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नेहरू सरकार का वो मंत्री, जिसने सोमनाथ मंदिर बनाने में मुख्य भूमिका निभाई

1988 में जारी एक डाक टिकट पर केएम मुंशी. (तस्वीर विकिकॉमन्स से साभार)

1988 में जारी एक डाक टिकट पर केएम मुंशी. (तस्वीर विकिकॉमन्स से साभार)

कन्हैयालाल माणेकलाल मुंशी (K.M. Munshi) के नाम से अगर आप अनजान हैं तो आपको जानना चाहिए कि आधुनिक भारत के निर्माताओं में नेहरू, पटेल जैसे नामों के साथ मुंशी एक ज़रूरी नाम हैं. भारतीय विद्या भवन हो या विश्व हिंदू परिषद (VHP) जैसी संस्थाएं या पृथ्वी वल्लभ जैसी किताबों को आप जानते हैं, लेकिन इनके संस्थापक और लेखक को कितना जानते हैं?

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    अयोध्या में राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) निर्माण के लिए तैयारियां ज़ोरों पर हैं. आगामी 5 अगस्त को शिलान्यास (Foundation Ceremony) कार्यक्रम में प्रधानमंत्री (PM Modi) के पहुंचने की खबरों के बीच गुजरात के सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) के पुनर्निर्माण की कहानी याद की जाना चाहिए. जब पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pt. Nehru) के ​न चाहने के बावजूद उन्हीं की सरकार में मंत्री रहे लेखक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी केएम मुंशी ने सदियों पुराने मंदिर के पुनरुद्धार के लिए पूरा ज़ोर लगा दिया था.

    अस्ल में, राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जब बहसों का दौर जारी था, तब जो जिरह हुई, उससे केएम मुंशी के सोमनाथ मंदिर के लिए किए गए प्रयासों की यादें ताज़ा हुई थीं. अब जब राम मंदिर के निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, तब जानना चाहिए कि मुंशी ने किस तरह गुजरात के एक तीर्थ के लिए हर संभव कोशिश की थी और मुंशी के बारे में रोचक फैक्ट्स भी जानें.

    सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने पहल की थी और उनके अवसान के बाद मुंशी ने इस काम को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. अपनी किताब 'Pilgrimage to Freedom' में मुंशी ने इस मंदिर के पुनर्निर्माण के बारे में विस्तार से लिखा है.

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    1950-51 में सोमनाथ मंदिर का कायाकल्प हुआ था.


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    सोमनाथ मंदिर पर नेहरू और पटेल का मत
    1947 में एक सभा में पटेल ने क्षतिग्रस्त मंदिर की पूरी मरम्मत करवाकर फिर शोभायमान किए जाने की घोषणा कर दी. लेकिन मुंशी के पेपर्स के हवाले से कई बार लिखा गया है कि नेहरू ने इसे भारत का गौरवशाली प्रतीक बताया था लेकिन ये भी कहा था कि इसका पुनरुद्धार किया जाना हिंदुत्व को पुनर्जीवन देने की कोशिश जैसा था. पटेल, मुंशी और नेहरू के अलग मत साफ कर रहे थे कि सबके लिए 'भारत का विचार' अलग था.

    नेहरू को मुंशी का जवाब
    पटेल और महात्मा गांधी के बीच सोमनाथ से जुड़ी चर्चा का सार ये निकला था कि बापू के कहने पर मंदिर निर्माण के लिए फंड जनता से जुटाया जाना था, जिसके लिए बाद में एक न्यास बनाया गया था, जिसमें मुंशी प्रमुख भूमिका में रहे. बहरहाल, इस घटनाक्रम के बाद मुंशी ने नेहरू के सवालों और बयानों के जवाब में लिखा था :

    मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत का सामूहिक अवचेतन मन इस योजना से खुश है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत सरकार प्रायोजित होने जा रहा है... मैं हिंदुत्व से जुड़ी कुछ दकियानूसी बातों को नकारता रहा हूं और इसके कुछ पहलुओं को अपने लेखन व काम से आकार देता रहा हूं. मुझे विश्वास है कि इस कदम से भारत आधुनिक स्थितियों में काफी एडवांस देश के रूप में उभरेगा.


    दलीलों से मुंशी को डॉ. राजेंद्र प्रसाद और वीपी मेनन जैसे कई व्यक्तित्वों का समर्थन मिला और सोमनाथ का काम सुचारू रूप से आगे बढ़ा. 1952–53 में नेहरू सरकार में कृषि एवं खाद्य मंत्री रहे मुंशी के बारे में कुछ दिलचस्प फैक्ट्स भी जानने लायक हैं.

    गांधीवाद से गांधीवाद विरोध तक
    मुंशी गांधीवादी कहे जाते रहे क्योंकि उन्होंने महात्मा गांधी के प्रभाव से ही बॉम्बे विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था और असहयोग आंदोलन में कूदे थे. लेकिन जब भारत विभाजन और अलग पाकिस्तान की मांग उठी तो मुंशी ने ​अहिंसा का दामन छोड़कर नागरिक युद्ध का रास्ता अपनाने का पक्ष लिया. 1941 में उन्होंने मतभेदों के चलते कांग्रेस छोड़ी​ लेकिन महात्मा गांधी के कहने पर उन्हें 1946 में फिर कांग्रेस में लिया गया.

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    मुंशी की हस्ती बताते रोचक किस्से
    ● महात्मा गांधी के सहयोग से मुंशी ने 1938 में भारतीय विद्या भवन नाम से एक शैक्षणिक ट्रस्ट की स्थापना की थी, जो अब एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था बन चुकी है. मुंबई में जहां भारतीय विद्या भवन स्थित है उस मार्ग का नाम भी केएम मुंशी मार्ग है.
    ● गुजराती साहित्य के मशहूर लेखक रहे मुंशी ने हिंदी और अंग्रेज़ी में भी रचनाएं कीं. घनश्याम व्यास नाम से भी उन्होंने काफी साहित्य रचा. उनके साहित्य पर कई फिल्में भी बनीं. सोहराब मोदी निर्मित पृथ्वी वल्लभ ऐसी ही एक चर्चित फिल्म रही.
    ● मुंशी के उपन्यास पृथ्वी वल्लभ पर ​जब 1924 में मणिलाल जोशी ने पहली बार फिल्म बनाई थी, तब इस कथानक में हिंसा और सेक्स की भरमार के लिए महात्मा गांधी ने इसकी आलोचना की थी.
    ● निबंधकार और चित्रकार लीलावती मुंशी उर्फ लीलावती शेठ मुंशी की दूसरी पत्नी थीं, जो कांग्रेस की सदस्य और राज्यसभा सदस्य भी रही थीं.
    ● मुंशी मशहूर शिक्षाविद रहे और उन्होंने भारतीय विद्या भवन और भवन्स कॉलेज के अलावा कई शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना की थी. बॉम्बे यूनिवर्सिटी के फेलो के साथ कई संस्थाओं के चेयरमैन रहे थे.
    ● आज़ाद भारत में कांग्रेस के सदस्य रहे मुंशी बाद में स्वतंत्र पार्टी और जनसंघ से जुड़े. कम ही लोग जानते हैं कि विश्व हिंदू परिषद के संस्थापकों में भी मुंशी का नाम शुमार है.

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