लाइव टीवी

केदारनाथ से राहुल तक, एक चिर यात्री का सफर


Updated: April 6, 2018, 5:28 PM IST
केदारनाथ से राहुल तक, एक चिर यात्री का सफर
rahul sankrityayan

भारत में यात्रा साहित्य की बात की जाए तो भारत में इसके जनक महापण्डित राहुल सांकृत्यायन माने जाते हैं. उनकी पुण्यतिथी के मौके पर पढ़िए विशेष

  • Last Updated: April 6, 2018, 5:28 PM IST
  • Share this:
भारत में यात्रा साहित्य की बात की जाए तो भारत में इसके जनक महापण्डित राहुल सांकृत्यायन माने जाते हैं. राहुल ने न सिर्फ कई मुल्कों की यात्राएं की बल्कि अपने यात्रा वृतांतों को उतने ही अच्छे ढंग से लिखा भी. यात्रा साहित्य के साथ-साथ बौद्ध धर्म पर उनका गहरी पकड़ थी.

इस पर उनके अध्ययन को बेहद समृद्ध और तथ्यपरक माना जाता है. 9 अप्रैल को राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिवस पर पढ़िए उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें.

राहुल के नाम की कहानी
9 अप्रैल 1893 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में जन्मे राहुल के नाम की कहानी बहुत रोचक है. उनके पिता गोवर्धन पाण्डे ने बचपन में उनका नाम 'केदारनाथ पाण्डे' रखा था. साल 1930 में अपनी श्रीलंका यात्रा के दौरान उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था. महात्मा बुद्ध के नाम पर उन्हें राहुल नाम मिला. सांस्कृत्यायन उपनाम उनका पितृकुल गोत्र था.

Rahul-Sankrityayan

जीवन में यात्रा और लेखन के साथ कई भूमिकाओं को बेहतरीन ढंग से जिया. बिहार में एक समाजसेवी की तरह पीड़ितों की मदद की तो कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल होकर एक एक्टिविस्ट की तरह भी काम किया.

राजनीतिक सफर1921-27 के दौरान राहुल सांकृत्यायन ने बिहार के छपरा की ओर रुख किया. वहां उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की मदद की, स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया. इस दौरान उन्हें जेल की सजा भी मिली. वो 6 महीने तक जेल में रहे.

राजनीति में भी हाथ आजमाते हुए वो कांग्रेस में शामिल हुए और जिला मंत्री का पद भी संभाला. बाद में राहुल कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने. वो साल 1940-42 के बीच फिर जेल में 29 महीने रहे. इसके बाद वो सोवियत रूस गए. वहां से लौटने के बाद वो भारत में रहे और फिर चीन गए थे.

वो शब्द, जो उनके बेहद खास थे
राहुल ऐसे रचनात्मक व्यक्ति थे जिनके नाम के साथ जुडे शब्द जुड़े हैं. जैसे महापंडित, शब्द-शास्त्री, त्रिपिटकाचार्य, अन्वेषक, यायावर, कथाकार, निबंध-लेखक, आलोचक, अथक आदि-आदि. जीवन में जहां-जहां उन्होंने सफर किया, वहां-वहां उनकी रचनात्मकता भी साथ रही. उन्होंने हर यात्रा को खूबसूरती से अपने शब्दों में उकेरा.

अपनी यात्राओं पर राहुल ने खुद कहा था कि मैंने ज्ञान को सफर में नाव की तरह लिया है. बोझ की तरह नहीं. शायद इसलिए उन्हें विश्व पर्यटक का विशेषण भी दिया गया था.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 4, 2018, 2:03 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर