कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई पर अब होगी सबकी नजर

कर्नाटक के राज्यपाल का गुजरात से लंबा रिश्ता रहा है. वो न केवल वहां से ताल्लुक रखते हैं बल्कि लंबे समय तक गुजरात में मंत्री भी रह चुके हैं.

News18Hindi
Updated: July 19, 2019, 4:43 PM IST
कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई पर अब होगी सबकी नजर
नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला
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Updated: July 19, 2019, 4:43 PM IST
कर्नाटक में मौजूदा सियासी उठापटक के बीच राज्यपाल वजुभाई वाला ने मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को 19 जुलाई की दोपहर 1.30 बजे तक बहुमत साबित करने को कहा था. लेकिन स्पीकर रमेश कुमार ने इससे साफ इनकार कर दिया. स्पीकर ने कहा, वो सदन में पहले बहस कराएंगे. फिर विश्वासमत पर वोटिंग. फिलहाल 21 जुलाई को भी बहस जारी रखने की बात कही जा रही है. आने वाले समय में राज्य में राज्यपाल वजुभाई वाला पर नजर रहेगी कि वो क्या करते हैं.

कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस की सरकार है, लेकिन 13 बागी विधायकों के इस्तीफे के बाद हालात बिगड़ गए हैं. सभी बागी विधायकों ने अपना इस्तीफा पहले ही स्पीकर को भेजा हुआ है.

क्या करेंगे राज्यपाल
अब कर्नाटक के राज्यपाल क्या करेंगे. उन्होंने पहले तो मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 19 जुलाई तक विश्वासमत साबित करने को कहा था, लेकिन वो अब नहीं हो सका है तो गवर्नर ऐसी स्थिति में क्या करेंगे. क्या वो मौजूदा सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं या कोई दूसरा कदम उठाएंगे.



चार साल पहले राज्यपाल बने थे
कर्नाटक में वजुभाई का राज्यपाल के रूप में कार्यकाल अब खत्म होने वाला है. वो उस समय कर्नाटक के राजपाल बनाए गए थे, जब वर्ष 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की अगुआई में एनडीए सत्ता में आई थी. वजुभाई गुजरात से ताल्लुक रखते हैं. ताल्लुक ही नहीं रखते हैं बल्कि मोदी के निकट रहे हैं. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं. कुछ समय के लिए गुजरात राज्य के भाजपा के अध्यक्ष भी रहे.
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लंबा राजनीतिक अनुभव
वो नौ साल तक तब गुजरात में वित्त मंत्री थे जबकि मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे. कुछ समय के लिए वो गुजरात विधानसभा के स्पीकर बनाए गए. बीच में जब गुजरात में आनंदीबेन पटेल की जगह मुख्यमंत्री पद के लिए अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा था, तब वजुभाई का नाम चर्चा में आया था. ये खबरें तक आईं थीं कि वजुभाई को राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार रहने को कहा गया था.

आपातकाल में जेल में भी रह चुके हैं
79 साल के वजुभाई वाला 1971 में जन संघ के सदस्य बने थे. 1975 में वो आपातकाल के समय 11 महीने तक जेल में भी रहे. 80 के दशक में वो राजकोट के मेयर थे. कुल मिलाकर वजुभाई का एक लंबा राजनीतिक करियर रहा है. उनके पास सियासी ऊंच नीच का भी लंबा अनुभव है.

वो ढाई दिन की येदयुरप्पा की सरकार बनवा चुके हैं
वजुभाई वाला पिछले साल कर्नाटक में चुनावों के बाद सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी भारतीय जनता पार्टी के नेता बीएस येदयुरप्पा की सरकार बनवा चुके हैं. हालांकि तब बीजेपी के पास पर्याप्त बहुमत नहीं था. इसे लेकर उनकी काफी आलोचना भी हुई थी. हालांकि येदयुरप्पा तमाम कोशिशों के बाद भी बहुमत साबित नहीं कर पाए और ढाई दिनों में ही उनकी सरकार गिर गई.

राज्यपालों की भूमिका पर सवाल
राज्यपाल का पद राजनीतिक आग्रहों से परे माना जाता है. लिहाजा माना जाता है कि राज्यपाल संविधान की दृष्टि से काम करेंगे, लेकिन ये भी हकीकत है कि पिछले कुछ सालों में राज्यपालों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए हैं. उन पर केंद्र सरकारों के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप भी लगा है.

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First published: July 19, 2019, 3:43 PM IST
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