में यह दवा बेअसर पाई गई है. एनबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट में अमेरिका के कई डॉक्टरों के हवाले से कहा गया है कि आईसीयू में भर्ती मरीज़ों पर इस दवा का कोई असर नहीं दिख रहा. एक डॉक्टर लिन क्यू ने तो यहां तक कहा है कि उन्होंने ऐसा कोई व्यक्ति या मामला अब तक नहीं देखा, सुना जिसमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की मदद से कोई अप्रत्याशित रूप से ठीक हुआ हो. इसलिए इस दवा को कोरोना मामलों में चमत्कारी दवा बिल्कुल नहीं कहना चाहिए.
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कोरोना संक्रमितों के लिए क्यों?


एनवायटी की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में वैज्ञानिक कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवा और वैक्सीन ढूंढ़ने में लगे हैं, लेकिन जब तक कोई प्रामाणिक दवा नहीं मिलती, तब तक हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल हो रहा है. इस दवा को लेकर दुनियाभर में क्लीनिकल ट्रायल्स भी शुरू हो चुके हैं. हालांकि, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से मलेरिया सहित रिमेटॉयड आर्थराइटिस और ल्यूपस के मरीज़ों का इलाज किया जाता रहा है.

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दो हज़ार डॉक्टरों ने माना, यह दवा कारगर है
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर जारी विवाद के दौरान न्यूयॉर्क पोस्ट ने एक सर्वे के हवाले से कहा कि अमेरिका के 2171 डॉक्टरों ने माना है कि कोरोना ग्रस्त मरीज़ों के इलाज के लिए यह दवा सबसे असरदार थैरेपी है. एनवाय पोस्ट की खबर के मुताबिक यह सर्वे हेल्थकेयर से जुड़ी कंपनी सर्मो ने करवाया है, जिसमें शामिल डॉक्टरों में से 37 फीसदी ने इस दवा को कारगर माना.

अभी और भी अध्ययन ज़रूरी हैं
चीन में 62 लोगों पर किए गए अध्ययन को बेहद छोटे पैमाने पर किया गया अध्ययन माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक इस अध्ययन में मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के साथ और भी कई दवाएं देने की बात भी सामने आई. यानी अभी डॉक्टर्स को पता नहीं है कि मरीज़ किस दवा से ठीक हुए या कौन से मरीज इस दवा से ठीक हुए. शोधकर्ताओं का साफ कहना है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के बारे में कई स्टडीज़ ज़रूरी हैं.

क्यों खारिज किए गए कुछ अध्ययन?
एक लैब स्टडी के मुताबिक क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस को शरीर की कोशिकाओं में दाखिल नहीं होने देता. हालांकि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर की गईं कई स्टडीज़ की मानें तो यह दवा इंफ्लुएंज़ा और दूसरे विषाणु संक्रमणों के लिए मददगार नहीं है. चीन और फ्रांस के डॉक्टरों की रिपोर्ट्स में कहा गया था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एंटीबायोटिक एजिथ्रोमायसिन के साथ दी जाए तो कोरोना के इलाज में बेहतर नतीजे दिखते हैं, लेकिन इस स्टडी में कोई कंट्रोल ग्रुप शामिल न होने के कारण इसे खारिज कर दिया गया था. इस स्टडी को छापने वाले प्रकाशक ने भी इसे आधा अधूरा बताया था.

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ट्रंप की ज़िद पर भारत ने हाल ही अमेरिका सहित कुछ देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा मुहैया करवाई. (फाइल फोटो)


हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के साइड इफेक्ट घातक हैं
फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोविड 19 नहीं, बल्कि मलेरिया, ल्यूपस और रिमेटॉयड आर्थराइटिस के मामलों में ही उपयोग की अनुमति दी है. इसका कारण इस दवा के साइड इफेक्ट्स होना है. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह दवा हृदय रोगियों, आंखों, लिवर और किडनी के मरीज़ों के लिए घातक हो सकती है.

वहीं गार्जियन की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि जिन स्थितियों के लिए इस दवा के इस्तेमाल के प्रयोग नहीं हुए हैं, उनमें यह दवा देने से जानलेवा नतीजे सामने आ सकते हैं.

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