US: उपराष्ट्रपति उम्मीदवार कमला हैरिस को हमेशा रहा है भारतीय जड़ों पर गर्व, नाना के विचारों का असर

US: उपराष्ट्रपति उम्मीदवार कमला हैरिस को हमेशा रहा है भारतीय जड़ों पर गर्व, नाना के विचारों का असर
भारतीय मूल की कमला हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी चुनावों में उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया

कमला हैरिस (Kamala Harris) को डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी चुनावों (US President Election) में उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. वो भारतीय मूल की हैं. वो चेन्नई में रहने वाले अपने नाना से प्रभावित रही हैं. काफी हद तक उनके विचारों पर नाना और मां की झलक भी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 12, 2020, 9:24 AM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US President Election) में भारतीय मूल की कमला हैरिस (Kamala Harris) को डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. इस पद के लिए चुनाव लड़ने वाली वो पहली अश्वेत महिला होंगी. उनकी जड़ें भारत में रही हैं और उन्होंने इसे हमेशा जाहिर भी किया है.


कमला कैलिफ़ोर्निया की अटॉर्नी जनरल रह चुकी हैं और वो पुलिस सुधार की बहुत बड़ी समर्थक हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे बाइडन ने उन्हें, 'बहादुर योद्धा और अमरीका के सबसे बेहतरीन नौकरशाहों में से एक' क़रार दिया.


कमला हैरिस के नाना चेन्नई के ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनका नाम पीवी गोपालन था. वो भारतीय लोक सेवा में अधिकारी थे. उन्होंने ज़ाम्बिया में भी सरकार के लिए सेवाएं दी थीं. गोपालन की बड़ी बेटी श्यामला अमेरिका में पढ़ाई के लिए गई थीं. कमला उन्हीं श्यामला की बेटी हैं.

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एक कार्यक्रम में भाषण देतीं कमला हैरिस.

कमला की मां कैंसर की वैज्ञानिक थीं
कमला हैरिस की मां श्यामला कैंसर के क्षेत्र में वैज्ञानिक थीं. पिता डोनाल्ड हैरिस जमैकन थे. कमला का जन्म अमेरिका में हुआ. हालांकि बाद में माता-पिता में तलाक हो गया. परिवार में हमेशा भारतीय संस्कारों की प्रधानता रही. ये संस्कार कमला में भी गहरे तक आए. कमला आमतौर पर खुद के भारतीय मूल का होने के कारण गर्व करती हैं. उन्होंने इसे कभी छिपाने की कोशिश नहीं की.



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बचपन से मिले प्रोग्रेसिव विचार
कमला ने 2019 के अपने एक मेमोइर 'द ट्रुथ्स वी होल्ड' में अपने बचपन की यादें साझा करते हुए लिखा है कि उनके नाना गोपालन स्टेनोग्राफर से बड़े ओहदों तक पहुंचे थे. वह स्वतंत्रता संग्राम में जुड़े थे लेकिन खुलकर नहीं. वह नौकरी में रहते हुए जो कर सकते थे, करते थे. मद्रास के बाद दिल्ली, बंबई और कलकत्ता तक में रहकर उन्होंने सेवाएं दीं.

कमला अक्सर भारत आती रही हैं
1970 के दशक में जब श्यामला का तलाक हुआ, तब वो अपनी दोनों बेटियों कमला और माया को अक्सर भारत लेकर आया करती थीं. 1964 में जन्मीं कमला अपने बचपन में नाना के रिटायर दोस्तों के साथ टहलने के वक्त साथ रहा करती थीं और लोकतंत्र की बहाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर उस वक्त प्रोग्रेसिव विचार सुना करती थीं. कमला के अनुसार उनके नाना नागरिक अधिकारों के ज़बरदस्त हिमायती थे और समानता और सम्मान की लड़ाई के लिए वकालत करते थे.

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कमला के मुताबिक उनके नाना गोपालन एक ज़िंदादिल और तरक्कीपसंद व्यक्ति थे, जिन्होंने बच्चों को ताश का खेल पोकर भी सिखाया और नानी से छुपकर मन मुताबिक खाना भी, भले ही वह शाकाहार न हो. कमला ने एक इंटरव्यू में कहा था 'मेरे नाना दुनिया में मेरे सबसे पसंदीदा व्यक्तित्वों में रहे हैं'.


नाना से प्रेरित मां भी रहीं कमला की प्रेरणा
कमला की मां श्यामला ने अपनी मर्ज़ी से 1960 के दशक में जमैका निवासी डोनाल्ड से शादी की थी. परिवार की नाराज़गी इस बात से नहीं थी कि किसी अफ्रीकी से शादी की बल्कि इसलिए रही थी कि परिवार को इस बारे में पहले बताया नहीं गया. श्यामला उस समय उन बेहद कम भारतीय महिलाओं में थीं, जो विदेश जाकर उच्च शिक्षित थीं और अपने फैसले खुद लिया करती थीं.

कमला के मामा बालचंद्रन के हवाले से एलए टाइम्स ने जो रिपोर्ट छापी है, उसके मुताबिक श्यामला पर अपने पिता गोपालन के व्यक्तित्व और मूल्यों का बड़ा प्रभाव था और वही श्यामला से कमला को भी मिला. श्यामला कुशल गायिका थीं और कम उम्र से ही रेडियो पर गाती थीं. उस वक्त उन्हें मिलने वाले रुपये गोपालन श्यामला को ही रखने को कहते थे. अमेरिका में पढ़ाई के दौरान उसके बाद 1960 के दशक में श्यामला 'काले' लोगों के अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय रहीं और समानता के लिए लड़ती रहीं.

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कमला जब 4 से 5 साल की बच्ची थीं, तब उनके पैरेंट्स कुछ समय के लिए ज़ाम्बिया शिफ्ट हुए थे, जहां कमला के नाना गोपालन भी उस वक्त पोस्टेड थे. नाना के साथ उस समय की यादों को भी कमला जीवन के शुरूआती सबक के तौर पर देखती हैं.

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अपने नाना, नानी, बहन और ननिहाल के रिश्तेदारों के साथ कमला हैरिस की ये यादगार तस्वीर एलए टाइम्स ने छापी है.


पूरा खानदान ही था प्रोग्रेसिव!
कमला के भारत में रहने वाले मामा बालचंद्रन अमेरिका से उच्च शिक्षित होने के बाद भारत में ही शिक्षा से जुड़े रहे. बालचंद्रन ने एक मैक्सिकन महिला से शादी की. कमला की एक मौसी सरला प्रसूतिविज्ञान में दक्ष रहीं और जीवन भर अपनी मर्ज़ी से अविवाहित रहीं. एक और मौसी महालक्ष्मी कनाडा में सूचना वैज्ञानिक रहीं. कमला कहती हैं कि बढ़ती उम्र में वो अपने खानदान में सभी को देखकर महसूस करती थीं कि कोई भी पारंपरिक विचारों का नहीं था. 50 साल की उम्र में 2014 में शादी करने वाली कमला के मुताबिक

जब आप एक परिवार में पलते बढ़ते हैं तो उम्र के साथ आपको एहसास होता है कि आपका परिवार कितना अलग हो सकता था. लेकिन मेरे साथ यह अलग होना ही सामान्य बात रही थी. जैसे जैसे मैं परिपक्व होती गई, मुझे महसूस होता गया कि सभी कितने पहले किस कदर प्रोग्रेसिव लोग थे.


कमला पर असर
नाना, मां और मां की तरफ के पूरे ​परिवार से कमला को मूल्य और विचार बचपन से मिले. इसके अलावा अमेरिका में रहते हुए वह एक साथ चर्च और मंदिर दोनों में श्रद्धापूर्वक जाते हुए बढ़ी हुईं. धर्म, जाति और नस्ल से उठकर समानता और सबके सम्मान की बात करना, समझा जा सकता है कि कमला की शख्सियत का हिस्सा प्राकृतिक रूप से रहा है.
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