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क्यों करोड़ों में बढ़ रही है काशी विश्वनाथ में चढ़ावे से आय?

बीते सावन महीने में काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा.

बीते सावन महीने में काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा.

वाराणसी (Varanasi) स्थित प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) में भक्तों के चढ़ावे से होने वाली आय लगातार बढ़ रही है. इस बार सावन माह में आए चढ़ावे के आंकड़े भी यही कह रहे हैं.

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    काशी विश्वनाथ के नाम से मशहूर वाराणसी (Varanasi) के विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) में भक्तों के चढ़ावे से होने वाली आय तेज़ी से बढ़ रही है. करोड़ों रुपये प्रतिमाह हो गई इस आय ने पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं और रफ्तार पकड़ ली है. ऑनलाइन चढ़ावे की सुविधा से आय तो बढ़ी ही है, बाबा विश्वनाथ मंदिर के बैंक खाते में भी 1 अरब का आंकड़ा पार हो चुका है. ये और बात है कि देश के अन्य धार्मिक मठों या मंदिरों की तुलना में काशी विश्वनाथ मंदिर की आय काफी कम है, लेकिन अगर वो अपने ही पिछले रिकॉर्ड को देखे तो यह काफी बड़ा इज़ाफा है. कितना इज़ाफा हो रहा है? इसके साथ ये भी जानें कि ऐसा कैसे संभव हुआ.

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    कितनी बढ़ गई आय?
    खबरों के मुताबिक बीते वित्तीय वर्ष में काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों के चढ़ावे से करीब 26 करोड़ रुपये की आय हुई. इससे पिछले साल यही आय करीब 13-14 करोड़ रुपये की थी यानी इसमें दोगुना इज़ाफा हुआ. ये भी बताया गया कि भक्तों के लिए बनाए गए सुगम दर्शन और दूसरी सुविधाओं के लिए तैयार हेल्प डेस्क पर ही 6 करोड़ रुपये की आय हुई. असल में, हेल्‍प डेस्‍क के ज़रिए कतार में लगे बगैर सुगम दर्शन के लिए 300 रुपये के टिकट की व्यवस्था इसका कारण रही.

    आय बढ़ने के कारण क्या हैं?
    मंदिर की आय बढ़ने के पीछे माना जा रहा है कि विश्‍वनाथ मंदिर के विस्‍तारीकरण के तहत बाबा के दरबार से गंगा तट तक कॉरिडोर का जो निर्माण किया गया, उसने श्रद्धालुओं को खासा आकर्षित किया. कई श्रद्धालु इस कॉरिडोर को देखने के लिए आ रहे हैं तो कई ऑनलाइन चढ़ावा भी दे रहे हैं. हेल्‍प डेस्‍क का विस्तार भी किया जा चुका है और यहां से टिकट के साथ ही दुपट्टा, रुद्राक्ष और स्‍मृति चिह्नों की बिक्री से भी आय हो रही है. श्रद्धालुओं को गेस्ट हाउस, आरती बुकिंग जैसी और भी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं.

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    हेल्प डेस्क के ज़रिए 300 रुपये के टिकट पर सुगम दर्शन की व्यवस्था से मंदिर को लाभ होने की खबर है.


    बैंक बैलेंस और संपत्तियों में इज़ाफा
    मंदिर के बैंक खाते में दस साल पहले कुल सात करोड़ रुपये जमा थे लेकिन अब यह जमा धनराशि करीब 120 करोड़ की है. करोड़ों की कीमत का सोना, चांदी और अचल सम्‍पत्ति इससे अलग है. बताया जाता है कि देश-विदेश में रहने वाले भक्‍तों के दान और मंदिर प्रबंधन को लेकर जो कदम उठाए गए, उनसे हर साल चढ़ावे का अनुपात बढ़ा. बैंक खाते में जमा राशि का आंकड़ा बीते साल 100 करोड़ के पार था. अब ताज़ा खबर ये है कि इस सावन महीने में चढ़ावे से मंदिर की आय 25 फीसदी ज़्यादा हुई है. गौरतलब है कि बाबा विश्‍वनाथ की अचल संपत्ति काशी के अलावा पड़ोसी ज़िलों चंदौली, मिर्ज़ापुर के अलावा बेंगलुरु में भी है.

    ये है अचल संपत्ति का ब्योरा
    बाबा विश्वनाथ मंदिर की ज़मीनों का ब्योरा यह है कि चंदौली सकलडीहा में 36 एकड़ कृषि भूमि है तो मिर्जापुर ककराही में 20 एकड़ से ज़्यादा कृषि भूमि है. वहीं, ज्ञानवापी भार्गव कटरा को 4 करोड़ में, यूपिका हैंडलूम को एक करोड़ 80 लाख में और टेढ़ी नीम स्थित जम्मू कोठी को दो करोड़ पच्चीस लाख में खरीदा जा चुका है. अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा श्री काशी विश्वनाथ की वेबसाइट पर भी आप देख सकते हैं.

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