जानिए कौन हैं देश की सबसे भरोसेमंद 'कोविड कैलकुलेटर' बनीं शमिका रवि

जानिए कौन हैं देश की सबसे भरोसेमंद 'कोविड कैलकुलेटर' बनीं शमिका रवि
कोविड 19 की विश्लेषक शमिका रवि.

पिछले 2 महीनों से ज़्यादा समय से शमिका (Shamika Ravi) नियमित रूप से ट्वीट के ज़रिये कोरोना वायरस (Corona Virus) आपदा को समझने समझाने की कोशिश कर रही हैं और अब उन्हें 'कोविड स्टैटिसटिशियन' कहा जाने लगा है. जानिए कि प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार मंडल में सदस्य रह चुकीं शमिका कौन हैं और कैसे काम कर रही हैं.

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मार्च में जब भारत (India) में कोरोना वायरस ने महामारी का रूप धारण किया, तब लगातार ढेर सारी सूचनाएं थीं, डेटा (Data) आना शुरू हुआ और कई सवाल खड़े हुए कि भारत में वायरस (Coronavirus in India) कितना फैलेगा? कब तक कहर बरपाएगा? कैसे चरम पर पहुंचेगा और ​कब इससे निजात मिलेगी? ये भी कि Covid-19 का कहां कितना और कैसा असर पड़ेगा. इन तमाम सूचनाओं और डेटा को ठीक से समझने और समझाने की ज़रूरत थी. ऐसे में, वॉशिंग्टन (Washington) के थिंक टैंक ब्रुकिंग्स इंस्टिट्यूट के भारत केंद्र में रिसर्च की पूर्व निदेशक रह चुकीं शमिका रवि ने ये बीड़ा उठाया.

संकट के क्षणों में, जब बहुत कुछ धुंधला नज़र आ रहा हो, तब स्पष्टता के साथ बातचीत होना और जो स्थिति सामने है, उसकी सही समझ बन जाना ज़रूरी हो जाता है. मुझे ताज्जुब नहीं है कि लोग कितने चाव से मेरे ट्वीट फॉलो कर रहे हैं.
शमिका रवि, सांख्यिकी विशेषज्ञ


ट्विटर पर शमिका को 85 हज़ार से ज़्यादा लोग फॉलो करते हैं. शमिका पिछले दो महीनों से कोविड 19 से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर लोगों को सरलता से महत्वपूर्ण पहलू समझाने का काम कर रही हैं. रोज़ एक ट्वीट से शुरूआत करने के बाद अब वह दिन में करीब 10 ट्वीट तक करती हैं. देश ही नहीं दुनिया में, कोरोना वायरस से जुड़े विश्लेषण को लेकर शमिका सबसे भरोसेमंद नामों में कैसे शुमार हुईं? और ये भी जानिए कि भारत में महामारी को लेकर उनके निजी विचार क्या हैं.



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शमिका इस तरह नियमित रूप से ट्वीट करती रही हैं.




'ये पर्सनल नहीं प्रोफेशनल काम है'
अगर आप किसी किस्म की शिक्षा देने से जुड़े हैं तो आप 9 से 5 बजे तक की नौकरी की मानसिकता के साथ काम नहीं कर सकते. यह फुल टाइम काम है. आप हर समय समस्याओं और रिसर्च में आने वाले मुद्दों पर सोचते रहते हैं. यह कहना है कोविड स्टैटिसटिशियन या 'कोविड कैल्कुलेटर' कही जाने लगीं शमिका का. सभी को जागरूक करने के इस काम में वह इतनी व्यस्त रहती हैं कि मदर्स डे पर उनके बच्चों ने उन्हें जो कार्ड गिफ्ट किया, उसमें उन्होंने अपनी मां को कंप्यूटर के सामने बैठे हुए दर्शाया.

कैसे काम करती हैं शमिका?
1. कोविड 19 से जुड़े हर तरह के डेटा या सूचना को विस्तृत अध्ययन के बाद उसे सारांश रूप में सरलता से समझाना.
2. स्पष्टता के लिए शमिका ग्राफ और ग्राफिक्स का इस्तेमाल करते हुए एक्सेसिबल फॉर्मेट में प्रस्तुत करना.
3. शमिका डेटा का तुलनात्मक अध्ययन भी करती हैं, मसलन भारत में एक्टिव केसों के बढ़ने की रफ्तार दुनिया के अन्य देशों की तुलना में कैसी है.
4. एक तय समय पर ही शमिका ट्वीट करती रही हैं. सुबह 9 से 10 बजे के बीच पहले ट्वीट में अगर वह कभी लेट भी हुईं तो माफी मांगती रही हैं.

कैसे शमिका ने शुरू किया काम?
अपने इस काम के बारे में विस्तार से बातचीत करते हुए ओपन पत्रिका को शमिका ने बताया कि उनके पति और भारतीय सांख्यिकी केंद्र में प्रोफेसर मुदित कपूर के साथ उन्होंने कोविड 19 के शुरूआती दौर में बातचीत की तो समझा कि भारत में स्थितियां कैसे आकार ले सकती हैं. मुदित की मदद के साथ शमिका ने अपना काम शुरू किया. जल्द ही यह काम उनका निजी नहीं बल्कि प्रोफेशनल मॉडल बन गया.

कई पीढ़ियां जहां एक साथ रहती हैं, ऐसा समाज और गांव व शहर के भारी अंतर के चलते भारतीय परिदृश्य काफी अलग है. फिर यहां नीतियों और फैसलों के स्तर पर भी फर्क आता है इसलिए यहां आकड़ों को समझने के लिए एक ट्रेनिंग का होना ज़रूरी दिखता है.


शमिका के इस काम की प्रेरणा?
कोविड 19 के संबंध में जब शमिका ने अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की राय और डेटा को समझा तो उन्हें इस बारे में लोगों को सरलता से समझाने की प्रेरणा मिली. उदाहरण के तौर पर, शमिका ने वॉशिंग्टन बेस्ड विशेषज्ञ रामानन लक्ष्मीनारायण के अनुमानों को समझा. मार्च के मध्य में लक्ष्मीनारायण ने अंदाज़ा दिया था कि बहुत बुरा हुआ तो भारत में 70 करोड़ लोग कोरोना संक्रमित होंगे और अगर बहुत बेहतर परिदृश्य रहा तो 20 करोड़. लक्ष्मीनाराण के मुताबिक लॉकडाउन से संक्रमण का चरम देर से आएगा लेकिन आएगा ज़रूर.

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कोविड 19 पर विश्वसनीय जानकारी देने वालों की लिस्ट में ट्विटर ने शमिका को शामिल किया.


क्या चुनौतियां देखती हैं शमिका?
भारत में कोविड 19 संबंधी डेटा को लेकर शमिका पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने साफ कहा कि 'हमारे पास लोकल डेटा नहीं है. जैसे तमिलनाडु में संक्रमण क्लस्टर से फैलता है लेकिन मुंबई की धारावी जैसी बस्ती में सघनता के कारण. इसलिए अगर हमारे पास ज़मीनी स्तर का डेटा नहीं होगा, तो भारत में संक्रमण को लेकर समझ बना पाना बेहद मुश्किल होगा. अभी हम सिर्फ उस डेटा पर काम कर रहे हैं, जो मौजूद है. अगर हमें स्थानीय स्तर पर रणनीति बनाना है, तो ज़िला स्तर तक का बेहद स्थानीय डेटा चाहिए.'

शमिका की तारीफ करने वालों में दिग्गज
सिस्टम में राजनीतिकों के साथ ही कार्यकारी फोर्स यानी ब्यूरोक्रेसी के साथ जुड़कर काम करने वाली शमिका के प्रशंसकों में नामी गिरामी लोग शुमार हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा कह चुके हैं कि शमिका अपने विश्लेषण में बहुत स्पष्ट और बेहतरीन हैं. ऐसी कई तारीफें शमिका को अक्सर सुनने को मिलती रहती हैं.

कैसे भरोसेमंद नाम बनीं शमिका?
अप्रैल में ट्विटर ने एक लिस्ट जारी की थी, जिनमें उन 29 अकांउट्स का उल्लेख था, जो दुनिया भर में कोविड 19 संकट को लेकर बराबर निगाह रखते हुए पुष्ट और बेहतरीन जानकारियां दे रहे थे. इस लिस्ट में दुनिया के विज्ञान पत्रकारों से लेकर संक्रामक रोग के विशेषज्ञों तक के ट्विटर अकाउंट शामिल थे और इन्हीं में एक नाम शमिका रवि का भी था.



कितना और कैसा है शमिका का अनुभव?
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के बाद करीब 15 साल पहले भारत लौटीं शमिका ने अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर काम किया. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद में सदस्य रह चुकीं शमिका आईएसबी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर भी रही हैं. इसके अलावा, लैंगिक असमानता, माइक्रोफाइनेंस, गेम थ्योरी और लोक स्वास्थ्य जैसे विषयों और सेक्टरों में भी शमिका काम कर चुकी हैं.

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First published: May 25, 2020, 4:06 PM IST
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