आज़ादी के इस अधिनियम के साथ भारत के बंटवारे पर लगी थी मुहर

भारत को 15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिली थी और पाकिस्तान को 14 अगस्त, लेकिन आज़ादी की ये तारीख सहित तमाम प्रावधान तय करने वाला ब्रिटिश कानून 18 जुलाई 1947 को लागू कर दिया गया था.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 10:39 AM IST
आज़ादी के इस अधिनियम के साथ भारत के बंटवारे पर लगी थी मुहर
नेहरू व जिन्ना के साथ माउंटबैटन.
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Updated: July 18, 2019, 10:39 AM IST
अंग्रेज़ों से आज़ादी हासिल करने के भारत के लंबे संघर्ष के बाद 18 जुलाई 1947 को अंग्रेज़ी हुकूमत ने इस अधिनियम पारित कर दिया था, जिसके चलते करीब 1 महीने बाद 15 अगस्त को भारत आज़ाद हुआ. लेकिन, इस अधिनियम पर मुहर लगते ही देश का बंटवारा हो गया था. भारत के दो टुकड़े हो गए थे और पाकिस्तान नया देश बन गया था. इस अधिनियम को इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 के नाम से जाना गया, जिस पर 18 जुलाई 1947 को शाही मुहर लगी थी और इसके प्रावधान लागू हो गए थे. इस एक्ट के पीछे की कहानी और इसके प्रावधानों के बारे में आप कितना जानते हैं?

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इस एक्ट के लागू होने से पहले काफी समय तक भारतीय नेताओं के साथ चर्चा का दौर जारी था. अंग्रेज़ी हुकूमत के नुमाइंदे लॉर्ड माउंटबैटन भारत को आज़ादी देने के मसौदे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, मुस्लिम लीग और सिख समुदाय के नेताओं के साथ चर्चा करने के बाद इस तरह के प्रस्तावों के साथ तैयार थे, जिसे 3 जून प्लान या माउंटबैटन प्लान कहा जाता है. इस प्लान पर अंग्रेज़ी हुकूमत यानी ब्रिटेन के राजा जॉर्ज छठे ने मुहर लगाकर भारत को बंटवारे की शर्त पर आज़ाद किए जाने का कानून बना दिया था.

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3 जून प्लान में ये था खास
माउंटबैटन के तैयार किए 3 जून प्लान में ब्रिटिश सरकार के ये खास प्रस्ताव शामिल थे :

* ब्रिटिश सरकार ब्रिटिश हुकूमत के अधीन भारत के बंटवारे के सिद्धांत को मंज़ूर करती है.
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* आने वाली सरकारों को 'डोमिनियन' दर्जा मिलेगा यानी भारत और पाकिस्तान को कॉमनवेल्थ राष्ट्रों का दर्जा दिए जाने के साथ ही ब्रिटिश राज के तहत बनने वाले राष्ट्र का दर्जा. (ये एक तरह से आधे अधूरे आज़ाद देश जैसा दर्जा था, जिसे बाद में खत्म किया गया.)
* दोनों देश अपना अलग संविधान बना सकेंगे.
* दोनों देशों को स्वायत्ता और संप्रभुता दी जाएगी.

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भारत पाकिस्तान बंटवारे की घोषणा के बाद दोनों तरफ से लोगों ने पलायन किया था. ट्रेनों में बेतहाशा भीड़ सफर करती थी. इतिहास के पन्ने गवाह हैं कि इस बंटवारे में किस कदर खून खराबा हुआ था. (तस्वीर : डॉन साभार)


फिर इंडिपेंडेंस एक्ट में बने ये प्रावधान
* ब्रिटिश भारत को पूरी तरह संप्रभु दो टुकड़ों भारत और पाकिस्तान में बांट दिया जाएगा, 15 अगस्त 1947 से दोनों देश स्वतंत्र होंगे.
* इन दोनों देशों के बीच बंगाल और पंजाब राज्यों का बंटवारा होगा.
* दोनों नए देशों में ब्रिटिश ताज के प्रति​निधि के तौर पर गवर्नर जनरल के दफ्तर की व्यवस्था होगी.
* दोनों नए देशों की संवैधानिक असेम्बलियों पर पूरा वैधानिक अधिकार दिया जाएगा.
* 15 अगस्त 1947 से प्रिंसली स्टेट्स पर ब्रिटिश आधिपत्य खत्म हो जाएगा और ये स्टेट्स अपने अपने देश के अधीन होकर स्वतंत्र होंगे.
* ब्रिटिश राजशाही के टाइटल 'भारत का राजा' का इस्तेमाल खत्म हो जाएगा. (हालांकि ये बाद में 22 जून 1948 को किंग जॉर्ज के उद्बोधन के बाद हुआ).
* इस एक्ट के तहत दोनों देशों के बीच सैन्य बलों और साझा संपत्ति आदि के बंटवारे के संबंध में भी प्रावधान हैं.

और ये थी पीछे की कहानी
इतिहासकारों की मानें तो भारत के पहले प्रधानमंत्री के गौरव के लिए जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना की महत्वाकांक्षाओं का टकराव बराबर रहा. इस टकराव की शुरूआत में ही ब्रिटिश हुकूमत ने कांग्रेस की कलह को भांप लिया था और देश के बंटवारे जैसे मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई. गांधीवादियों ने इसे अंग्रेज़ों की 'फूट डालो और राज करो' नीति करार दिया. लेकिन, इस मुद्दे की हवा ने देश में सांप्रदायिक भावना भड़काते हुए दो ध्रुव बनाए और राजनेताओं ने भी भारत के बंटवारे के प्लान को शह दी. अंग्रेज़ों ने चतुराई से बंटवारे को भारत की आज़ादी की ज़रूरी शर्त और एकमात्र रास्ता बना दिया.

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First published: July 18, 2019, 10:36 AM IST
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