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Explained: भारत की K मिसाइल फैमिली क्या है और कितनी अहम है?

भारत ने हाल में शौर्य का सफल ट्रायल किया. (File Photo)
भारत ने हाल में शौर्य का सफल ट्रायल किया. (File Photo)

पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) के साथ पिछले कुछ समय से जिस तरह के तनावपूर्ण हालात (Border Tension) बने हुए हैं, ऐसे समय में भारत का परमाणु क्षमता वाली (Nuclear Capacity) समुद्र बेस्ड खास मिसाइलों की लॉंचिंग और सफल परीक्षण करना अहम हो जाता है.

  • News18India
  • Last Updated: October 5, 2020, 9:57 AM IST
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भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को देश और दुनिया में भारत के मिसाइल मैन के रूप में छवि हासिल हुई. उन्हीं की याद या सम्मान में भारत की 'K मिसाइल फैमिली' का कोडनेम रखा गया है, जिन्हें न्यूक्लियर सबमरीन की अरिहंत श्रेणी से लॉंच किया जाता रहा है. अस्ल में, हाल में भारत ने अपनी परमाणु क्षमता वाली शौर्य मिसाइल का सफल ट्रायल किया है. इसके बाद से ही भारत की मिसाइलों को लेकर एक दिलचस्पी बनी हुई है.

सबमरीन के समानांतर लैंड बेस्ड यह K-15 मिसाइल है. ये जो K मिसाइल फैमिली है, रणनीतिक लिहाज़ से कितनी अहम है? यह फैमिली अस्ल में क्या है और इनके बारे में जानने लायक तमाम बातें क्या हैं?

मिसाइलों की K फैमिली क्या है?
ये सबमरीन लॉंच्ड बैलेस्टिक मिसाइलें (SLBMs) होती हैं. इन्हें रक्षा रिसर्च और विकास संस्थान (DRDO) ने विकसित किया है और इनका नाम डॉ. कलाम के नाम पर रखा गया है. इन मिसाइलों के विकास का कार्यक्रम 1990 के दशक में शुरू हुआ था और यह भारत की उस महत्वाकांक्षा का हिस्सा था, जिसमें देश को ज़मीन, समुद्र और हवा से लॉंच की जा सकने वाली न्यूक्लियर क्षमता की मिसाइलें विकसित करना थीं.
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K फैमिली के वैरिएंट्स
अब चूंकि ये मिसाइलें सबमरीन यानी पनडुब्बियों से लॉंच की जा सकती हैं, इसलिए अपेक्षाकृत हल्की, छोटी और पकड़ में न आने वाली हैं (अग्नि सीरीज़ वाली ज़मीनी मिसाइलों की तुलना में). हालांकि K फैमिली की ज़्यादातर मिसाइलें सबमरीन लॉंच ही हैं, लेकिन इसके ज़मीनी और हवाई वैरिएंट भी डीआरडीओ ने विकसित किए हैं. जैसे हाल में जिसका ट्रायल हुआ, वह शौर्य मिसाइल, SLBM K-15 सागरिका का लैंड वैरिएंट है, जिसकी रेंज कम से कम 750 किलोमीटर है.

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INS अरिहंत की फाइल तस्वीर.


कितनी है K-फैमिली की रेंज?
भारत पहले कई बार K-4 मिसाइलों का सफल परीक्षण कर चुका है, जिनकी रेंज 3500 किलोमीटर तक रही है. खबरों की मानें तो K-5 और K-6 कोडनेम वाली जो मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, उनकी रेंज 5000 और 6000 किलोमीटर तक होगी. K-15 और K-4 मिसाइलों का शुरूआती विकास कार्यक्रम 2010 के दशक में शुरू हो गया था.

रणनीतिक अहमियत क्या है?
भारत की मिसाइलों को लेकर नीति यह है कि वह इनसे 'हमले की पहल' नहीं करेगा. इसके बावजूद, दुश्मन को जवाब देने के लिहाज़ से और सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए त्रिस्तरीय न्यूक्लियर शक्ति के विकास में इन मिसाइलों का होना महत्वपूर्ण है. समुद्र बेस्ड, पानी के अंदर न्यूक्लियर क्षमता से लैस हमलावर मिसाइलें होने से भारत के पास परमाणु शक्ति के लिहाज़ से ताकत दोगुनी हो जाती है.

इन मिसाइलों की अहमियत यह भी है कि ये न केवल पहले हमले में सर्वाइव करती हैं बल्कि जवाबी हमले में भी इस्तेमाल की जा सकती हैं. अरिहंत क्लास की सबमरीनों के ज़रिये ये परमाणु विस्फोटक वाली मिसाइलें लॉंच की जा सकती हैं.

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क्या है इन मिसाइलों की ज़रूरत?
भारत के लिए इन मिसाइलों को महत्व तो है, लेकिन इनकी ज़रूरत क्यों है? अस्ल में, पाकिस्तान और चीन दोनों ही पड़ोसी और दुश्मन देशों के साथ भारत समुद्र में भी युद्ध के मोर्चे पर है. एक तरफ, चीन परमाणु क्षमता वाली कई सबमरीन विकसित कर चुका है इसलिए भारत के लिए जवाबी कार्रवाई के लिए K-फैमिली की मिसाइलें बेहद ज़रूरी और अहम हो जाती हैं. दूसरी तरफ, पाकिस्तान की तुलना में भारत का पलड़ा भारी हो जाता है.

गौरतलब है कि नवंबर 2018 में आईएनएस अरिहंत पूरी तरह ऑपरेशनल हो गया था. तब भारत के प्रधानमंत्री ने कहा था कि जो देश परमाणु शक्ति को ब्लैकमेलिंग और धमकी के लिए इस्तेमाल करते हैं, उन्हें जवाब देने के लिए यह बहुत बड़ी सफलता है. यह भी अहम है चूंकि K फैमिली की मिसाइलें गोपनीय प्रकृति के प्रोजेक्ट हैं इसलिए इनके बारे में बहुत सी जानकारियां उजागर नहीं की गई हैं.
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