इजरायल की पार्लियामेंट है तकनीक और सुरक्षा की दृष्टि से बेजोड़ बिल्डिंग

इजरायल की शानदार पार्लियामेंट बिल्डिंग, जो 09 साल में बनकर तैयार हुई.

इजरायल की शानदार पार्लियामेंट बिल्डिंग, जो 09 साल में बनकर तैयार हुई.

इजरायल में अब नई सरकार सत्ता संभालने जा रही है. ऐसे में जानिए कि कैसी है इजरायल की शानदार पार्लियामेंट बिल्डिंग. शायद तकनीक और सुरक्षा की दृष्टि से ये दुनिया की सबसे बेजोड़ संसदों में एक है. इसे एक अमीर यहूदी के दान से बनाया गया था.

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अब जबकि इजराइल (Israel) में सत्ता परिवर्तन तय हो गया है और दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के नेता नेफ्ताली बेनेट (Naftali Bennett) नए प्रधानमंत्री होंगे. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि इजरायल की संसद (Parliament of Israel), जिसको कनासेट कहा जाता है, वो कैसी है. किस तरह काम करती है. उसके पास कितने अधिकार हैं, कनासेट वो लंबी-चौड़ी खूबसूरत सी बिल्डिंग है, जो एक धनी ब्रिटिश यहूदी (British Jew) के दान से बनी. ये खूबसूरत भी है और खासी सुरक्षित भी.

इजरायल जब लंबे संघर्ष के बाद एक देश के रूप में वर्ष 1948 में सामने आया. कहा जा सकता है कि भारत और इजरायल ने एक देश के तौर पर अपनी असली यात्रा आसपास ही शुरू की थी. भारत के पास तो अंग्रेजों की दी हुई संरचना थी लेकिन इजरायल को अपना सबकुछ आमतौर पर शून्य से ही शुरू करना था. उस समय उनके पास कोई संसद भवन नहीं था.

1949 में इजरायल में पहली बार चुनाव हुए तो वहां की आबादी करीब साढ़े छह लाख थी. पहली बार राष्ट्रीय चुनाव में 120 सांसद चुने गए. हालांकि अब भी इजरायल की संसद में चुने हुए प्रतिनिधियों की संख्या 120 ही है लेकिन अब इसको बढाने पर विचार हो रहा है. पिछले 71 सालों में इजरायल का नक्शा बदला और आबादी भी. अब वहां की आबादी करीब 90 लाख है. कई सेक्टर्स में इजरायल दुनियाभर में एक ताकत की उभरा है, उसे मिसाल माना जाता है.

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क्यों कहा जाता है इसे कनासेट

इजरायल बनने के बाद दुनियाभर से यहूदी वहां आकर बसे. उन्होंने इसे एक देश का रूप दिया. इजरायली संसद को कनासेट कहे जाने की भी कहानी है. दरअसल प्राचीन इजरायल में 120 विद्वानों और संतों की एक सभा थी, जो देश का संचालन करती थी, इसे कनासेट कहते थे. उसी तर्ज पर इजराइल की संसद का नाम पड़ा कनासेट. ये पश्चिमी यरूशलम की इस पहाड़ी पर है.

एक यहूदी के दान से बनी ये बिल्डिंग



आप हैरान हो सकते हैं कि इजरायल में कनासेट के निर्माण के लिए कई लोगों ने नहीं बल्कि ब्रिटेन के अकेले शख्स ने इतना पैसा दान दिया कि आराम से बनकर तैयार हो गई. ये शख्स थे जेम्स डी रॉथ्सचाइल्ड. जो ब्रिटेन में सांसद थे और मशहूर रॉथ्सचाइल्स परिवार से ताल्लुक रखते थे. इस परिवार का तब वर्ल्ड बैंकिंग में खासा रूतबा था. पैसे की तो उनके पास कमी ही नहीं थी. यहूदी होने के नाते इजरायल को लेकर उनका इस देश के प्यार भी स्वाभाविक था.

रॉथ्सचाइल्स ने इस संसद भवन के निर्माण के लिए जब 60 लाख इजरायली पाउंड की रकम देने की घोषणा की तो लोग हैरत में आ गए, क्योंकि ये उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी रकम थी. तब इजरायल में चलने वाली मुद्रा को इजरायली पाउंड कहते थे. हालांकि 1980 से इस मुद्रा का नाम बदलकर सीकल रख दिया गया. एक सीकल भारत के 20.14 रुपए के बराबर है.

नौ साल बाद ये शानदार भवन तैयार हुआ 

1957 में कनासेट बिल्डिंग पर काम शुरू हुआ. कई बड़े-बड़े आर्किटैक्ट के बीच जोसेफ क्लारबीच को चुना गया. हालांकि उस समय इजरायली यूनानी शैली का शानदार भवन अपने संसद के लिए बनवाना चाहते थे. इसे बनने में नौ साल लग गए. तब तक इजरायल में कई बार चुनाव हो चुके थे और कई सरकारें बन चुकी थीं. तब इजरायल के चुने हुए सांसद एक छोटी सी ज्यूइस एजेंसी बिल्डिंग में बैठते थे.

20 हजार स्क्वयेर मीटर में बनी ये बिल्डिंग में मुख्य हाल के अलावा कई छोटे हाल, कमरे, मीटिंग रूम, विंग्स, लाइब्रेरी सभी कुछ है

जब इजरायल की चौकोर आकार वाली भव्य सफेद रंग की बिल्डिंग संसद भवन के लिए तैयार हुई तो ये वाकई सुंदर थी. इसकी सुरक्षा के साथ इसके अंदर की साजसज्जा पर खास ध्यान दिया गया. तब 20 हजार स्क्वयेर मीटर में बनी ये बिल्डिंग में मुख्य हाल के अलावा कई छोटे हाल, कमरे, मीटिंग रूम, विंग्स, लाइब्रेरी सभी कुछ है. इसमें बाहर की ओर 20 मोटे खंबे हैं तो हर साइड में 15-15. अब भी जब कोई सैलानी आता है तो उसे इस भवन में खासतौर पर घुमाया जाता है. अंदर के रंगों की साजसज्जा और सजावट की भी खासी तारीफ की जाती है.

सुरक्षा के लिए खास एक सेक्यूरिटी यूनिट

ये पांच मंजिला भवन अलग ही नजर आता है. इसकी सुरक्षा दुनिया में बेहतरीन मानी जाती है. यूं भी इजरायल के सेक्यूरिटी सिस्टम को दुनिया में सबसे उम्दा आंका जाता है.

शायद ही कोई संसद इतनी चाकचौबंद और नई हाईटेक तकनीक वाली सुरक्षा से युक्त होगी, जितनी ये. इसकी सुरक्षा के लिए खासतौर पर एक डेडीकेटेड गार्ड यूनिट है, जिसे प्रोटेक्टिव सेक्यूरिटी यूनिट कहा जाता है. ये भवन के बाहर आधुनिक शस्त्रों के साथ तैनात रहते हैं. ये रोज एक सेरेमनी करते हैं. जिसे खासतौर पर देखने के लिए लोग पहुंचते हैं. अंदर की व्यवस्था यूजर्स करते हैं, जिसमें दर्शकों से लेकर मेहमानों की आगवानी, उनके बैठने की व्यवस्था आदि.

कनासेट में कुल 120 सांसद बैठते हैं. हालांकि इजरायल की संसद में कमेटियों का भी खासा महत्व है

वहां सांसदों को एमके बोला जाता है

जिस तरह हम लोग अपने सांसदों को मेंबर ऑफ पार्लियामेंट(एमपी) कहते हैं. उसकी तरह इजरायल के सांसदों को मेंबर ऑफ कनासेट यानि एमके कहते हैं. कनासेट यानि इजरायली संसद ही कानून बनाती है. हर संसद का कार्यकाल चार साल का होता है. वहां भी संसद चलाने के लिए स्पीकर और डिप्टी स्पीकर होते हैं. 18 साल के ऊपर के लोग सरकार को चुनने के लिए वोट देते हैं. लेकिन इजरायल के संसद में खासबात वहां की कमेटियां हैं. ये कमेटियां काफी ताकतवर मानी जाती हैं.

यहां भी कई पार्टियां हैं. पिछली सरकार के दौरान कनासेट में दस पार्टियां थीं, जिसमें छह गठबंधन में थीं. हालांकि पिछले तीन कार्यकाल से कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पा रही है. छह साल में तीन बार चुनाव हो चुके हैं. यहां भी मंत्रियों और उपमंत्रियों की संख्या खासी होती है. लगभग हर चौथा सांसद मंत्री या डिप्टी मिनिस्टर होता है. यहां भी लेबर और लेफ्ट पार्टी है लेकिन आमतौर पर पिछले चुनावों में धार्मिक कही जाने वाली लिकुड पार्टी का दबदबा मजबूत रहा है, जिससे बेंजामिन नेतन्याहू प्रधानमंत्री रहे हैं. यहां भी संसद में हंगामा होता है.

इजरायल की संसद कनासेट की खास बात ये है कि ये अपनी खपत की सारी बिजली सोलर पैनल्स के जरिए बनाती है. इजरायल के संसद भवन को दुनिया की सबसे ग्रीनेस्ट पार्लियामेंट कहा जाता है

समय के साथ कनासेट कैंपस और बड़ा किया जा चुका है. अब ये 90 हजार स्क्वेयर मीटर तक फैल चुकी है. इसे और भी बड़ा करने की योजना है. जेरूशलम के जिस इलाके में संसद भवन है, वहीं काफी हद तक सारे महत्वपूर्ण संस्थान फैले हैं.

सोलर पैनल की बिजली से चलता है कनासेट 

अगर आप गौर से इसकी तस्वीरें देखें तो इसके आगे पीछे और कई मंजिलों पर फैले हुए सोलर पैनल नजर आते हैं. यहां भी भारत की तरह सूरज काफी रोशनी और गरमी देता है-यही सोलर पैनल इस पूरे भवन की बिजली जेनरेट करते हैं, जिसमें बिल्डिंग की हीटिंग और एसी प्रणाली शामिल है. कनासेट के डायरेक्टर जनरल ने पिछले दिनों एक बयान में कहा था, हमें गर्व है कि कनासेट दुनिया की सबसे ग्रीन पार्लियामेंट है. ये भवन पानी और ऊर्जा बचत के 13 प्रयासों पर भी फोकस कर रहा है. उन्हें उम्मीद है कि इससे उन्हें पांच साल के भीतर ही पांच लाख डॉलर ($500,000) की बचत होगी.

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