डिटेंशन कैंपों में नहीं छीने जा सकते रिफ्यूजियों के ये अधिकार

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Updated: September 3, 2019, 9:10 PM IST
डिटेंशन कैंपों में नहीं छीने जा सकते रिफ्यूजियों के ये अधिकार
न्यूज़18 क्रिएटिव

असम (Assam) में एनआरसी (NRC) की प्रक्रिया के साथ ही डिटेंशन सेंटरों (Detention Centers) के निर्माण का काम भी ज़ोरों पर है. आपको जानना चाहिए कि अवैध नागरिकों (Illegal Immigrants) को एक तरह से कैद रखने वाले कैंपों में क्या सुविधाएं ज़रूरी हैं.

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नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स (National Register of Citizens) की आखिरी कार्यवाही तक असम में मौजूदा छह के अलावा 10 और नए डिटेंशन सेंटर (Detention Camps) बनाने का काम जारी है. भारतीय राज्य (Indian State) में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को देश से निकालने की प्रक्रिया के तहत उन रिफ्यूजियों (Refugees) को कहां और कैसे रखा जाएगा, इसके लिए डिटेंशन सेंटरों की व्यवस्था हो रही है. लेकिन, इस बारे में नियम क्या कहते हैं और ये भी जानिए कि डिटेंशन सेंटरों में अवैध प्रवासियों को रखे जाने को लेकर सरकार ने क्या गाइडलाइन्स (Guidelines) जारी की हैं.

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असम में डिटेंशन सेंटरों की व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि डिपोर्ट किए जाने की प्रक्रिया (Deportation Process) के दौरान सभी अवैध विदेशी नागरिक एक निश्चित जगह पर मौजूद हों और राज्य में उनकी गतिविधियों पर लगाम रहे या निगरानी रहे. इन डिटेंशन सेंटरों में इन्हें कैसे रखा जाए, क्या व्यवस्थाएं की जाएं और किस तरह की सुविधाएं (Facilities in Detention Camps) दी जाएं, इन तमाम पहलुओं पर गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने एक आदर्श मैनुअल (Model Manual) जारी कर निर्देश जारी किए हैं. जानें कि इसके मुताबिक किस तरह के इंतज़ाम किए जाने हैं.

ये राज्य की ज़िम्मेदारी है

मैनुअल में कुल 39 बिंदुओं में व्यवस्था दी गई है जिसके मुताबिक राज्य को डिटेंशन सेंटरों या कैंपों के लिए गृह मंत्रालय से कोई निश्चित मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी बल्कि यह राज्य की ज़िम्मेदारी होगी कि अवैध विदेशियों की संख्या के हिसाब से डिपोर्ट किए जाने की प्रक्रिया पूरी होने तक उनकी रिहाइश का इंतज़ाम किया जाए.

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असम में नए डिटेंशन कैंपों का निर्माण कार्य ज़ोरों पर है. असम के गोलपाड़ा में सबसे बड़ा डिटेंशन कैंप बनाया जा रहा है.

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जेल से सेंटर में हैंडओवर किए जाएं कैदी
मैनुअल के मुताबिक अगर कोई अवैध विदेशी किसी अपराध के सिलसिले में अपनी सज़ा पूरी कर चुका है तो जेल प्रशासन उसे डिटेंशन सेंटर प्रशासन के सुपुर्द करे और द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक ये भी कहा गया कि दूतावास में इंटरव्यू और दस्तावेज़ संबंधी प्रक्रिया पूरी होने तक ऐसे विदेशियों को 'मेट्रो' शहरों में रखे जाने का प्रावधान है.

सेंटरों में ज़रूरी हैं ये सुविधाएं
गृह मंत्रालय के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 'मानवीय गरिमा' के अनुसार डिटेंशन सेंटरों में रहने के इंतज़ाम होने चाहिए. इसका मतलब है कि इन सेंटरों में रोशनी, हवादार कमरों की, साफ सफाई की मानक व्यवस्था के साथ ही, बिजली, पानी और संचार संबंधी सुविधाएं होना चाहिए. इसके अलावा यहां रखे गए लोगों के लिए एक खुली जगह होना चाहिए जहां वो घूम फिर सकें और इस इंतज़ाम में पुरुषों और महिलाओं के लिहाज़ से ठीक व्यवस्था हो. ये भी कि एक परिवार को अलग न रखा जाए.

सुरक्षा के लिए ये सुविधाएं
इन सेंटरों में सुरक्षा इंतज़ामों के संबंध में निर्देश हैं कि सीसीटीवी और हर समय सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहे. मैनुअल के मुताबिक ऐसे सेंटरों पर कम से कम 10 फीट की बाउंड्री वॉल होना चाहिए जिस पर कंटीले तार लगे हों. इसके साथ ही समय समय पर सुरक्षा के लिहाज़ से गिनती और निगरानी होना चाहिए. परिवार के सदस्यों को एक दूसरे से मिलने पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए.

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महिलाओं व बच्चों का खास खयाल
मैनुअल में साफ निर्देश है कि महिलाओं की ज़रूरतों का खास खयाल रखा जाए. गर्भवतियों, छोटे बच्चों की मांओं, ट्रांसजेंडरों के लिए पूरी सुविधाएं हों और छोटे बच्चों के लिए एक पालनाघर भी सेंटरों में होना चाहिए. मैेनुअल के मुताबिक डिटेंशन सेंटरों में बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था भी होना चाहिए और उन्हें स्थानीय स्कूलों में दाखिल करवाया जाना चाहिए.

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First published: September 3, 2019, 9:10 PM IST
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