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हॉकी टीम के कोच और सपोर्ट स्टाफ, जिन्होंने पर्दे के पीछे से किया शानदार काम

भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच ग्राहम रीड टीम को जरूरी टिप्स देते हुए.

भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच ग्राहम रीड टीम को जरूरी टिप्स देते हुए.

41 साल के बाद भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश को एक ऐसी खुशी दी है, जिसकी खेलप्रमियों को वाकई जरूरत थी. भारतीय टीम के खिलाड़ियों के साथ पर्दे के पीछे जो सपोर्ट टीम लगातार उनकी मदद में जुटी थी और उन्हें बेहतर बना रही थी. जानते हैं वो लोग कौन थे और क्या थीं उनकी भूमिकाएं.

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भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने तोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर 41 बरसों से इस खेल में पदक के सूखे को खत्म कर दिया है. टीम की सफलता के लिए जहां खिलाड़ियों ने दिनरात एक कर दिया तो उनके साथ सपोर्ट स्टाफ ने भी कसकर मेहनत की. जानते हैं हॉकी टीम के सपोर्ट स्टाफ के बारे में. उनकी भूमिकाओं के बारे में.

भारतीय हॉकी टीम के चीफ कोच जहां ग्राहम रीड थे तो उनकी मदद और टीम को सपोर्ट करने के लिए 06 लोगों का स्टाफ भी था. इस स्टाफ के अलग अलग रोल थे. ये लोग हालांकि टीम के साथ अलग अलग समय पर जुड़े लेकिन कुल मिलाकर पिछले करीब 02 सालों से टीम ने इनके साथ खुद को एक अलग लेवल पर पाया.

ये हर कोई कह रहा है कि फिटनेस और दमखम के मामले में ओलंपिक में अब तक कोई भी हॉकी टीम नहीं रही, जैसी ये थी. इसके खिलाड़ियों की स्पीड तेज और दमखम वाली थी. कुल मिलाकर मौजूदा हॉकी में जिस तरह की दक्षता, क्षमता और दमखम की जरूरत होती है, वो इस टीम में पूरी तरह से थी.

चीफ कोच – ग्राहम रीड
57 साल के रीड वर्ष 2019 में भारतीय टीम से मुख्य कोच के तौर पर जुड़े थे. वो आस्ट्रेलियाई हॉकी टीम के जबरदस्त डिफेंडर और मिडफिल्डर रह चुके हैं. 1992 में बार्सिलोना ओलंपिक में रजत पदक जीत चुकी आस्ट्रेलियाई टीम के वो सदस्य थे. दो ओलंपिक समेत 130 इंटरनेशनल मैचों में खेल चुके रीड के पास खेल और प्रबंधकीय क्षमता का अपार अनुभव है.

भारतीय हॉकी टीम को मुख्य कोच ग्राहम रीड एकजमाने में आस्ट्रेलिया की नेशनल हॉकी टीम के जबरदस्त खिलाड़ी रह चुके हैं. वो दो ओलंपिक में भी बतौर खिलाड़ी शिरकत कर चुके है.

वर्ष 2009 में वह आस्ट्रेलिया की हॉकी टीम के अस्सिटेंट कोच बने लेकिन उनकी भूमिका करीब हेड कोच जैसी थी. बाद में रिक चार्ल्सवर्थ के बाद वो टीम के मुख्य कोच बने. वर्ष 2016 के ओलंपिक के बाद उन्होंने हेड कोच पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद अप्रैल 2019 में उन्होंने भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच का जिम्मा संभाला.

एनालिटिकल कोच – ग्रेग क्लार्क
भारतीय जूनियर हॉकी टीम के कोच रह चुके ग्रेग क्लार्क ने इसी साल जनवरी में भारतीय टीम के एनालिटिकल कोच की जिम्मेदारी संभाली थी. उनका अनुभव बहुत काम आया. दक्षिण अफ्रीका के क्लार्क कनाडा टीम के अस्सिटेंट रह चुके हैं.

हॉकी टीम के एनालिटिकल कोच ग्रैग क्लार्क दक्षिण अफ्रीका के हैं, वो कुछ साल पहले भारतीय जूनियर हॉकी टीम के कोच भी रहे हैं.

लैपटॉप पर भारतीय टीम के मैच दर मैच का वो एनालिसिस करके लगातार उनके प्रदर्शन में सुधार का काम करते रहे हैं. माना जा रहा है कि उनके रोल ने भारतीय टीम को ओलंपिक में काफी फायदा दिया है. हर मैच के बाद वो टीम के साथ बैठकर हर एंगल और डाटा के साथ उनके सारे पहलुओं पर चर्चा करते थे.

कोच – शिवेंद्र सिंह
उत्तर प्रदेश के सीतापुर में पैदा हुए शिबेंद्र सिंह भारतीय हॉकी टीम की ओर से एशियाई खेलों समेत तमाम प्रतियोगिताओं में शिरकत कर चुके हैं. वह 38 साल के हैं. टीम जब फील्ड पर ट्रेनिंग करती है तो वो उसको मदद करते हैं. टीम के साथ उनका रोल खिलाड़ियों की मदद करना और उनकी खामियों को दूर करना है.

कोच – पीयूष कुमार दुबे
33 साल के पीयूष दुबे वर्ष 2019 में भारतीय टीम के साथ सहायक कोच की भूमिका में जुड़े. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट पीयूष भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच भी हैं. उनका काम भी फील्ड में ट्रेनिंग के दौरान भारतीय टीम की मदद करना रहा है.

भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों की फिटनेस और दमखम को एक नए लेवल पर पहुंचाने वाले रॉबिन एर्केट ने अपना काम बखूबी किया है. वो टीम को लगातार हाई इंटेंस ट्रेनिंग से लेकर फिटनेस की अन्य ट्रेनिंग कराते थे.

साइंटिफिक एडवाइजर – रोबिन एर्केल
असल में रॉबिन एंथनी वेबस्टर एर्केल टीम के उम्दा ट्रेनर रहे हैं. उनके आने के बाद वाकई भारतीय टीम की फिटनेस अलग लेवल पर पहुंच गई. कुछ समय पहले हॉकी टीम के डिफेंडर रुपिंदर पाल सिंह ने एक इंटरव्यू में एर्केल की कसकर तारीफ की. उनका कहना था कि जिस तरह वो हमें फिजिकली ट्रेंड करते हैं, उससे हममें जबरदस्त बदलाव आया है, हमारी क्षमता भी बढ़ी है और दमखम भी.
एर्केल टीम को हफ्ते में 03 बार पॉवर जिम सेशन कराते थे. इसमें हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग और वेट ट्रेनिंग भी शामिल होती थी. साथ ही ये एर्केल टीम के मुख्य कोच के साथ मिलकर टीम की डायट पर भी निगाह रखते थे.

फिजियोथेरेपिस्ट – रतिनासामी बोस कन्नन
हॉकी ऐसा खेल है जहां लगातार खिलाड़ियों को मांसपेशियों के खिंचाव और दूसरी तरह की दिक्कतों के अलावा स्पोर्ट्स इंजुरी का सामना करना पड़ता है. इस मामले में बोस कन्न खिलाड़ियों के लिए एक अच्छे फिजियोथेरेपिस्ट का काम करते रहे.

वीडियो एनालिस्ट – अशोक कुमार
30 साल के युवा अशोक कुमार अंडर 18 भारतीय हॉकी टीम से खेल चुके हैं. इन दिनों वो भारतीय टीम के वीडियो एनालिस्ट हैं. इसमें उन्हें महारत हासिल है. चूंकि वो खिलाड़ी भी रहे हैं, लिहाजा मैच के वीडियो के जरिए खिलाड़ियों को जरूरी टिप्स तो देने का काम करते ही रहे हैं, साथ ही मैचों के दौरान विपक्षी टीमों की रणनीति और मूव्स को वीडियो के जरिए बखूबी एनालाइज करते हैं.

मसाजर – अरुप नास्कर
38 साल के नास्कर टीम के खिलाड़ियों को नियमित तौर पर मसाज देकर उन्हें चुस्त दुरूस्त और फुर्तीला बनाने का काम करते रहे हैं. तोक्यो ओलंपिक में भी वो टीम के साथ इसी सपोर्ट के लिए गए थे.

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